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मिडिल ईस्ट में जंग से भारत की इकॉनमी पर पड़ेगा कितना असर? देखें दंगल
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00:05नमस्कार मैं हूँ साहिल जोशी और आप देख रहे हैं दंगल मध्यपूर्ब में जो जंग चल रही है वो जंग
00:11अब भूराजनीती की ख़बर नहीं रहे गई
00:14दूसर उसका असर हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी पर भी उतरने लगा है जिस तरीके से इरान के बीतर हमले हो
00:21रहे हैं और इरान उसका जवाब दे रहा है उसका असर सिर्फ एरान और इसराईल और अमेरिका तक नहीं तो
00:26पूरे दुनिया पर पड़े लगा हमारी देहलिच �
00:29पर आकर में रोकिया है सवाल सिर्फ ये नहीं है कि युद्ध कौन जीत रहा है या कौन हार रहा
00:34है बलकि ये हो गया है कि इसकी कीमत कौन कौन चुका रहा है तो इसके इस जवाब में भारत
00:41भी कही ना कहीं शामिल है और ये साफ यहां पर नज़र आ देल की कीमतों में उच
00:59इनी उर्जा ज़रूरत के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्बर है ऐसे हर जटके को तुरंत मैसूस करना।
01:06स्थिती इसलिए और गंबिर हो जाती है क्योंकि सप्लाई का बड़ा हिस्सा उसी संदुद्री रास्ते से आता है जहां इस
01:12समय पीशिट जंग छड़ी हुए हलागि अभी तक भारत को कोई बड़ा आर्थी जटका नहीं लगा है लेकिन दबाव मैसूस
01:21होना और बनना शुर�
01:35नीती और दूर दरशिता इस संकट से भारत को बाहर निकालने में कारगर साबित हो सकेगी इस बीच विपक्ष सवाल
01:43पूछ रहा है सवाल उठा रहा है और अर्थरा शास्त्री अपने हिसाब से इस पूरे ममले पर गुड़ा भागाकार कर
01:50रहे हैं और अपना जवाब भी �
01:52आज सबसे सीधा सवाल यही है कि एरान, अमेरिका, इसरायल जंग से भारत की अर्थवेवस्टा पर कितना असर होगा और
01:59इनी सवालों के साथ इसी के इल्दिर हम बड़ी बहस करेंगे, चर्चा करेंगे, लेकिन इससे पहले भारत की अर्थ्वेवस्टा को
02:06लेकर और इस य
02:36युद्ध की लफ्तों की आज भारत की अर्थव्यस्था तक महुँच रही है
02:42युद्ध करीब 2500 किलोमीटर दूर लड़ा जा रहा है
02:45लेकिन उसकी आहट सबसे पहले हमारी जीब सुनती है
02:48हमारे घर के चूले महसूस करते हैं
02:50फैक्ट्री से लेकर सरकार के खजाने तक उसके असर का एसास कर रही है
02:55भारत में फिलाल तो प्रीमियम पेट्रोल की धार महगी हुई है
02:58और इंडस्ट्रियल डीजल महगा हुआ है
03:02प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें 2 रुपे 35 पैसे प्रती लीटर तक बढ़ गई
03:06जब कि सरकार ने इंडस्ट्रियल डीजल पर भी 22 रुपे बढ़ा दिये
03:22अब प्रेट्रोल की इनजार करिए चुनाव हो जाने दीजिए
03:28देखिए यह जब भी चुनाव खतम हो रहे हैं
03:30देखिए यह सारे पैट्रोल और डीजल पर कैसे दाम बढ़ाते हैं
03:33और ये बात ये चेतावनी हम बहुत पहले दे चुके हैं
03:36जो 26-27 लाग करोड रुपया पिछले 12 साल में
03:40सरकार ने टैक्सिस के माध्यम से पेट्रोल और डीजल पर जो टैक्स लगते हैं
03:44जो वैट्स लगती है जो ड्यूटी लगती है एक्साइज लगती है
03:47जो उस पे कमाया है
03:48क्या वो लाब ऐसी संकट की घड़ी में उपभोकता को नहीं दिया जा सकता हम ये सवाब
03:54प्रीमियम पेट्रोल के कंजूमर्स बहुत ही लिमिटेड है और उसका एक अलग प्रोसेस होता है रिफाइनिंग का
04:00और उसमें एक नॉमिनल इंक्रीज हुई है उसका इंपेक्ट आम लोगों के जीवन पर बिलकुल नहीं पड़ता है
04:06और रही बात उसमें भी इंक्रीज की तुम्हें याद दिलाना चाहूँगा
04:10ये क्रूइड ओयल में भैंकर उचाल के बावजूद भारत में पेट्रोल डीजल की प्राइसेस स्टेबल बनी हुई है ये भारत
04:18की एकनॉमिक फंडामेंटल्स की स्ट्रेंथ
04:21खाड़ी देशों में जारी भूशन युद्धों में वेश्वी कूर्जा बाजार हो तेहल का मचा दिया है भूराजनिती का अस्पिरता के
04:27कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकरती गैस की सप्लाई चेन गुरी तरब प्रभवित हुई है
04:37अब ऐसे में सवाल ये है कि इरान अमेरिका जंग का भारत के अर्थिवस्था पर कितना से है
04:44इरान वार की वज़े से हिंदुस्तान में इंफलेशन बढ़नी तैय है
04:47साथी साथ हिंदुस्तान में करांट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है
