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00:10एक तरफ तो हम देख रहे हैं कि लोग हैं जो इसी युद्ध का इस्तमाल कर रहे हैं पैसा कमाने
00:15के लिए जिसका उधारण हम देख रहे हैं
00:20तो आपको ताजुब क्यों होता जब आप देखते हो कि एक देश दूसरे पर चड़ बैठा फिर कोई काला बजारी
00:26करके उसमें से पैसे कमारा जब और भी लडाईया हुई थी तब भी यही होता था जब भी इतिहास में
00:31युद्ध हुए हैं समाज का एक वर्ग राय जो अच
00:43चाओ एक दिखा दो हर आदमी अपने अपने तल पर अपनी सामर्थ है अपनी उकात मुताबिक जितना ज्यादा से ज्यादा
00:50जूट बोल सकता है बोल रहा है चल कर सकता है कर रहा है और किसी के साथ सहानुभूती रखना
00:55भी बड़ा मुश्किल है क्योंकि यह सब माम में सब
00:59कर दो दिन के लिए आपके शहर आया और कड़ी बात बोल रहा हूं हम बहुत बुरे लोग है हम
01:06बहुत बुरे लोग है और हमारी बुराई और ज्यादा बढ़ जाती है जब हम
01:18मेरा जो प्रसन है वो अभी के चल रहे है इरान, इसराईल और अमेरिका के वी जो युद्ध चल रहा
01:24है उससे संबंदित है एक तरफ तो हम देख रहे हैं कि इस युद्ध का इस्तेमाल जो न्यू टिवी चैनल
01:29से है वो अपने टी आर्प मुनाफे के लिए के लिए है दू
01:44तो अचारी जी हमारे अंदर ऐसा क्या है जो ऐसी त्रासद और दुख इस्तिती में भी केवल अपना ही मुनाफ़ा
01:52देख रहा है
01:53हमारे अंदर ऐसा क्या है
01:55इसमें कोई गोपनी ये बात तो है नहीं
01:58हमारे अंदर
01:59वही है जो है नहीं
02:02पर उसका
02:03दावा पुरा रहता है कि मैं ही मैं हूँ
02:05मैं ही मैं हूँ दूसरा कोई नहीं
02:08और उसका नाम भी कोई राज नहीं है
02:12उसका नाम
02:13रखते रखते तो
02:21क्या नाम है उसका
02:24तो मैं उसमें नया क्या बताऊँ
02:30उसने अपने आपको परिभाशे थी ऐसे कराए
02:35मैं कौन हूँ
02:37जिसका कोई नहीं
02:43मैं कौन हूँ जिसका कोई नहीं
02:45शरीर भी उसके लिए बस एक घर है
02:48और घर भी ऐसी चीज नहीं होती
02:51जिसका शोशन नहीं किया जा सके
02:53घर भी ऐसी चीज नहीं होती जिसको बेचा ना जा सके
02:55घर भी ऐसी चीज नहीं होती जिस पर हथोड़ा ना चला जा सके
02:59अहंकार किसी पर भी थोड़ा चला सकता है
03:02अहंकार कुछ भी बेच के खा सकता है
03:04देखा है नो शरीर का ही कैसे शोशन करता है
03:08अहंकार को अकेला पन लग रहा है
03:10अकेला पन लग रहा है
03:11तो शराब पी जा रहा है
03:12या गंदा खाना खाए जा रहा है
03:29अहंकार को शरीर को लग रहा होता है तो शरीर तब भी अकेला अनुभाव करता जब सोता है पर जब
03:33आप सो जाते हो अहंकार की दशा बदल जाती है तब तो अकेला पन कहीं नहीं रहता
03:40अकेला पन था अहंकार को बरबाद उसने किसको कर दिया शरीर को आज बहुत अकेला पन है तो आज चौकलेट
03:49ज्यादा खा लेते है आज कुछ डिप्रेशन सा लग रहा है चलो चाट पकोड़ी खा कर आते हैं वीकेंड है
03:58चार दोस्त आ गए चलो महफिल जमाते हैं बोतल ख�
04:06का मतलब ही है वो जो अपने आपको सदा अपूर्ण मानता है सदा अपूर्ण ही मानता है वो अपने आपको
