00:00वासना भी एक सोभाव है डर भी एक सोभाव है वासना सोभाव नहीं है वासना आपको सिखाई जाती है मैं
00:06बताता हूं कैसे सिखाई जाती है काली लड़की को देखकर आम हिंदुस्तानी में वासना कम उठती है गोरी को देखकर
00:12के ज्यादा उठती है यह तुमें सिखाया ग
00:28गया जो नैचरली है अरे नैचरली नहीं है वह जो कुछ भी हो रहा है समाज में आ रहा है
00:33तुम पर को प्रभावव डाल रहा हुआ उसको नैचरल धोड़ी बोल दोगे ताम जिक जो है वो नैचरल
00:52नहीं मांगता और फिर उस female elephant से ये नहीं बोलता कि अगर तुने female elephant पैदा करी तो feticide
00:58कर दूँगा
00:59अंतर है male elephant female elephant के रिष्टे में और हिंदोस्तान में पुरुष और स्री के रिष्टे में दोनों सवभाविक
01:06नहीं है
01:07भारत में तो जो रिष्टा है स्वभाविक छोड़ो प्राकृतिक भी नहीं है वो सामाजिक है बस जो नर और मादा
01:13हाथी का रिष्टा है स्वभाविक वो भी नहीं है पर कम से कम प्राकृतिक है
01:16और हमारे समाज मों जो नर्णारी का रिष्टा है,
01:19वो स्वभाविक भी नहीं है,
01:21प्राकृतिक भी नहीं है,
01:22सिर्फ संसकारित है, समाजिक है.
01:25डर तभी भी रहता है,
01:26सब कुछ तभी भी रहता है,
01:27it's just आप उससे आइटेंटिफाई करना.
01:29होता ही कोई नहीं है जो डर को तरह तरह के नाम देगा की रंग देगा डर हो सकता है
01:35पर फिर वो डर समझ लो कौशन जैसा होता है चेतावनी जैसा होता है उस डर के साथ यह कहानी
01:40नहीं जुड़ी होती है पता तब भी होता है एक्जाम दे रहा हो सकता है एक्जाम में सेलेक्
01:47नहीं होगा, तो मेरी इजद घट जाएगी, घरवाले घर से निकाल देंगे, नौकरी नहीं मिलेगी, फिर लड़की नहीं मिलेगी, फिर
01:53मैं अकेला सडूँगा, फिर एक दिर मैं डिप्रेशन में सुसाइड कर लोगा, यह डर नहीं है, अब यह क्या है,
01:59यह हंकार है, डर के
02:17कान खड़े कर लेता है, कुछ खतरा है क्या, बर वा कहानी नहीं बनाता है, मनुष्य के जब कान कढ़े
02:23होते हैं, तो कहानी भी खड़ी होती है, यह हंकार है यह हांज क।
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