05:02सबसे पहले तो पेट्रोल डीजल, नॉर्मल पेट्रोल डीजल में चाहे मार्केट लिंकिंग का कॉंसेप्ट है
05:07लेकिन आज एमर्जेंसी सिच्वेशन को देखते हुए सरकार को वाँ सबसीडी देरी चाहे ताकि पेट्रोल डीजल का रेक्टा बढ़े
05:1328 फरवरी को इरान पर अमेरका इसराइल ने हमला बोला था
05:1728 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले प्रूड ओयल 70 डॉलर के करीब थी
05:21लेकिन अब 110 डॉलर के पार कर गई है
05:24भारत अपनी जरुरत का करीब 85 फिस्दी कच्चा तेल आयात करता है
05:28इसका मतलब दुनिया में तेल की किमतों में हलचल सीधे भारत की जेप पर असर डालती है
05:33तेल की किमतों के बढ़ने की सबसे पड़ी वज़ा स्टेट ओप हॉर्मोस का बंद होना है
05:41दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 फिस्दी हिस्सा यही से गुजरता है
05:46साओधी अरब, इराग और खुवेट जैसे देश भी अपने निर्याद के लिए इसी पर निर्वर है
05:50भारत अपनी जरुत का 50 फिस्दी कच्चा तेल और 54 फिस्दी एलनची इसी रास्ते से मंगाता है
05:56इसलिए स्ट्रेट ओफ हॉर्मोस एहम हो जाता है
05:59जिस पर इरान ने अमेरिका इस्राइल हमले की वज़े से नाकाबंदी लगा रखी है
06:03ऐसे हालाद से निपटनी के लिए भारत ऊटनीती का सहरा ले रहा है
06:08आप जानते हैं दुनिया में इस समय युद्ध चला है
06:12जिस तरह से पश्चिमेटिया में लगाता है हमले हो रहे हैं
06:17मैं समझता हूँ के बल भारत के ही लेने नहीं बलकि पूरे विश्व के लिए एक शिंतागा भी ते है
06:23लेकिन भारत ने साथ तोर पर अपने पक्ष को रखते हुए कहा था
06:28और आज भी कहा है हमारे प्रधानमंतरी वोदीजी ने
06:32विश्व की इस समय की यो सबसे गंभीर शमत्या है
06:36जिस तरह से विश्व में युद्ध चला है
06:39उसका समाधान निकालना है तो वह युद्ध के माध्यम से उसका समाधान नहीं निकलेगा
06:53अगर अंतराश से बाजार में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ते रहे तो भारत इससे अच्छूता नहीं रह सकता है
07:00एक्सपर्ट बताते हैं कि पेट्रोल डीजल महगा होने से फल्द, सब्जी, अनाज की धुलाई महगी होती है
07:05तेल आयात के लिए डॉलर की मांग बढ़ती है जिससे डॉलर के मुकाबले भारती ये रुपया कमजोर होता है
07:11लोगों का ट्रांस्पोर्ट और रसोई गैस पर खर्ट बढ़ जाता है जिससे उनकी पॉस्नल सेविंस घटती है
07:16भारत अपनी जरुवत का भारी हिस्ता बाहर से खरीपता है जिससे देश का विदेशी मुत्राभनडार कम होता है
07:23गैस और खाट पर सरकार का खर्ट बढ़ जाता है जिसका असर देश के पजट पर पड़ता है
07:28भले ही अभी तक इरान अमेरिका जंग की वज़ा से भारत पर सीधा और बड़ा आर्थिक जटका नहीं आया है
07:34लेकिन जोखी मौजूद है क्योंकि भारत की उर्जा निर्भरता उसे वेश्विक संकटों से जोड़ती है
07:39भारत के अध्यूस्ता आज पहले से ज्यादा मजबूत ज्यादा तैयार है और यही तैयारी तै करेगी
07:45कि अगर संकट बढ़ता है तो भारत सिर्फ टिकेगा नहीं बलकि मजबूती से आगे भी वड़ेगा
07:51आज तक बेरो
07:54तो अब योद भारत के नहीं पराकर पहुँच चुका है भारत में बंबारी तो नहीं हो रही होगी लेकिन एकनोमिक
07:59बंबारी जरूर हो रही है
08:00एकनोमि पर उसका असर पढ़ सकता है जिस तरीके से रुपिया पिसल रहा है
08:04डॉलर महेंगा हो रहा है जिस तरीके से तेल के दाम बढ़ सकते हैं और जिस तरीके से सोना और
08:09चान्री के दाम भी उस पर असर पड़ता हुआ नजर आ रहा है
08:12भारत के बाजार भी गिर रहा है सेंसेक्स ओ या निफ्टी उस पर भी उसका असर साफ नजर आ रहा
08:17है
08:17गुरुवार को 12 लाग करोण वाइप आउट हो गए जब सेंसेक्स पूरी तरीके से गर गया था
08:23इन तमाम मुद्दों के मद्दे नजर हम देख सकते हैं कि भारत की अर्थवेवास्ता पर इसका क्या असर पड़ेगा
08:29इस पर बातचीत करने के लिए हमने एक बड़ा पैनल इस वक्त बनाया हुआ है और ये सारे महमान ऐसे
08:34महमान हैं कि जो अपने अपने क्षेत्र में इस पूरे घटा करम पर एकनौमी पर पहरी नजर रखते हैं
08:39हमारे साथ में जैन सिना पूर्व राज्यमंतरी फैनान्स राज्यमंतरी हमारे साथ जुड़ रहे हैं जो इस पूरी इस पर हम
08:48उनसे बात करेंगे कि आखिरकार इस यूद का असर अलग-अलग शेत्रों पर किस तरीके से पड़ेगा सुबाश चनरगर्ग पूर्व