04:18वो किसी का सगा नहीं जब वो अपने ही सगा नहीं तो किसी और का क्या सगा होगा वो तो
04:30अपना भी भला नहीं कर सकता है वो किसी और का क्या भला करेगा तो आपक
04:35क्यों होता है जब आप देखते हो कि एक देश दूसरे पर चड़ बैठा फिर मीडिया उससे मज़े ले रहा
04:41है फिर कोई काला बजारी करके उसमें से पैसे कमा रहा है वो आज ही नहीं हुआ है जब और
04:48भी लड़ाईया हुई थी तब भी यही होता था
04:52जब भी इतिहास में युद्ध हुए हैं समाज का एक वर्ग राय जो अचानक अमीर हो गया है अहंकार किसी
05:03का सगा नहीं है बोल तो रहा हूँ दूसरों की लाशे गिर रही हैं उनसे मुनाफ़ा बनाना उसके लिए बहुत
05:08आसान है
05:11वो तो ऐसा है कि अपनी भी लाश गिरा दे अपनी माने इस शरीर की जिसके भीतर वो स्वयम को
05:16स्थापित मानता है वो तो ऐसा है कि इस शरीर की भी अपने ही शरीर की भी लाश गिरा दे
05:21अपने फाइदे के लिए आत्मत्या उदारन के लिए और क्या होती है
05:30लुट गया परवाद हो गया ये क्या शरीर को लग रहा था
05:33ये क्या शरीर को लग रहा था
05:36हालत खराब किसकी थी क्या शरीर की
05:3825 साल का जवान लड़का है शरीर तो उसका हट्टा कट्टा था
05:41शरीर को तो कुछ खराबी नहीं थी
05:43सारी खराबी किसको दी अहंकार को मार किसको दिया लटक गया पंखे से किसको मारा है अहंकार को मारा गया
05:50शरीर को मारा है
05:53अहंकार ऐसा है कि दूसरों की लाशें क्या अपनी भी लाश्ट गिरा दे
05:58चले गए किसी आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र में
06:04वहां अहंकार को बिल्कुल प्रशिक्षित कर दिया गया
06:08कि जाओ और बम बांध कर जाओ और कहीं पर उड़ा दो बिल्कुल
06:15फिदाईन दस्ता बना दिया जवान लड़का था फिर से पचीज साल का
06:23क्या करा जाकर गे यहां पेट में बम बांधा शरीर उड़ा दिया
06:32पर उस खषण में भी प्रफुलित और गर्वित कौन मनुभाव कर रहा था
06:39अहंकार अपने स्वार्थ की खातिर दूसरों काशरीर तो छोड़ो अपना शरीर भी उड़ा
07:02रूप से तो हम सभी अच्छे हैं अरे इंसानियत भी कोई चीज होती है हम किसी धर्म को नहीं मानते
07:11हैं हम तो मानवता को मानते हैं इससे बड़ी मुर्खता की बात नहीं होती कोई
07:19मानवता माने क्या होता है
07:20मानव भी एक जानवर है बस और कुछ नहीं है
07:23मानवता माने पशुता
07:25ना हिंदू बनेगा ना मुसल्मान बनेगा
07:28इनसान की अवलाद है इनसान बनेगा
07:32बेवकूफी भरी और अर्थहीन बात है ये
07:37धर्म होता ही इसलिए है कि ये जो मा के गर्व से जानवर निकला है इसको इनसान बनाया जा सके
07:46तुम उसको छोड़ दो जंगल में देखो क्या होता है उसका
07:50तुम उसे कोई शिक्षा दिक्षा मत दो छोड़ दो जंगल में
07:54फिर देखो कि वो इनसान की अउलाद है कौन सा इनसान बनता है
08:10आपको ताजव इस बात का है कि अहंकार इतना हिंसक कैसे हो जाता है
08:17और मुझे ताजव इस बात का है कि आपको ताजव क्यों हो रहा है
08:22इसमें ताजव की क्या बात है मैं बताता हूँ अब ताजव की क्या बात है
08:27यहां से असली मुद्धा शुरू होता है
