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07:25पर जानके, बहाँ पर दो लोगों के लिए भोजन की वेवस्था नहीं है।
07:31कोई बात नहीं, जितना भी होगा हम आधाधा बाट लेंगे।
07:35चलो, वो लड़का कुछ भी बोले, उनकी तरब ध्यान मत देना।
07:46गुरुदेव के ठाकुर आप खाना खालो।
07:53ठाकुर, ये बेहन कौन? वो मुझे बेहन कहता है।
07:58जानके चुप रहो, भोजन पाने लगो।
08:01ठाकुर, ये है कौन? ये मेरी पत्नी है।
08:06तो आप साधी सुधा है, पहले बोलते होते, अकल है के नहीं? खाओ, खाओ!
08:42आप साधी सुधा है, और वो बताना चाहिए ना?
08:47शाधी सुधा है, मतलब?
08:50दोनों पती-पतनी आये थे, निरलज, और चुप चाप हसते थे, मैं इतना गुस्सा करूँ और उनको कोई लेना देना
08:57ही नहीं, दोनों खाके चले गए, वो बेहन अपने घर में रसोई नहीं बनाती होगी।
09:01क्या बकवास कर रहा है? तुझे क्या हो रहा है? ठाकूर तेरे पास थोड़ी ना आएंगे।
09:11कले का दशी है? हाँ, मैंने कलेंडर पहले ही देख लिया, आज मैं पाँच किलो आटा नहीं लूँगा, साड़े साथ
09:18किलो आटा लूँगा, दो लोग वो और एक मैं।
09:21तुझे जितना ले जाना हो, उतना राशन ले जाना, मैं कब मना कर रहा हूँ, पर तु जूठा नाटक मत
09:28कर।
09:29नाटक नहीं कर रहा गुरुजी, मैं जूठ बोलता ही नहीं हूँ, आप ही खेल खेलते हो, दो एका दशी से
09:35भूखा मार डाला मुझे।
10:00आप खाना खालो, आप दोनों अकेले-अकेले कहां जा रहे हैं, मैंने राद दिन आपकी सेवा की है, और भंडारा
10:09खाने अकेले जाओगे।
10:10लक्ष्वन्ड, तिरा स्वभाव बहुत गर्म है, और वो लड़का कुछ भी बोले, पर तुम उसे कुछ भी नहीं बोलोगे, नहीं
10:19बोलूँगा।
10:26गुरुदेव के ठाकुर, आप खाना खालो।
10:33ओ भाईया, ये दूसरा भाईया कौन है?
10:36वो मेरा छोटा भाईया है।
10:38आप मुझे बताएंगे कि आपके घर में संख्या कितनी है, मुझे राशन का तो पता चले।
10:43भाईया, ये इतना गुस्सा कर रहा है।
10:47लक्ष्मन, चुप रहो, भोजन में ध्यान दो।
10:57आज तो ठीक से खाना खाया ना।
10:59मुझे गुस्सा मत दिलाओ बाबा जी।
11:04पता नहीं, इस बच्चे की क्या समस्या है।
11:11करले का दशी है।
11:13हाँ बाबा जी, मैंने केलेंडर में देख लिया है।
11:19आज मैं दस किलो आटा लूँगा।
11:21दस नहीं, बीस किलो राशन ले जा।
11:24लेकिन तु जूट बोलके ठाकूर को अपवाद मत कर।
11:28आप मेरी बात कभी नहीं मानोगे।
11:30मैं जूट नहीं बोलता।
11:50आप खाना खालो।
11:52आज मैं भी आपके साथ आऊंगा प्रभू।
11:54चलो हनुमान, वहाँ कुछ बोलना नहीं, जब चाब भोजन पा लेना।
12:07गुरुदेव के ठाकूर आप खाना खालो।
12:16ठाकूर ये दूसरे बहिया कौन है।
12:19वो मेरा सेवक है।
12:21खालो, खालो, भीकमंगो, खालो।
12:33कले का दशी है।
12:34हाँ, मैंने कलेंडर पहले ही देख लिया।
12:40आज मैं साड़े बारा किलो आटा ले जाऊंगा।
12:42कुछ भी हो जाए, आज उन लोगों को छोड़ूंगा नहीं।
12:50गुरुदेव के ठाकूर अब खाना खालो।
13:00अड़ेया, आज तो तुन्हे कुछ बनाया ही नहीं है।
13:04हम, अबसे ऐसा ही होगा।
13:07आपके भाईया को बोलो लकडिया काटके लाए।
13:09और इस पवन पुत्र को बोलो आग जलाए।
13:12आपकी पत्नी को बोलो रसोई बनाए।