08:55फैनान
09:06Research Foundation और Economist वो भी हमारे इस चर्चा में इस चर्चा में हमारे साथ जुड़ रहे हैं लेकिन चर्चा
09:12आगे बढ़ाने से पहले हैं दरसल मैं politics पर चर्चा नहीं करना चाहता लेकिन चुकि एक बड़ी ख़बर इस वक्त
09:18आ रही है उस पर हम जाकर इस चर्चा को शुबात कर द
09:29रहुल गांदी ने लिखा है कि हर परिवार की जेप पर इसका सीधा और यहरा असर पढ़ना तैह है और
09:38ये सिर्फ वक्त की बात है चुनाओ के बाद पेट्रोल डीजल एल पी जी की कीमते बढ़ना बढ़ा दी जाएगी
09:46और ये तैह है कि ये सारी कीमते बढ़ा दी जाए�
09:52सवाल ये नहीं है कि सरकार क्या कर रहे है, सवाल ये है कि आपकी ठाली में क्या बचा है
10:00कुल मेलाकर महंगाई बढ़ सकती है, राहूल गांदी कह रहे है और पेट्रोल और डीजल की कीमते भी बढ़ेगी
10:19और भारत के भीतर फिलहाल सबसिडाइज होने की वज़े से कम से कम उसका असर आम जंता को मिलने वाले
10:25पेट्रोल और डीजल पर पढ़ता फिलहाल तो नज़र नहीं आ रहा है
10:27लेकिन कभी ना कभी तो सरकार को इस बात को पासओन करना पड़ेगा
10:31तो शुरुवात इसी से करते हैं सर क्या आपको लगता है कि महंगाई आने वाली है
10:36क्योंकि आप तक तो RBI ने महंगाई पर कंट्रोल रखा था और अब तक सरकार की और RBI की प्रायरिटी
10:42रही है
10:43कि किसी भी तरीके से महंगाई न बढ़ने दिये जाए
10:45लेकिन ग्लोबल क्राइसिस के वज़े से क्या हम महंगाई के डेलीज पर आकर खड़े है
10:51अब सब को जहर खंडी जोहार
10:53और मैं सरुप्रतम यही आपको बताना चाहता हूँ
10:56कि हमारी अर्थ्वेवस्ता सिर्फ मजबूत नहीं है
10:59बहुत ही मजबूत है
11:01और हम सब चिंता कर रहे हैं कि जो मिड्ल इस में युद हो रहा है
11:06वो लंबा न चले
11:08अगर कुछी हफतों में एक-दो हफतों में
11:11और सब का नुमानें कि एक-दो हफतों में अब ये युद समाप्त हो जाएगा
11:15और अगर ये समाप्थ हो जाता है एक दो हफ़तों में तो हम लोगों की अर्थवस्ता पे कोई खास छोट
11:20नहीं पहुंचेगी, कोई खास प्रभाव नहीं होगा, अगर युद जो है एक महीने और चलता है तो ना सिर्भ भारत
11:28को लेकिन हर देश को विश्व में बहुत कुछ
11:31जेलना पड़ेगा, लेकिन जैसे मैंने पहले ही कहा, क्योंकि हमारी अर्थवस्ता आज के समय बहुत ही मजबूत है, अगर हम
11:39लोग पूरे विश्व में देखें, तो कई अर्थवस्ताओं में एक ही हमारी एक अर्थवस्ता होगी, जो इसको अच्छी तरीके से
11:45संभाल सकत
11:57रहा है, तो हमारे जो हैं सब इन्वेस्वेंट्स, जब सब ग्रोथ, यह सब बड़े अच्छी तरीके से चल रहा है,
12:03इसलिए इस परकार का जटका हम लोग इसको अब्जॉर्ब कर सकते हैं, तो पहली बात तो यह है, कि हम
12:07लोग का आर्थिक दर जो है, बड़े तेजी से ब
12:24अब्जॉर्ब कर सकते हैं, और तीसरी बात, जो हर व्यक्ति को सबस्यादा चूपता है, कि तेल और डीजल का दाम
12:31न बढ़े, इसको हम लोग बहुत वर्षों से बड़ी अच्छी तरीके से हम लोग ने कंट्रोल किया हुआ है, हमारे
12:36पास बहुत सारे शौक अब्जॉर्�
12:39भरुसा है, इसका जो दाम है, वो नहीं बढ़ने वाला है, और इसलिए आम जनता को कुछ ज़्यादा इसको नहीं
12:48जटका लगेगा, और इसकारण हम लोग जो आम तोर के महंगाई को भी जो लगाम में रखना है, जो पर
12:54काबू रखना है, वो भी हम लोग कर सकेंगे, इसल
13:08का इस्तबाल कर रहा है, जटका, क्या हम इसे जटका या शॉक कहें, या हम क्राइसिस सिचूइशन तक आकर पहुँच
13:14चुके हैं, या सच मुछ में ये सिर्फ शॉक है, अभी सिर्फ जटका है, क्राइसिस नहीं है, देखें, इनसानियत के
13:21अगर नजरीये से देखा जाया �
13:22तो ये बहुत बड़ा एक संकट है, बहुत बड़ा क्राइसिस है, बहुत सारे लोग जो है आज के समय से
13:27प्रभावित हैं, अमारे भारत के कई जो शिपिंग में, मरीन चेतर में जो हैं, 23,000, 25,000 लोग हमारे
13:35वहां फसे में हैं, तो इंसानियत की तौर पे ये बहुत बड�
13:37एक संकट है, लेकिन जहां तक अर्थविवस्ता का सवाल है, आर्थविवस्ता में ये जटका है, क्योंकि कुछी दिन चल रहा
13:43है, कुछी दिन के बाद जब सवाप्त हो जाएगा, आप कोविड जो है, इसको हम लोग एक संकट मान सकते
13:48हैं, जो लगवग दो साल चला, ये �
13:59एक महिना ही चलेगा.