08:29यहां से ताजव की यह बात है कि हमने अपने आपको पट्टी पढ़ा रखी है
08:34कि हम भी अच्छे लोग हैं, हमारे आसपास भी अच्छे लोग हैं, नहीं ऐसा नहीं है, मुझे माफ करिएगा दो
08:40दिन के लिए आपके शहर आया और कड़वी बात बोल रहा हूं, हम बहुत बुरे लोग हैं, हर एक व्यक्ति,
08:52हम बुरे नहोते, तो धर्म की अध्यात्म की श
09:04बुराई और ज्यादा बढ़ जाती है, जब हम बुराई के ऊपर अच्छाई का नकाब ओढ़ लेते हैं, आप कहते हो
09:14ना कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, अच्छे आदमी, बुरे आदमी, चलती हैं, ऐसी मानने ता, नहीं,
09:20दो तरह के लोग होते हैं, बुरे ब
09:32बुराई के उपर अच्छाई का नकाब पहन लेते हैं इनको कहना चाहिए बुरे अच्छे आदमी है तो बुरे ही पर
09:41उपर से अच्छे दिख रहे हैं अच्छा होने के लिए तो बहुत बहुत यत्न करना पड़ता है अभी हमारे गीता
09:51सत्रों में उस दिन श्री कृष्ण कह
09:52रहे थे कि हजारों में कोई एक होता है जो यत्न की शुरुआत भी करता है मेरी और आने की
10:02हजारों में कोई एक होता है जो अच्छा बनना चाहता भी है बाकी तो चाहते भी नहीं बाकी बस इतना
10:10चाहते हैं कि अच्छे कहलाए जाएं अच्छे हो जाएं ये कोई नहीं चा
10:20करता है और यह सब जो शुरुआत करते हैं इन हजारों में फिर कोई एक होता है जो पार्थ मुझ
10:29तक पहुंचता है माने जो अच्छा हो पाता है तो अच्छा है के यहां कौन जब कोई अच्छा नहीं है
10:37बात आ रही है समझ में
10:49उसकी मूल वृत्ती खुद को बचाने की है उसे जो भी चाहिए कि नहीं चाहिए बाकी सब चीजे एक तरफ
10:58पहली चीज यह है कि मैं कायम रहूं आत्म रक्षा सेल्फ प्रिजर्वेशन
11:13है कि उसको यदि मुक्ति भी पानी है तो खुद को बचाए बचाए और खुद को बचाना माने किसको बचाना
11:31अपनी बुराई को बचाना तो बुराई मिट कैसे जाएगी इंसान की
11:38क्योंकि इन्सान बुरा ही पैदा होता है
11:40और उसकी पहली टेंडेंसी
11:42सबसे फंडमेंटल टेंडेंसी होती है
11:45अपनी बुराई को बचा कर रखने की
11:48बुराई मिट कैसे जाएगी
11:50हजारों में कोई एक होता है
11:51जिसको यह ख्याल भी आता है
11:52कि मैं बुरा हूँ मुझे यह बुराई हटानी है
11:54और जिन
11:56हजारों में से किसी एक को
11:58यह ख्याल आता है ऐसे जब
12:00एक हजार मिल जाते हैं उनमें कोई एक होता है
12:02जो बुराई हटाने में सफल पाता है
12:09हम जिसको सब्धता और संस्कृति कहते हैं
12:12वो इतिहास में किसी भी प्रजातिद्वारा स्वयम को दिया गया सबसे लंबा चौड़ा धोखा है
12:19हमने खुद को जता लिया है कि हम अच्छे लोग हैं आपने कभी पर्खा हम सचमुच कितने अच्छे लोग हैं
12:25आपने कभी पर्खा है
12:26कभी पर्खा है
12:30और जो प्रमाण सामने आते हैं जो साफ दर्शाते हैं कि हम बड़े बुरे लोग हैं आपने देखा है हम
12:35उन प्रमाणों को दबा कैसे देते हैं उपेख्चा कैसे करते हैं
12:44आपके ही शहर में मार्च के महीने में औसत तापमान इस साल कितना है और एतिहासिक रूप से कितना रहा
12:51है आपको पता है आपको नहीं पता होगा क्योंकि वो आपको दिखा देगा कि हम कितने बुरे लोग हैं प्रत्वी
