00:11इस जोपडी की खासियत जान आप हैरान हो जाएंगे
00:15इसके निर्मान में ना तो पानी का इस्तेमाल हुआ है और ना ही सिमेंट का
00:20सिर्फ इटों से धाचा तैयार किया गया है और जड़ी बूटियों से इसे बनाया गया है
00:27इस कारण इसे एंटी वाइरस जोपडी कहा जा रहा है
00:32इसे बनाने में लगभग पांच लाख रुपए की लागत आई है
00:37गया के मटिहानी गाउ में ब्रजेंदर कुमार चौबे इस जोपडी का निर्मान करवा रहे हैं
00:44उन्ही से जानते हैं किसे बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल हुआ है
00:51अब देखे कि ये जो दिवाल बनी है इसमें इट का इस्तेमाल तो हमने किया है
00:55लेकिन इट के साथ जो गिलावा जो प्लास्टरिंग और जो जोडने का काम हुआ है
01:01वो मटी, गौमाता के गोवर, गोमुत्र, आउला, खल्दी, चुना, मेथी का पाउडर, नीम का पाउडर, खस का पानी, खस घास
01:12का जो पानी आता है
01:13ताकि ये सुगंधित एक अच्छा एनर्जेटिक बने वताबन पर तयार हो यहां पर
01:20तो ऐसे तरह-तरह के भिन-भिन जड़ी बूटियों को डाल करके और इसका लेपल बना करके उसकी इलावा से
01:26इसको जोडा गया
01:27और आप उपर देखेंगे कि फूस डाल करके सरकंडे डालने के बाद उपर से खपड़े डाले गया है
01:40गया नगर निगम के इंजिनियर का कहना है कि मिट्टी और गोबर से बनी जोपड़ी सीमेंट से भी अधिक मजबूत
01:49है
01:49वहीं मगद विश्विद्याले के प्रोफेसर अमित कुमार सिंग भी इस जोपड़ी को स्वास्त के लिए बहतर मानते है
02:19प्रकृतिक चीज होने के चलते हैं इन में किसी भी तरह के केमिकल्स नहीं होते
02:26तो इनका उपयोग करना बहुत ही अच्छा होता है अच्छा माना भी जाता है और हम पहले हमारे जो आयरवेद
02:33है था और पुराने वपद्यती से जो भर बनते थे उनमें इन सब चीजों का यूज भी होता था आज
02:38की जमाने में चुकि सीमेंट आ गया पेंट आ गया पु�
02:56पहला इसा जुपड़ा है जोकि इस अनूठे तरीके से निर्मान किराया जा रहा है और इसमें जो काम चलंद में
03:05है और इसमें पलस्तर जो है वह अदभूत कहानी कह रहा है वहीं इसका जो फर्स जो बनेगा वही प्रकृतिक
03:13तरीके से जिससे गोवर्क, गौमोट्र, हल्�
03:30Thank you very much.
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