14:20इसके बाद अगर हम देखें, तो कई सारी इंटरनाशनल जो एडवाइजर्स हैं, या एकनॉमिस्त हैं, वो इस बात को लेकर
14:29संदेहें पैदा कर रहे हैं, और ये कह रहे हैं कि अब स्थिती बदल सकती है, हमारे प्रेडिक्शन्स हमें चेंज
14:34करने पड़ सकते हैं, मैरे सा
14:49काउंट डेफिसिट वो कह रहे हैं कि 1.9% से 2.2% तक भी जा सकता है, तो
14:54कहीना कहीं अब नए सिरे से हमारे एकनॉमिक प्रोजेक्शन्स को हमें देखना पड़ेगा, नमबर एक, नमबर दो सर, 100 डॉलर
15:02प्रती बैरल अगर तेल की कीमते पहुंचती है, तब भी भारत सरका
15:06का जो तेल का बिल है, खर्चा है, वो 3.6 ट्रिलियन रुपीर्स तक जा सकता है, और SMA कब
15:13तक, कब तक भारत सरकार ये सबसीडी का खेल करती रहेगी, यूरिया की किमते भी 40% से जादा हो
15:19चुकी है आज की स्थिति में, तो क्या आपको लगता है कि लॉंग टर्म हम इस तर
15:36कराना चाहता हूं कि एक जटका है ये, ये संकट नहीं है, हमारे पास वो शौक अब्जॉर्बर हैं कि जटके
15:41को हम लोग बड़ी अच्छी तरीके से समझाल सकते हैं, और मैं किसी और के अनालिसिस पर टिपनी नहीं दे
15:47सकता हूं, क्योंकि मुझे मालुम नहीं है कि इनके �
15:50अगर टेल का भाव जो है, जो सतर था वो 110 हो गया है, अगर वो फिर 70-80 पे
15:55आ जाता है, तो ये जटका जो है, ये जल्दी ही खतम हो जायता और इसको हम लोग संभाल लेंगे,
16:00अगर 70 के बजाए वो 110 अब अगले पूरे वर्ष रहता है, तब मेरा अनुमान है कि ये सब जो
16:17लोग अच्छी तरीके से इंपोर्ट कर सकें, तो मेरा मानना है कि एक जटका रहेगा, इसको हम लोग अब्जॉब कर
16:23देंगे, और हमें कोई जादी इसमें दिक्कत नहीं होने वाली है, जैंसेना जी, मैं आपके पास दोबरा लोटता हूँ, लेकिन
16:31सुभाशनरगर जी, आ
16:44इस पर जोर रहा है कि हम किसी भी तरीके से महंगा ही नहीं बढ़नी चाहिए, और इसलिए इंफलेशन रेट
16:50हमारा काफी कंट्रोल में रहता है, लेकिन जो शॉक, जटका, जैंसेना जी कह रहे हैं, कई लोग कहते हैं कि
16:55जटका नहीं क्राइसिस है, जटका हो या क्राइसिस
16:58हो, क्या हमारा इंफलेशन मैनेज़्मेंट फ्रेमविर्क जो फिल्हाल शॉक हो रहा है, वो कब तक बरताश्ट कर पाएगा? कब तक
17:05हम तेल की कीमते इसी तरीके से कंटूल कर पाएगे? और जोगी तेल की कीमते तो हमने बढ़ा दिये, लेकिन
17:11प्रीमिम तेल की कीमते भी ह
17:25है consumer price index उसमें एक छोटा component है करीब 10% सीधा तो फूरा का पूरा
17:33inflation index इससे नहीं प्रभावित होता है आलगे indirectly वो चीज फिर
17:38play out करती है for example अगर आप की gas नहीं मिल रही है gas के कारण से
17:44fertilizer बनना कम हो या tiles बनना कम हो या और construction material बनना
17:49कम हो उनकी prices बढ़ जाएं तो फिर वो play out करता भी ऐसा कहना
17:54मुश्किल है कि exactly one to one क्या relationship यह सतर जे सो हुआ तो
18:00क्या हो जाएगा क्योंकि इसके बटकुल मिला के अगर आप इसको देखें तो
18:05निश्चित रूप से inflation पे adverse effect पड़ता है इसका inflation पे इस
18:14प्रवाब पढ़ता है कि भारत सरकार यह क्या तै करती है यह जो कॉस्ट ज्यादा हो जाएगी तेल को
18:22purchase करने के लिए गैस को purchase करने के लिए वह कौन बेर करें अगर वह आप consumer को
18:28pass on करते हैं तो inflation बढ़ता है आप अगर उसको absorb कर लिते हैं अपने taxes घटा के या
18:35oil companies के profits को कम करके या उनको नुकसान में जाने देने के लिए तो यह क्या policy
18:41decision आप लेते हैं उस पे जादा निर्वर करता है कि inflation पे क्या असर पड़ेगा एक और जो
18:49चीज मेरे ख्याल से ज्यादा important है कि economic growth के point of view से growth एक लंबी बहुत सारी
19:00चीजें उसमें
19:01जाती हैं और oil के कारण से और gas के कारण से जो disruption होता है economy में production
19:07system में भी और consumption system में वह बहुत महत्पून देखने के लिए वो short term में medium term में
19:15और long term में भी