12:58कोई छोटा सा गोला नहीं है और न प्रत्वी का वाय
13:06प्रत्वी खाली पूरे वायू मंडल को बदल कर रख दिया
13:17तापमान वृद्धी ऐसे ही नहीं हो जाती और छोटी मोटी तापमान वृद्धी नहीं हुई है दो डिगरी तीन डिगरी
13:23अभी तो गर्मिया शुरू हो रही है हम इतने बुरे लोग है हमने
13:29कोई जानवर भी होता है कोई चिडिया भी होती है कोई चीटी भी होती है जो अपने घर खा जाए
13:36हम इतने बुरे लोग है हम अपने घर खा गए और वो भी तब जब कि वो घर हमारा निजी
13:42घर नहीं था
13:43वो हमारा साजा घर था
13:46ना सिर्फ पूरी मानवता के साथ
13:48बलकि करोडों अन्य प्रजातियों के साथ
13:50वो घर हमें साजा करने के लिए दिया गया था
13:52पर हम उस घर को खा गए हम इतने बुरे लोग है
13:56पर ये बात आपके सामने मीडिया नहीं लाएगी
13:59धर्मगुरू भी नहीं लाएंगे
14:01सब आपको इसी भुलावे में रखना चाते हैं
14:03कि इंसान तो अच्छा है
14:06गल्ती तो उससे कभी कभार
14:09हो जाती है
14:11वरना तो
14:12डिफॉल्ट यही है कि वो
14:14अच्छा है और गीता आपसे कह रही है
14:17डिफॉल्ट यह कि तुम बहुत बुरे हो
14:21लाखो करोणों में कोई एक होता है
14:23जो सचमुच अच्छा होता है
14:25बाकी तो हर आदमी
14:29कहते ना कि ऐसे पत्थर भेको
14:31तो किसी बुरे को ही लगेगा
14:33हम इतने बुरे हैं
14:40अब बताओ अब ताज्जब की बात लग रही है
14:42कि वो दो जने चड़के आ गए हैं इरान को मार रहे हैं
14:47और उन दोनों ही देशों के जो धर्मा बलंबी हैं
14:50वो कह रहे हैं हाँ एक इसाई ताकत
14:52एक यहूदी ताकत मिलकर एक मुसल्मान ताकत को मार रही है
14:57और वहाँ जितने मुसल्मान है वो कुछ दिन पहले तक
15:00वो अपनी हुकूमत गिराने को तैयार बैठे थे
15:03वहाँ तीन साल से विद्रो चल रहा है
15:08युवाओं दोरा महिलाओं दोरा खूब वहाँ पर
15:13विद्रो का जंड़ा बुलंद है
15:16लेकिन अब अमेरिका का अकरमण हो गया है तो कह रहें नहीं
15:20अब हम राश्च्रवादी हो गए
15:24अब हम आपस में एक है
15:27और हमारे जो साजे दुश्मन है वो ये है
15:31इसाई और यहुदी
15:35अब बताया जा रहा है कि ये सब कुछ किया जा रहा है
15:38अंतर राश्ट्रिय सुरक्षा गे नाम पर
15:42जियो पोलिटिकल स्टेबिलिटी भी तो लानी है
15:52कोई एक इंसान बता दो इस
15:55पूरे वाकए में
15:58पूरे प्रपंच में जो सच्चा हो
16:00एक दिखा दो
16:02हर आदमी अपने अपने तल पर
16:05अपनी सामर्थ है अपनी अवकात मताबिक
16:08जितना ज्यादा से ज्यादा जूट
16:09बोल सकता है बोल रहा है छल कर सकता है कर रहा है
16:15और किसी के साथ सहनुभूती रखना भी बड़ा मुश्किल है
16:21क्योंकि इस हमाम में सब नंगे है
16:24अभी पिट रहा है इरान
16:26लेकिन इसी इरान ने
16:27सीरिया, लिबनान, ओमान
16:30नजाने कितने जगहों पर आतंगवादी गुट खड़े कर रखे थे
16:35अपने ही देश के लोगों को दबा रखा था
16:37तो लगता तो है कि गलत हो रहा इरान के साथ
16:40पर इरान का साथ देना भी मुश्किल है
16:42तुम कौन से दूद के धुले हो
16:48उधर इसराइल को देखो तो वहाँ दिखाई पड़ता है
