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  • 11 minutes ago
शहीदी दिवस विशेष: आगरा की इस कोठी में छात्र बनकर क्रांतिकारी साथियों संग शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने सीखा बम बनाना सीखा था.

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00:00सहीद भगत सिंग, राजगुरू और सुखदेव का आगरा से गहरा नाता रहा है।
00:06नूरी दरवाजे इस्थित कोठी नमबर 1784 इसका गवा है।
00:11इस कोठी में चात्र बनकर के सहीद भगत सिंग, राजगुरू, सुखदेव, चंदर सेखर आजाद भी किराए पर रहे थे।
00:20और इस कोठी को ही इन क्रांतिकारियों ने अपनी बम बनाने की फैक्टरी बनाया था।
00:26भगत सिंग, राजगुरू, और सुखदेव आके यहां आगरह में रहे थे, दूजी दर्वाज अच्छे तुम्हें, और इनके साथ के कुछ
00:33करांत करी नाई की मंडी के गुजाती परणा में रहे थे, जब यह यहां दहा करते थे, तो इन्होंने यहां
00:40पर अपना नाम ब�
00:56च्छेता था, और इनको बंब बनाने का प्रसक्चर दिया, जिसका की प्रयोग जाकर फिर जहांसी का जंगलों में की आयाता
01:03था, और यही बंब आगए चलकर संसद में खुड़ा गया, हाँ आगरह से लोग समरना गवाई देने के लिए जाते
01:11थे, जिस दूद दूद वाल
01:26प्रसक्चर दिया गया था, जब इतने देश में इतने काम हो रहे हैं और भगत संग की अमर इसमर्थी की
01:32ये बिल्डिंग को सुरक्षित नहीं रखा जा रहा है, इसको सरकार को अपने नेंधर में लेकर यह भगत संग का
01:38इसमारक बनाया जाना चाहिए, जिसमें और साथ मे
01:41और करनतकारी सुक्देव, राजगुरू, चंसेका रायाद, भगवान दास महोर बगरा की वे इसमर्थी चिन्द होने चाहिए, आगरा के नूरी दरवाजे
01:53पर सहीद भगत सिंग का मंदर बनाया गया है और इन में उनके आगरा के कनेक्शन की पूरी कहानी अन्य
02:01करांतकार
02:01के साथ लिखी हुई है, लेकिन आजादी की गवाह ये कोठी नंबर 1784 जरजर है, इस और नप जिला प्रसासन
02:10का ध्यान है और ना ही नगर निगम का, लंबे समय से इस आजादी की गवाह जरजर कोठी को संरचित
02:17करके भव्व इसमारक बनाने की मांग उठ रही है, जिससे �
02:22आगे आने वाली पीड़ी इन क्रामतिकारी और सहीनों के इतिहास को जान सके, बुरो रिपोर्ट शामबिर सिंग, इटीवी भारत आगरा
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