19:16short term में आप देखें तो आज के दिन जो इस्तिती बनी हुई है Middle East में
19:22gas के infrastructure पे बहुत ज्यादा नुक्सान हुआ है कतार में वो कह रहे हैं कि हमारा जो gas infrastructure
19:30है वो तो
19:31तीन से पांस साल तक affected हो सकता है हमारा production बीस परसेंट से लेके काफी तो यह अगर वार
19:40बंद भी हो जाती है तो उनका
19:42gas production जो है हमारा बहुत कुछ LPG हमारा बहुत कुछ जो gas का system है वो Middle East पे
19:50अधारित है तो उसको कितनी समय में हम
19:53नॉर्मल ले पाएंगे और अगर वापिस भी आ जाता है supply तो किस prices पर आती है वो बहुत important
20:01होता है उस point of view से मुझे नहीं लगता
20:03कि इस समें signal बहुत ज़्यादा favorable है या benign है इसमें मुश्किल आने वाली है तेल के front पे
20:13संभुवते उतनी ज़्यादा
20:14इस्तिती खराब नहीं है क्योंकि तेल पर इस एरिया का गैस के स्टड़ पे गैस पे बहुत ज्यादा है और
20:21गैस के कारण से अब एक चीज़ अगर मैं आपको बता हूँ कि फर्टलाइजर में यूरिया बनाने में बहुत कुछ
20:29होता है कि आपके आस गैस क्या रहा है आज के दिन हमारे को अभी हम Agriculture के
20:35season में नहीं है सीजन आएगा जून जूलाई के आस-पास अगर उसके लिए फर्टलाइजर हमें produce
20:42करके रखना है और आज produce करके रखना है दो बहने में produce करके रखना है वो हम नहीं
20:48रखते हैं तो फिर हमारी कर्शी पे भी काफे फरक पड़ता है तो इसको एक बहुत आसानी से या एक
20:53या दो शब्दों में या नंबर में हम कहें ऐसी मुश्किल ऐसी इस्तिदी मुझे अभी नजर नहीं आते है एक
21:02प्रतिक्रिया आप से लेना चाहूंगा सर जो राउल गां
21:18और उसी तरीके से वो ट्रांसफर कर दिया जाता है कंसुमर को ये स्थिती थोड़ी आलग है कि आपको लगता
21:24है कि आखिरकार प्राइजस बढ़ेगी जिस तरीके से धीरे धीरे उस पर कदब डालना शुरू हो चुका है क्या हम
21:29इस चौक को ले पाएंगे जो सवाल मैंने �
21:45क्या पॉलिसी रही है इनकी पॉलिसी यह है कि पुछले दो साल में दाम में कोई परिवर्तर नहीं हुआ और
21:54इस पुरान काफी प्राइस गिर भी गए थे इंटरनेशनल मार्केट के और इनके उस समय उन्होंने उसको गिराया नहीं तो
22:04वह एक तरह से प्रूडेंशल कदम �
22:06कि अगर प्राइस गिर रही हैं तो आप अपनी भी प्राइस कम कर देते हैं और पेट्रोलियम प्रोड़क्स जिसकी अगर
22:15आप कुछ बढ़ाते हैं तो इन्मार्मेंटली भी हामफुल होता है साथ में आपका जो रिनोबल एनर्जी का प्रोग्राम है वो
22:23भी एड्वर्सली
22:24अफेक्टेड होता है ऐसे कुछ समय में अगर आप कुछ बफर बना लें तो ज्यादा ठीक होगा मुझे लगता है
22:32अभी जो बफर हैं इनके पास उससे I don't think कि ये मोधी सरकार इस प्राइस को बढ़ाने देगी चाहे
22:42इलेक्शन खतम हो जाएं तो भी बहुत तेजी से दाम
22:46बढ़ेंगे ऐसा मुझे नहीं लगता अगर सिचुवेशन अन्वेरेबल हो गई कि आप टैक्सिस को भी कम करके या इनके प्रॉफिट्स
22:54को भी कम करके आप नहीं रोख पाएंगे तो आप ग्रैजवली देखें
22:58में यही बात बनी हुई है सर आज कोई यह प्रेडिक्ट नहीं कर सकता कि यह दरसल यह युद कम
23:03कब खत्म होगा जब शुरू हुआ था तब किसी ने सूचा नहीं था कि बाइस दिन भी यह चल पाएगा
23:07लेकिन अब जिस तरीके से एक के बार एक चीज़े नज़र आ रही ह
23:23जी आप आपको लगता है कि यह क्राइसिस इतने जल्दी खतब हो पाएगा कियूंकि भारत सरकार ने दावा किया है
23:28कि हम डाइवर्सीफाइ कर रहे हैं तेल जहां से हम खरीद रहे हैं वो हम अलग-अलग जगे से लेकर
23:32आ रहे हैं कि आपको लगता है कि इस खाड़ी यू�
23:51जिसके वज़े से कल के लिए हम इसके लिए तयार हो सके आज की स्थिती में भी हमारे पास इसका
23:56प्रेशर बना हुआ है कि इस तेल जो कीमते उसका क्या आसर पड़ेगा तो क्या हमें इस तरीके से कदब
24:02उठाने पड़ेंगे आगे जाकर
24:06तो साहिल जी इसमें ना ये लड़ाई की वज़े से दो एफेक्ट है एक तो एफेक्ट है दाम पर और
24:16दूसरी एफेक्ट है अवेलिबिलिटी पर खास करके भारत के लिए क्योंकि हमने जो अपने