16:50बात तो सही एहमास उनकी उपर चड़ाया था
16:52वो कुछ नहीं कर रहे थे आकर के उनके हजारे लोगों को मार दिया
16:55पर फिर देखो कि इसराइल ने क्या करा है
16:57तो फिर कहते हो कि इसराइल से आदा बुरा तो फिलिस्तीन के साथ हुआ है
17:04यहां सच्चा कौन है यह तो बताओ
17:09और उसके बाद आप कहते हो अरे अरे अरे
17:14दुनिया कितनी बुरी है कितना अजीब हो गया
17:17अजीब ही है हो गया कि आप दुनिया को अच्छा मान रहे थे
17:21और आपकी मजबूरी है दुनिया को अच्छा मानना क्योंकि दुनिया को अच्छा नहीं मानोगे
17:25तो आपको विद्रोह करना बड़ेगा
17:32आप भली भाते जानते हो कि हर रिष्टे में व्यापार है और समझोता है
17:39आप भली भाते जानते हो कि जिनके साथ आप मुस्कुरा कर मिल रहे हो
17:45कुछ सीमाएं कुछ रेखाएं आप लांग दो वही आपका गला पकड़ लेंगे हाँ या ना
17:54जिनके साथ सबसे आत्मिये और अंतरंग रिष्टे हैं कुछ बातें कुछ चर्चाएं आप भी उनके साथ नहीं कर सकते कि
18:03कर सकते हो
18:06आप बहुत अच्छे से जानते हो कि घर पर भी कौन से मुद्दे अगर आपने छेड़ दिये तो घर बिखर
18:10जाएगा
18:13हम ऐसे लोग हैं और फिर हम अपने आपको अच्छा आद्मी बोलते हैं हमारे तो रिष्टे भी लेंदेन पर बने
18:19होते हैं कोई रिष्टा नहीं है जिसमें लेंदेन न चल रहा हो
18:24और लेना थोड़ा ज्यादा कर दो देने से रिष्टा भी गिर जाएगा
18:30और दोनों ही पक्षिये सोच रहे होते हैं कि हम तो ज़्यादा ही ले रहे हैं दूसरे से इसलिए रिष्टा
18:34चल भी रहा है
18:36दोनों इतने मूर्ख हैं कि सोच रहे हैं कि हम सामने वाले को मूर्ख बना रहे हैं
18:41माया हस रही है कह रही है ना तू उसको मूर्ख बना रहा है वो तुझे बना रहे हैं मैं
18:44दोनों को बना रही हूं
18:52हम कौन से कोण से आपको अच्छे आदमी लगते हैं बताईए ना
19:01क्या मीडिया आपको बता रहा है कि यो युद्ध चल रहा है
19:06इसमें कितने मेट्रिक टन कार्बन उत्सरजित हो रहा है कोई बता रहा है
19:10ना वो बता रहे ना आप जानना चाहते हैं क्योंकि इस वक्त आपके लिए
19:13रोमांच की बात बस यही है कि कौन सी वाली मिलिटरी जीती
19:22और इस रोमांच के सामने ये कौन सोचे कि क्लाइमेट का क्या हो रहा है
19:26कि एक-एक बम कितना कारबन छोड़ रहा है
19:30कौन सोचे अभी ये
19:34कभी ये ख्याल में बात आई
19:36कि एक साधारण कार तो चलती है
19:38तो आप कहते हो अरे-अरे कार का धुआ गडबड है
19:41सियो टू निकल रही है चलो इवी चलाते हैं तो टैंक चलता होगा तो क्या निकलता होगा
19:48कभी ये बात ख्याल में आई और टैंक सिर्फ लडाईयों में नहीं चल रहे हैं जब लडाई नहीं भी हो
19:53रही तो अभ्यास के लिए भी चल रहे है
19:58अभी कल ही मैं बात कर रहा था और आज के ये ख़बार में छपी ये ओबाचीद
20:03कि हम ये जो वायू यात्रा होती है
20:09उड़ेन ख्षेत्र, सिविल अवियेशन, कमर्शियल
20:12हम इसको कहते हैं कि ये बहुत ज्यादा कार्बन एमिटिंग होता है
20:16उससे तीन गुना ज्यादा कार्बन एमिटिंग करती हैं दुनिया की वार मशीन्स
