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Transcript
00:00शुम्बनी शुम्ब चंड मुंड ये सब जब साफ हो जाते हैं
00:02तो अंतमे मालू में क्या होता है? कितनी गदब बात है? मैं जितनी बार सोचता हूँ
00:06लोम हर शक बात है बिलकुल
00:08रोमान छो जाए सोचके
00:09क्या नतीजा होता है जब देवी सब असुरों का सफाया कर देती है
00:14बुलते हैं जितनी प्रक्रत में गड़बड थी वो ठीक हो गई
00:18नदियां संकुचित हो गई थी अपने रास्ते से विचलित हो रही थी
00:22नदियां वापस मार्ग पे आ गई और पूरी धार के साथ बहने लग गई
00:25स्वक छो गया उनका जल
00:27आसमान पे धूल के बादल चाहे हुए थे वो हट गए
00:29सूरी की प्रभा अपने ओज के साथ बिखरने लगी
00:33ये सारे राक्षा से एक ही काम करते थे
00:36ये देवी के पास प्रस्ताओं भेजते थे भोग का
00:39देवी वहाँ परवत पर बैठी हुई है
00:41और एक के बाद एक उनके नियोते भेजे जा रहे हैं
00:44क्या वह हमारी रानी बनो हम विश्यो जेता हैं
00:46सारे देवताओं को हरा दिया है
00:48और सारे जो अमूल एरत्न हैं वो हमारे पास है
00:52और तुम भी तो एक अनुपम सुंदरी हो
00:54तुम्हे हमारे पास होना चाहिए
00:55और देवी कहती है
00:57मैंने तो तैकर आए कि
00:58जो मुझे आकर जीत लेगा
01:00मैं उसकी पत्नी बन जाओंगी
01:25जो जो उनका संगहार करती है
01:29जो प्रकृति के साथ हिंसा करते है
01:32और हम देवी के भक्त बनते हैं
01:34और देवी के ही दिनों में प्रक्रते के साथ हिंसा करते हैं
01:37यह आप क्या कर रहे हो
01:39जानवर कोई देवी के लिए थोड़ी है
01:41देवी थोड़ी जानवर खाएंगी
01:43खाते तो तुम हो
01:45हम में कितनी बहिमानी है
01:47कि हम सीधे साधे सच को भी सुईकार नहीं कर सकते
01:52अपनी जबान के स्वाद के लिए काट रहे हो उसको धर्म का है उसमें नाम ले रहे हो
01:56धर्म क्या है है और वो भी ऐसी देवी के त्योहार में तुम जानवर काट रहे हो
02:02तो जो स्वयन सब पश्वों की रक्षक हैं, वो प्रकृति की देवी हैं, वो देवी के सजीव रूप हैं, देवी
02:11के सजीव रूप को देवी की प्रतमा के सामने काट रहे हो, ये कहां की हुश्यारी है?
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