24:23एलनजी था या एलपीजी था बहुत भारी मात्रा में हम लोग गल्फ से खरीदने लगे तो इसकी वज़े से हमारे
24:32ये अवेलिबिलिटी पर और स्टेट अवार्बूस को को बंद हो जाने पर हमारे पर गहरा हमें गहरी चोट उससे लगी
24:39और मेरे क्याल सरकार अब डैवा
24:43करेगी तो अवेलिबिलिटी की प्राबलम अब नहीं रहेगी पर क्या दाम वापस संतर डॉलर पर बैरल इलास्टिक की तरह अतुरंती
24:55आजाएंगे मुझे यह नहीं लगता कि दाम वापस आजाएंगे कारण यह है कि जो प्रड़क्शन कपैसिटी ज गल्फ में द्वस्त
25:05हुई है और अगर यह � THIS काणफलिक्ट 15 गस बीस दिन और चलता है एक महीशन और चलता
25:13और बंबारी होती है तो उसमें और capacity का destruction होगा और जैसे capacity production capacity का destruction होता है
25:23shortages, global shortages आती है
25:26और ग्लोबल दाम फर्म आप जाते हैं यानि बढ़ जाते हैं तो मुझे लगता है कि यह तो निश्चत है
25:33कि लगवग सतर से बढ़के नबे के नबे की लेवल को हम नॉर्मलाइजड लेवल अब मान लगेंगे यानि बीस डॉलर
25:45को बैरल अधिक दाम हमें अपने इंपोर्ट
25:49क्रूड और अन्य जो पदार्त हैं उन पे देने पड़ेंगे क्या सरकार को यह जो एडिशनल खर्चा है कंज्यूमर्ज पर
25:59पास करना चाहिए मैं यह समझता हूं कि मेरा यह मानना है हाला कि सरकार की नीत जैसे जैन सिना
26:09जीने का और गर्ग साब ने भी बताया वो यह है कि
26:12कि वो कंज्यूमर्ज को मार्केट रेट से इंसिलेट करके रखते हैं यह उनकी नीत है पर मेरे को यह लगता
26:21है कि यह कोई लॉंग टर्म द्रिश्टी कोंड से दीरकाली द्रिश्टी कोंड से यह अच्छी नीत नहीं है सबसे बढ़िया
26:30यह होता है कि जो भी सप्लाय हो वो
26:34मार्केट के जरीए हो और अगर नॉर्मल नॉर्मलाइज अगर हम नब्बे पर कर देते हैं तो नब्बे का जो भी
26:43दाम बनता है डुमेस्टिक एकॉनुमी में वो उभोकताओं को देना चाहिए उससे निश्चित रूप से थोड़ी सी महिंगाई बढ़ेगी पर
26:53बहुत ज
27:02काम बढ़ जाते हैं तो कंजूमर खुद अपनी कोपिंग केपैसिटीज ले आता है खाना एक टाइम पकाएंगे दो बार नहीं
27:10पकाएंगे बाहर कम जाएंगे एंड सो और यानि उभोकता खुल खुद कम उसका उप्योग करता है पदार्थ का जो महंगा
27:20हो और सरस्ती जो
27:21आप्शन्स होती है उसकी तरफ जाता है यह एक अच्छी चीज है यह मार्केट की सबसे बढ़िया चीज यही है
27:28कि सेल्फ रगिवलेटिंग कपैसिटी उसकी होती है तो मेरी तो यह अर्ज सरकार से रहेगी के निश्चित रूप से ट्राइस
27:37शॉक जबाता है उसको तुरं
27:51मतलब इंपैक्ट ना आए पर मीडियम टर्म में अगले दो तीन महीने अगर देखें के दाम बड़े हुए हैं और
28:00नॉर्मिलाइज हो गया है नब्बे पर तो निश्चित रूप से वो जो बगए बड़े हुए दाम है वो पास्तू करने
28:06चाहिए खुशी की बात यह है एक
28:21के सरकार 6 लाख करोड से जैदा हर साल कमाती है अपनी यूनियन गव्मेंट और स्टेट गव्मेंट लगवग 7 लाख
28:31करोड यह अब यह साथला करोड में से संबव है कि कुछ पैसा अगर वह
28:37शौक को डाइल्यूट करने के लिए शौक को कम करने के लिए लगाएं उनके पास अर्थ विवस्ता इसके लिए है
28:45और उसका उप्योग करना वाजिब है तो ये तो रहा आपकी डिमांड लेकिन उसके बावजूर संजीव जी पर एक चीज़
28:53में कहा कि लॉंग टर्म में हो सक
28:55है कि आपको उस पर विचार करना पड़ेगा सरकार को लेकिन आम तोर पर पॉलिसी मेकर्स को जैन से ना
29:01जी भी पॉलिसी मेकर रहे हैं उन्हें भी पता है कि पॉलिसी मेकर्स को कई बार ये एक डिफिकल्ट चॉइस
29:05करना पड़ता है कि क्या करें क्या हम बहेंगाई को कंट
29:25होती है तो आपको क्या लगता है क्योंकि अभी तो नया सत्र शुरू भी नहीं हुआ है जो अर्थिक सत्र
29:32है वो शुरू भी नहीं हुआ है मार्च मैना अभी तक खतम भी नहीं हुआ है और सारे बजेट के
29:36प्रोजेक्शन पड़े हुए
29:37सारे जो अलोकेशन्स पड़े हुएं, अलोट्मेंट्स पड़े हुएं, लेकिन उससे पहले ही ये क्राइसिस हो चुकी है, तो आप कौन
29:45सा रास्ता आपको लगता है कि चुनना पड़ेगा सरकार को, क्या ग्रोथ का रास्ता या बहेंगाई को कंट्रॉल करने का?