20:25दुनिया की जो मिलिटरीज हैं वो दुनिया भर के सारे कमर्शियल प्लेंस से तीन गुना ज्यादा कार्बन एमिटिंग करती है
20:35पर वो बात हमें अच्छी लगती है अभी चल रहा है इरानियो तो अच्छा लग रहा है देखो ये जूरररर
20:40वीडियो गेम की तरह लगता है
20:45हम अच्छे लोग है
20:48और ये तो मैं सिर्फ प्लेन ने कितनी कार्बन डायोकसाइड छोड़ी उसकी बात कर रहा हूँ जो बम गिरेगा वो
20:53अलग है
20:54उसके बाद जो इमारत धोस्त होगी वो इमारत जब जलेगी तो उसमें जो कार्बन डायोकसाइड निकलेगी वो अलग है
21:00और उसके बाद जब नई वारत बनाई जाएगी
21:03तो उसमें जो स्टील सीमेंट लगेगा
21:05और उसमें जो कारबर डायोकसाइड लगेगी
21:06वो अलग है
21:13हम अच्छे लोग है
21:15हम वो बुरे लोग है
21:17जिनमें एक अदभुत क्षमता है
21:19खुद को धोखा देकर
21:21खुद को अच्छा घोशित करे रहने की
21:25ये इनसान की मौलिक पहचान है
21:29आपने प्रवंचना की
21:31सेल्फ डिसेप्शन की
21:32जो क्षमता हमारी प्रजाती में होती है
21:35वो किसी में नहीं है
21:38हम में से बुरे से बुरा आदमी
21:40अपने आपको सफलता पूर्वक ये जता लेता है
21:43कि मैं तो अच्छा आदमी हूँ
21:45मैं तो अच्छा आदमी हूँ
21:55और एक अब आखिरी मज़िदार बात सुनियेगा
21:59जब हजारों लाखों करोडों लोग मिल करके
22:03एक दूसरे को अच्छाई का प्रमान पत्र दे लेते हैं
22:08तो अगर धोके से कोई सच्छा आदमी वहां आ गया
22:15तो वो बुरा हो जाता है
22:24क्योंकि अगर तुमने उसको अच्छा मान लिया तो तुम्हें ये भी मानना पड़ेगा
22:27कि ये तुम्हारा सारा समाज बुरा है ये कैसे मानोगे सारी मारते धोस्तो जाएंगी
22:33सारी विवस्थाएं गिर जाएंगी सारे स्वार्थ तूट जाएंगे
22:39सारी इच्छाएं हिलने लगेंगी सारी धारणाएं माननेता परंपरा सब काप जाएगा
22:45तो इससे अच्छ है यह है कि जो सचमुच अच्छा आदमी आया है
22:48सस्ता सौदा उसको ही घोशित कर दोगी वही बुरा है
22:52ताकि जितने यह करोडों बुरे हैं इनकी बुराई सुरक्षित रह जाए
23:13आउट्रेज इसी लिए मुझे कभी समझ में नहीं आती है
23:16कोई घटना घट जाती है लोग छाटी पीटना शुरू कर देते हैं
23:19कपड़े भाड़ना शुरू कर देते हैं
23:22युद्ध हो गया औरे ये कैसे हो सकता है
23:25हमारी स्वर्ग तुले शांत धरा के उपर
23:29दो लोग जाकर एक दूसरे से लड़ रहे हैं
23:31कैसे हो सकता है हम इतने अच्छे लोग हैं मड़ाई कैसे कर सकते हैं
23:34आउट रेज आउट रेज
23:37बलातकार करके हत्या कर दी जाती है
23:39कैयों को जटका लग जाता है कहते हैं
23:41अरे हम तो इतने अच्छे लोग थे ये कैसे हो गया
23:47कहीं कोई घपला सामने आ जाता है कि
23:49लाखों लोगों के पैसे लूट लिए गए लोगों को
23:51अरे अरे ये कैसे हो गया
23:53अद्भूत आश्यर ये कैसे हो सकता है
23:58ये आश्यर भी वेक्त करके हम अपने आपको बस
24:01गलत फहमी में रखना चाहते हैं इतनी सी बात है
24:07आश्यर तब करो जब कोई सचमुच अच्छा आदमी मिल जाए
24:11बुरा आदमी मिल जाए बुरी घटना मिल जाए उसमें अचरज की कोई बात नहीं वो तो नियम है क्योंकि आदमी
