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Transcript
00:00खुद को ललकारो और फिर कराह उठती है, वो जि में भी होता है कई बार तुम कराहते हो, मिना
00:06उस कराह के कोई नहीं बदलता है, कोई नहीं सुधरता, बुरा लग रहा, कम लग रहा है, और ज्यादा बुरा
00:13लगना चाहिए, तुम्हें नफरत होनी चाहिए जैसे तुम मेरा
00:18कमर का घेडा नहीं है उतना तो उसका बाजू है
00:22जिम जाने वाले होते हैं जब वहां होते हैं तो उनकी गरद सुनना
00:27धीतर कुछ होता है जो फटगा होता है
00:30उसी को फाड़ने के लिए जिम जाया जाता है
00:34अचारे जी बहुत डर लग रहा था पहले तो आफसर पुछने से पहले लेकिन फिर भी डरा करो अब क्यों
00:40नहीं लग रहा है जैसे मैं कोई भी काम उठाता हूं तो वो कभी ठीक से पुरा नहीं हो पाता
00:44है जैसे उदरहन के लिए अचारे जी जिम जाना है धीतर से जबरदस
00:49जौला उठनी चाहिए क्यों सुनना पढ़ रहा है मुझे यह सब मैं नहीं सुनना चाहता तब कुछ बदलेगा
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