29:54देखिए, मैं ये समझता हूँ, कि जो सरकारों और भारत की सरकारों ने हमेशा बड़ी वेवारिक पॉलिसी अपना ही है,
30:02भारत की सरकार, कोई भी सरकार रही ही हो, सब ने बहुत ही वेवारिक पॉलिसी ने भाई है, कारण ये
30:09है, कि ये केवल अमीर देश हैं, जो अवेवार
30:13विवारिक नीतियां अपना सकते हैं और उनको फाइनेंस भी कर सकते हैं, हम लोगों की शमता इस चीज़ के लिए
30:20नहीं है, इसलिए हमको हमेशा विवारिक रहना पड़ता है, पर आप एक चीज़ नोट करिए कि शॉक से किसी को
30:27प्रोटेक्ट करना, खास करके जो गरीब तत्
30:34और ये उनको करना चाहिए, बट उसके साथ साथ, मैंने का क्योंकि आपको देखना पड़ेगा कि ये लड़ाई जो है,
30:42कब तक चलती है, और किस लेवल पे जो तेल है, वो स्टेबिलाइज करता है, नॉर्मल सी किस लेवल पे
30:49होश्टी है, वो पता लगेगा, इस लड़ा�
31:04ये भी प्रेडिक्ट करने की कोशिच कर रहे हैं, लेकि दूसरा इसका सबसे बड़ा सब, और एक बहुत बड़ा सवाल,
31:09मुझे पैनल के सामने लिकर जा रहा है, क्या हम आर वर्ड का इस्तमाल करें, क्या हम स्लोडाउन वर्ड का
31:16इस्तमाल करें, जो हमने देखा था कोवी�
31:20मुझे आना है, लेकिन निलेश शाह हमारे साथ जुड़े हुआ है, निलेश जी, चिंतित रहें, मार्केट में इन्वेस्ट करने वाले
31:28लोग आज की स्थिती में, क्योंकि जो गुरुआर को देखा हमने, उसके बाद तो लोगों की हिम्मट तूड गई है,
31:33कई बार हमने आ
31:50तो साहिल भाई, डुमेस्टिक निवेशकों को नई कल्कूलेशन तो करनी पड़ेगी, जैसा सबने बताया, ओल के दाम उपर चाते हैं,
32:03तो महंगाई बढ़ती है, दस डॉलर डाम बढ़ा, तो महंगाई 30 से 35 बेजिस पॉइंट बढ़ती है,
32:11जीडीपी क्रोथ 20 से 25 बेजिस पॉइंट कम होता है, करन्ट अकॉन डेफिसिट 35 से 40 बेजिस पॉइंट वाईडन होती
32:20है, तो रुपईया वीक होगा, महंगाई बढ़ेगी, तो ब्याज की दरे भी बढ़ सकती है, और कॉपरेट प्रॉफिटिबलेटी कम होगी,
32:30तो पहल
32:40कि बारती अर्थव्यवस्ता क्रेश हो रही है, अब टर्व्यूलन्स में एरक्राफ्ट गुजर रहा है, तो सीट बेल्ट बाननी पड़ेगी, तो
32:49ऐसा नहीं है कि अर्थव्यवस्ता क्रेश हो रही है, तो हम कम दाम करके निवेश करेंगे,
33:00तो आपको लगता है कि निवेश चलता रहेगा, मैं आपका एक इंटर्व्यू देख रहा था निलेज जी, आपने IT, PSU
33:06बैंक्स, मेटल, ये सारे सेक्टर्स का आपने जिक्र किया था, आपने उसमें ये भी कहा था कि डोमेस्टिक फोकस सेक्टर्स,
33:14खास करके बैंकिंग, �
33:15financial services, consumer durables, उसका भी आपने जिक्र उसमें किया हुआ था, क्या आपको लगता है कि इससे बाजार संभल
33:22पाएगा, बच पाएगा, और आज की स्थिती में हम उस स्थिती में हैं कि इस तरीके के shocks हम absorb
33:28कर सके और उसके बावजूद भी दोबारा market के सामने खड़े हो सके, निले�
33:45इसलिए यहां से और correction आएगा, बाजार ने ये भी discount करके रखा है कि oil के दाम कम होंगे,
33:54आज के level से triple digit से double digit, बच जैसे संजीव जी बता रहे थे, अब 60 डॉलर पे
34:02नहीं, साइद 80 डॉलर पे settle होंगे, असी की जगा 100 डॉलर पे ही रहे, तो बाजार यहां से और
34:09भी कम होगा
34:10बाजार सारी information को process करके एक नतीजे पे पहुंचती है, अगर actual event उस अनुमान से खराब हुए, तो
34:21market और गिरेगा, उस अनुमान से actual event अच्छे हुए, तो market recover करेगा
34:30तो market recover करेगा, लेकिन आज की सिति में, जिस अनुमान से अच्छे हो, अनुमान से अच्छे हो, ठीक है,
34:43लेकिन क्या हम slowdown या recession शब्दों का इस्तवाल करें या थोड़ा रुख जाए उसके लिए, अब आपकी slowdown की
34:49definition के उपर है, अगर 7 प्रतिशत से growth 6 प्रसित आपको slowdown ल
34:55प्रतिये तो उसका इस्तमाल करिये, बट normal economists, जब growth negative होती है, तब recession की बात करते है, slowdown,
35:04जब कुछ बड़े तरीके से growth कम हो जाए, 7 प्रतिशत की जगा पे, 3 प्रतिशत, तब slowdown की बात
35:11करते है, मैंने जैसे पहले बताए, 10 dollar oil increase हुआ, पूरे एक साल के लिए, तो हमारी GDP पे
35:19तकरीबन 20 से 25 basis point की impact होगी, इस साल हम 8 प्रतिशत के आसपास GDP लेके आएंगे, youth
35:27की जो impact है, वो मार्च के महिने में है, तो उतनी बहुत ज़ादा नहीं होगी, अगले साल anyway उम्मीद
35:34थी के growth 7 से 7.5 प्रतिशत के आसपास रहेगा, अब ये youth थोड़ा चलता है, तो 7.5
35:41से 7.5
35:44कई है, तो recession कई है, slowdown कई है, तो slowdown कई है, बट गिरावट तो जरूर होगी.