24:18पैदा ही बुरा हुआ है और हमारी सारी विवस्थाएं उस बुराई को बचाने के लिए ही है अचमभा तो तब
24:25मानो जब लाखों करोडों में कभी कोई अच
24:28आज कुछ अलग हुआ है आप उल्टा चलते हो बुराई देखकर आज शर्र करते हो तो बोलिए प्रणाम आचार्य जी
24:41मेरा प्रशन है कि सही अध्यात्म क्या है और अध्यात्म का उद्देश क्या है कि यूट
24:55आप गीता सत्रों में है जी सर चे मेने से आप पूछ रही है आप ये फिर वहां पर नहीं
25:01मिला उत्तर तोड़िए यहां और लोगों को पूछने दीजिए और विस्तार से जानना चाहती हो यह ऐसी सी बात है
25:08कि आप शेक्स्पियर की क्लास में है और आचार जी से आगर प�
25:22तरीके से घाड़ घाड़ कर सामने ला रहे हैं ना बीतर जो अहंकार बैठा हुआ है वो खुद को जाने
25:29यही अध्यात्म होता है
25:32स्वयम को ही और जानना अध्यात्म होता है
25:35और स्वयम माने मैं मैं कहने वाला अहंकार ही होता है
25:39अहंकार ही खुद को और जाने इसको अध्यात्म कहते है
25:44और कैसे खुद को जानोगे अहंकार भीतर कहीं बैठा तो हुआ नहीं है डिबिया की तरह
25:49अंकार को जाना जाता है
25:51उसके कर्मों को इमानदारी से देख करके यही अध्यात्म है
25:55और इसके अलावा बाकी जो है अध्यात्म के नाम पर या धर्म के नाम पर
26:00वो सब बस प्रपंच है नोटंकी है
26:08अध्यात्म माने इतनी सी बात
26:10उसका तो नाम है अधि आत्म
26:12अधि माने और अधिक अधि
26:15आत्म आत्म
26:16आत्म माने आत्मा नहीं
26:17आत्मा कहीं भीतर नहीं बैठी है शरीर के
26:20आत्म माने मैं
26:23और मैं माने हंकार
26:26इसी को आत्म ग्यान कहते हैं
26:29और उसकी एकमात्र विधि है आत्म वलोकन
26:31क्योंकि आप जो हो
26:33वो और किसी भी तरीके से
26:35देखा जा ही नहीं सकता
26:36उसको देखने का एक ही तरीका है
26:38क्या?
26:40देखो की हरकते क्या कर रहे हो
26:42देखो की कामनाएं किस दिशा जा रही है
26:44देखो की डरते किस से हो
26:45यही अध्यात में
26:51देख तो लेते ही हैं
26:52देखने के बाद मुश्किल क्या पड़ता है सुईकारना पता तो है कि किस से डरते हैं पर खुद से भी
27:05यह मानना आइने के सामने भी खड़े हो के सुईकारना कि मैं डर पोख हूँ यह मुश्किल पड़ता है और
27:11यही सचमुछ अध्यात्म है जो अपनी भीतरी सच्चाई है
27:16अब भीतरी सच्चाई माने भीतर कोई जीवात्मा वगरा उबल रही है उसको देखने को नहीं कहा जा रहा है
27:20भीतरी सच्चाई माने भीतर डर से भरे हुए हो
27:23भीतरी सच्चाई माने लालच है, नफरत है, इरश्या है
27:27यही है भीतरी सच्चाई
27:29जो अपनी भीतरी सच्चाई है उसको इमानदारी से जानना बेमानी करके इंकार ना करना यही अध्यात्म है
27:41और सब जो आप करते रहते हो ये वो पूरा तमाशा घर्म के नाम पर उसका अध्यात्म से कोई तालुक
27:49नहीं हो, मनुरंजन है, आपको मनुरंजन करना है, आप करिए आपकी मर्जी
27:55अचारी एक और सवाल था, जिस तरह से मिडिलिष्ट में युद्ध हो रहा है, इसका असर किस तरह से हो
28:00सकता भारत पे, और सबसे जादा प्रभावित तोन हो सकता, क्या यूद्ध प्रभावित हो सकती है इस तरह कहीं?
