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یھ ایک پردیسی کی کہانی ہے جس نے اپنی زندگی گھر والوں کےلئے قربان کر دی آپنی جوانی قربان کر دی جب اس کو گھر والوں کی ضرورت تھی تو سب نے آ نکھیں پھیر لیں
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Transcript
00:00अब्दर रहीम अपने बहन भाईयों में सबसे बड़ा था
00:02उमर सिर्फ पचीस साल
00:05चेहरा सादा कलीन शेवन पतला दूबला जिस्म
00:08मगर दिल बहुत बड़ा
00:11वालिद के इंतिकाल के बाद
00:12घर की सारी जिम्मदारी उसके कंधों पर आ गई
00:17हालात ऐसे थे के दो वक्त की रोटी भी मुश्किल हो गई थी
00:21इसने अपनी जवानी
00:23अपने खाब
00:24सब कुछ कुर्बान कर दिया
00:27सिर्फ अपने बहन भाईयों के लिए
00:29अब्दर रहीम को ऐसी और फरीज का काम आता था
00:33इसी हुनर के सहारे वो बहरें चला गया
00:35शुरू में बहुत मुश्किलात आएं
00:38सख्त गर्मी
00:39तनहाई
00:41और परदेश की ठकन
00:43मगर इसने हिम्मत नहीं हारी
00:46दिन रात मेहनत करता रहा
00:48और आहिस्ता आहिस्ता इसका काम चल निकला
00:51वक्त गुजरता गया
00:54एक साल
00:55पांच साल
00:57फिर पच्चीस साल
00:59उन पच्चीस सालों में
01:01इसने अपने हर भाई को पढ़ाया
01:04हर बहन की शादी की
01:06सब को अपने पाउं पर
01:07खड़ा किया
01:09मगर उन सब में वो खुद कहीं
01:12पीछे रह गया
01:13इसकी शादी भी बहुत देर से हुई
01:16और जब हुई
01:17तो उमर पचास के करीब पहुँच चुकी थी
01:20अब इसके अपने भी दो तीन चोटे बच्चे थे
01:23मगर अब जिसम साथ नहीं दे रहा था
01:26काम भी काम हो गया
01:29आखिरकार
01:30इसे बहरेंग छोड़ कर पाकिस्तान वापस आना पोड़ा
01:33वो सोच रहा था
01:36अब अपने हैं
01:38सहारा देंगे
01:39मगर पाकिस्तान आकर
01:41हालात और खराब हो गए
01:43काम ना चला
01:45पैसे खत्म हो गए
01:47एक दिन
01:48इसने हिम्मत करके
01:50अपने बहन भाईयों के दर्वाजे पर दस्तक दी
01:54दर्वाजा खुला
01:55मगर
01:57वो इज़त ना मिली जिसका वो हकदार था
02:00बलके
02:01इसे जलील किया गया
02:03ताने दिये गए
02:05और घर से निकाल दिया गया
02:07अब तर रहीम खामोश खड़ा रहा
02:10आँखों में आंसू थे
02:12मगर जबान पर कोई शकों नहीं था
02:15क्यूंके
02:16जो सारी जिंदगी दूसरों के लिए जीता है
02:19वो अपने लिए शिकायत करना भी भूल जाता है
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