13:14आप उन्हें मदद करो और भोजन तयार हो तब मेरी थाली अलग करके फिर अपना पाना मैं वहाँ बैठाऊ।
13:21अड़ेया, तेरी बनाए होई रसोई तो हम पिछली चार एका दर्शी से पा रहे हैं।
13:27लेकिन आज हम तुझे खिलाएंगे।
13:29हनुमान, तुम लक्षमन को साथ ले जाकर लकडिया काटके ले आओ।
13:57अड़ेया, अब आओ।
13:59पहले मेरी थाली अलग कर दो।
14:01अरे यार, तुझे जितना खाना हो, उतना खाना।
14:05लेकिन पहले हम ठाकुर जी को भोजन लगा देते हैं।
14:08पर ठाकुर को भोग लगाना कहां बाकी रहा।
14:11आप ही तो हर एका दर्शी के दिन आते हो।
14:13जैसे तेरे गुरू का ठाकुर मैं हूँ, वैसे मेरा भी कोई ठाकुर है।
14:19तो वो आएगा।
14:20अरे यार, कोई नहीं आएगा।
14:24पर हमारा भी नियम तो होगा ना यार।
14:27तो जल्दी करो।
14:28हे अखिल ब्रम्भांड के ठाकुर, आप पधारो, पधारो।
14:36स्वामी, बस एक और दाओं, और मैं जीत चाओंगी।
14:41स्वामी, ये बिना मासम की गरच दी हुई बारिश हमें क्या संकेत देती है।
14:46मेरे राम भंडारा कर रहे हैं, हमें बुलावा आया है।
14:52अगर राम जी भंडारा कर रहे हैं, तो वहां तो व्यवस्था होगी ही।
14:56स्वामी, हम सब आएंगे।
14:57हाँ पारवती, जाओ किर्तिमोग, मेरे सभी गणों को बुलावा भेजो।
15:03जो नहीं आएगा उसे मैं अपना नहीं मानूँगा।
15:12वाव।
15:16वाव।
15:21वाव।
15:32हे अखिल ब्रह्मांड के स्वामी, आज मुझ तुछ को अपने चरणों में स्थान दो।
15:38अब ये सब कौन होंगे।
15:40आये प्रभू, पलंग पे बैठिये। आओ अढहिया, बैठो।
15:46मेरा आज एक अदशी का उपवास है।
15:49अरे बैठ तो सही।
15:53ठाकूर, आपने अपने लोगों को पूरी थाली भर दी।
15:56और मुझे सुपारी के दाने बराबर एक टुकडा दिया।
15:59आज मेरी एक अदशी है, आप खाओ।
16:02अरे या, तो चक तो सही।
16:05तेरी बनाई रसोई तो हम बेटा रोज खाते हैं।
16:08अज तू इतना तो जख।
16:17ये क्या हो रहा है मुझे? बचाओ, बचाओ, बचाओ, बचाओ, बचाओ।
16:23उठो अड़ाया।
16:31ये असंख्य जीवों के मालिक, मुझे माफ कर दो।
16:35मैंने आपको बहुत भला बुरा कहा।
16:37मैं आपको जान नहीं पाया।
16:40नहीं अड़ाया।
16:41तुम नेक हालस्ता से मुझे बुलाते थे।
16:45तभी तो मैं तुम्हारे पास आता था।
16:48और तुम्हारे सभी बंधनों को काटना मेरी जिम्मे लाई थी।
16:52जाओ।
16:53अब नहीं जिन्दगी की शुरुआत करो।
16:58मैं अभी आया।
16:59उससे पहले ठाकुर आप और ठाकुर के ठाकुर आप
17:03यहां से कहीं गए तो आपको राम दुआई है।
17:05मैं अभी आया।
17:19बाबा जी, कितने सालों से ठाकुर मंदर में बिराजे हैं।
17:23साल से।
17:25कभी ठाकुर ने रूबरू आके भोजन पाया है।
17:28तो आओ, ठाकुर भी खा रहा है और ठाकुर का ठाकुर भी खा रहा है।
17:31मुझे तंग करना कब छोड़ेगा।
17:34पांच पांच एका दशी से तु ब्रत खंडित कर रहा है।
17:38बाबा जी, मैं जूट नहीं बोल रहा।
17:41आप मौका न चूकें बाबा जी।
17:43आओ और देखो।
17:54तो महान है।
17:56अरया, तो महान है।
17:59वास्तब मैं मुझे मेरे राम के पैर पढ़ना चाहिए।
18:02लकिन फिर भी मैं तेरे पैर पढ़ता हूँ।
18:06क्यूंकि तेरी इस क्रांती की वजह से
18:09मैंने अपने ठाकुर को पाया।
18:12तुने मेरे हरी को प्राप्त किया।
18:14तु महान है।
18:16अरया, तु महान है।