28:06यूद्ध तो प्रभावित होती है, अब आप संदेश ये दे रहे हैं कि जिसकी लाठी उसकी भैस, तो अहंकार के
28:13लिए तो ये सबसे पसंदीदा वचन है, वो तो यही सुनना चाहता है, उसके कानों के लिए तो अम्रित है
28:18ये, कि तहाव आपको दूसरे को दबा के रखन
28:21के लिए अब कोई तरक भी नहीं चाहिए, कोई जस्टिफिकेशन भी नहीं चाहिए, इतना ही काफी है कि मेरे पास
28:28बल है, और बल सबसे बड़ा तरक हो जाता है, और कोई डिफेंस नहीं चाहिए, और कोई सबूत साक्षे तरक
28:35प्रमान कुछ भी नहीं चाहिए, सिर्फ क्य
28:49कि जरूरत है ना समझदारी की ना विवेक की जरूरत किसकी है धन बल की बाहु बल की लट्थ बल
28:58की मिसाइल बल की तो वो भी फिर जिंदगी में यही करेंगी कि यह इन के इन प्रकारेंड किसी तरीके
29:03से वस ताकत हासिल कर लो ता है उसके लिए फुद को बेचना पड़े क�
29:20कि यह पूरी दुनिया को सिखाया जा रहा है और यह सिधान्त अनततह आत्मघात्तक होगा।
29:36जितने ज्यादा लोग ये पार्ट पढ़ते जाएंगे, वो उतना ज्यादा युद्धवनमादी होते जाएंगे, वो इसकी जो परिनती होनी है, वो
29:44आत्मधात महीं होनी है, प्रत्वी वैसे भी विद्धवन्स की काहर पर खड़ी हुई है, ये बहुत गलत पार्ट पढ़ा
30:06न्यूक्लियर वैपन लगा करके अमेरिका तक पहुँचा सको, क्योंकि अब सुपर पावर से बचने का एक ही तरीका है कि
30:13आपके पास प्रतिकार और प्रतिखात करने की शक्ति हो, भही आप यही तर्क तो लेकर के चड़गे हो ना, वेनेजिवेला
30:20के उपर, एरान के उप
30:35पहुच जाएंगे, तो दुनिया की सब राइधानिया भी बैठकर विचार कर रही है कि अगर हम भी अपनी जान बचाना
30:42चाहते हैं, तो हमें भी और ज्यादा आप अनविक हतियार चाहिए और मिसाइलें चाहिए, तो हमने जितनी नाभकिये अप्रसार की
30:49बाते करी थी, NTP
30:51सब आपके चड़े के डबे में जाने वाली हैं, मैं ये भाविश्वानी कर रहा हूं कि अब आप बड़े पैमाने
30:58पर दुनिया में नुक्लियर प्रॉलिफरेशन देखोगे, जिन देशों के पास नुक्लियर हतियार है, वो अपनी टेक्नालोजी बेचेंगे, इसका बड�
31:38सब्सक्राइब कर सकते हूं, मैंने इसका नाम ने रखा हूं, मैं आप सिर्व इसका नाम लेना चाहती हूं
31:44चापना अक्षर बताओ, क्या बोलते हो सबसे आपके, कुछ बोलो, बोलो, कार में मुलताओ
31:57आप बोला हूं, आप बोलताओ, आरजव, आरजव, सी आसरल भोला, आरजव, भाई, आम करना हो गए है किसी बहीँ, ठालियाँ
32:13तो बजनी चाहिए है न,
32:16कर दो.
32:44एकते मारी जरे एकते हुगे लोगा
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