35:51ठीक है, लेकिन कुल मिलाकर मार्केट ये समझ कर चल रहा है कि ये जादा दिन youth नहीं चलेगा, लेकिन
35:56रगुराम राजन जो कल India Today से बात कर रहे थे, उनका ये मानना है जाहिन से ना जी, कि
36:00हो सकता है कि youth एक तो लंबा चले, नमबर एक, नमबर दो, उनका ये prediction है कि हो सकता
36:17कि अभी तो ये आर्थिक साल खतम भी नहीं हुआ है, उससे पहले ही हम youth का इस तरीके के
36:23disruption का सामना कर रहे हैं, आपने एक budget पेश किया है, पिछले ही महिने, अगले साल के लिए आपने
36:28predictions किया हुए है, अगले साल के लिए आपने देखा हुआ है कि कहां कहां पर आपको कितना
36:33allocation करना है, supplementary demands तक आपने discuss कर चुके हैं, और उसको लेकर भी Parliament के भीतर, लोकसवा के
36:39भीतर, पहले से ही आप तैय कर चुके है कि supplementary demands में कहां पर कितना पैसा दिया जाएगा, ऐसी
36:44सूरत में, अगर आप finance minister होते हैं और आप ये यूद का सामना कर रहे हैं, एक April से
36:49आप कौन सी checklist
36:59लेकर बैठते हैं, और क्या फैसले करते हैं?
37:20तो ये जटका जल्दी खतम हो जाएगा, आत्ते ववस्ता पे कोई खास चोट नहीं आएगी, तो पहला signal है, युद
37:26कितना लंबा चलेगा, दूसरा, जिस पे सुभाजी ने भी कहा है, और संजीव जी ने भी कहा है, कि जो
37:33तेल और गैस को जो हम लोगों को निकालने की infrastructure है,
37:40जो विवस्ता है, उस पे कितनी हानी आई है, उसका कितना डैमेज हुआ है, उस पे भी हम लोगों को
37:45ध्यान देना है, अगर कोई खास डैमेज आज के समय गैस पे तो थोड़ा बहुत हमको लगता है कि हानी
37:51हुई है, और इसलिए गैस के जो भाव हैं वो बढ़ेंगे, और क
38:10वो हमें देखना है और तीसरा इस पे तो सिर्फ प्रडिक्शन की जा सकती है कि जब युद समापत होता
38:16है तो तेल का भाव है वो किस लेवल पे स्टेबलाइज होगा, किस लेवल पे स्थिरता आएगी, सत्र पे आएगी,
38:23असी पे आएगी, सौ पे आएगी, इसका भी हम लो�
38:37के से नॉर्मलाइज हो जाता है और सतर असी पे फिर आ जाता है, तो इस जटके को हम लोग
38:43बड़े जल्दी भूल जाएंगे, हम लोग आगे बढ़ेंगे, मैं एक बार फिर आपको ये बात पताना चाहता हूं कि संकट
38:48कोविड में आया था, तब रिसेशन के बारे में हम ल
39:07लोग ने बाफर बनाया है, इसलिए जटकों को हम लोग बड़े अच्छी तरीके से अब्जाब कर लेते हैं, पुल मिलाकर
39:12यही चीज़े हैं जिस पे सबको ध्यान देना है, फिर एक बार तीन बाते हैं सबसे जरूरी, नंबर वान, यूद
39:18कितना लंबा चलेगा, नंबर �
39:22पीन की तेल का भाव कहां जाकर स्थिर होता है, कहां जाकर स्टेबलाइस होता है.
39:54जो पैरामीटर्स है, उसको देखते हुए सबी लोग कह रहें कि इतना जादा मुश्किल भारत को नहीं होगी, लेकिन फिलाल
40:00इस क्राइसिस के सिचुएशन से, शौक के सिचुएशन से, भारत की अर्थवेवस्ता भी गुजर रही है, तो इस पर ध्यान
40:05रखना ज़रूरी
40:06होगा, बहुत बहुत चुक्री आप सभी का, फिलाल हम लेंगे एक छोड़ असा ब्रेक, ब्रेक के बाद भी, खबरे हमारी
40:10लगातार जारी रहेगी, आप लेक करें आज देखें
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