00:02दिल्ली में शद्धा और भक्ती का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब राजधानी के प्रसिद कालकाजी मंदिर में
00:09मातारानी के दर्शन के लिए भारी संख्या में शद्धालों उमर पड़े।
00:30अद्धालों अपने परिवार के साथ मातारानी के दर्शन करने पहुँचे और सुख सम्रध्धी वशान्ती की कामना की।
00:37कई भक्त दूर दराज के इलाकों से भी यहां पहुँचे जिससे दोनों मंदिरों के आसपास के शित्रों में विशेश चहल
00:45पहल देखी गई।
00:46वही मंदिर में मातारानी के दर्शन करने आयश धालवों ने बताया कि मातारानी के दर्बार में आकर उन्हें मान सिक्षान्ती
00:54और सकरात्मक उर्जा मिलती है।
01:28दूसरी और प्रसित जंडे वालान मंदिर में मातारानी के दर्शन के लिए श्रधालों की भारी भीड उमर पड़ी।
01:35सुबै से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारे लगनी शुरू हो गई थी जो दिन चहने के साथ और भी
01:41बढ़ती चली गई।
01:42इस दौरान भारी संख्या में श्रधालों मातारानी के दर्शन करने के लिए पहुँचे।
01:46कैश धालों ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया कि उन्हें इस पावन अवसर पर माता के दर्शन करने का
01:54अवसर मिला।
01:55इस स्थान पे जंडे वाली माता के आँ मैं पहली बार आया हूँ।
01:59मैंने देखा बहुत ही अच्छा साब सफाई और अच्छी बेवस्था है।
02:04यहां के जो सेवादार है बहुत ही कोपरेटिव हैं और कोई धक्का मुकी नहीं होती है।
02:34और मातारातनी का सुभा सिरबात प्राप्त करें।
02:38जै मातादी मंदर में बहुत अच्छी ववस्था है।
02:41मेरे का मंदर खूब अच्छी तरह सजा हुआ है।
02:44मेरे को जहां आते तीस साल हो गए हैं तो बहुत सुंदर लगता है।
03:17दिल को बड़ी अनन्द आता है।
03:20और भगवान शिव ने प्रसंद होकर उन्हें वरदान दिया था कि तुम्हारा पानि ग्रहन सस्कार मेरे साथ होगा।
03:31तो ममा हागवरी का पुराणों में वरणन मिलता है कि उनके आयो आठ वर्ष की कन्या का है।
03:36तो इसलिए आज कन्या पूजन का भी विधान बताया गया है।
03:41चैतर नवरात्री की अस्चिमी पर संगमनगरी प्रयागराज के अलोपी बाग इस्थित प्राचीन अलोप शंकरी शक्ति पीट में भगतों का सैलाब
03:50उमर पड़ा।
03:51एक क्यावन शक्ति पीठों में से एक इस अनूठे मंदिव में माता की मूर्थी के बजाए एक दिव्य पालने की
03:58पूजा होती है।
03:59अस्टमी के पावन अवसर पर कन्या पूजन का विशेश महत्व है।
04:03ब्रह्म मुहूर्थ से माता के दर्बार में शद्धालवों का दर्शन पूजन के लिए जनसैलाब उमर पड़ा है।
04:10वहीं अस्टमी और नौमी के दिन घरों और मंदिरों में कन्याओं को देवी का रूप मान कर उन्हें भोजन करा
04:17कर आशिरवाद लेनी की परंपरा है।
04:20जिसका विशेश महत्व है।
04:40अस्टमी का पर्व है तो सब लोग महुच शद्धा पूरवक और शांती पूरवक दर्शन कर रहे हैं माता का।
04:46और हम अपने लिए और साथ में देश पास्विक में प्राथा रणना चाहते हैं।
04:50यहां इस सब्संदेदी और उन्हें की पथर और अभिशार करें।
05:06नवरात्री के आठवे दिन देश भर में आस्था और शद्धा का अध्भूत महौल देखने को मिला।
05:12इस अवसर पर प्रियाग राज के अलोब शंक्री शक्ति बीत, कालकाजी मंदिर और जंडे वालान मंदिर सहित
05:18कई प्रमुक मंदिरों में मातारानी के दर्शन के लिए शद्धालवों की भारी भीर उमर पड़ी।
05:24इसी बीच देश के कुछ हिस्सों में राम नौमी भी धूमधाम से मनाई गई।
05:29शद्धालवों ने भगवान राम की पूजा अर्चना की और मंदिरों में विशेश कारिक्रम आयोजित किये गए।
05:35भजनकीर्तन और धार्मिक आयोजनों से वातवरण और भी आध्यात्मिक हो गया।
05:41झाश
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