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Experience the deeply emotional and soul-touching Naat written by the legendary Urdu poet Mir Taqi Mir. 🌙 This beautiful Naat “Rehmat-ul-Lil-Aalameen Ya Rasool” expresses love, humility, and devotion for the Holy Prophet Muhammad ﷺ.

The powerful poetry of Mir Taqi Mir moves the heart and reminds us of mercy, forgiveness, and hope through the intercession of the Prophet ﷺ. Listen carefully and feel the spiritual depth of this timeless kalam that continues to touch millions of hearts. 😢✨

If this Naat touches your heart, share it with others so more people can feel the beauty of this soulful recitation.

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Transcript
00:20हो रहे हैं हम जो दो जख के हां तब
00:27सर पे ये आमाल लाए हैं घजब
00:35रखते हैं चश्में इनायत तुझ से सब
00:42तुझ सिवा किसे कहे नहावाल आ
00:48रह्मत उल्लिल आलमीनी आरसूर्
00:55हम शाफी उल्मुझनी बीनी आरसूर्
01:11निको बढ़ तेरे सनाख वनहमं लुत्फ तेरा अरजू बक्ष मं
01:26निलता फत हो का तू कहे का है भं।
01:32तू रही मार मुस्तहिके रह्म।
01:39हो रहे हैं हम जो दोजक के हटब।
01:47सर पे आमाल लाए हैं घजब।
01:55रखते हैं चश्मे नयत तुझ से सब।
02:01तुझ सीवा किस से कहें नहावालब।
02:09रह्मत उलिल्ला लमीनी यारसूल।
02:17हम शाफी उल्मुझ निभी यारसूल।
02:24हरून हुशर में गुना से जार जार।
02:32दिवे नयत कुछ नहीं उसलूब कार।
02:39दिल को जब होता है आकर इस्तिराब।
02:47जीर लब कहता हूँ ये मैं बार बार।
02:57हो रहे हैं हम जो दोजक के हतब।
03:05सर पे ये आमाल लाए हैं घजब।
03:11रखते हैं चश्मे नयत तुझ से सब।
03:20तुझ सीवा किस से कहना हवाल अब।
03:26रह्मत उलिल आलमीनी या रसूल।
03:35हम शाफी उल मुझनी देनी या रसूल।
03:50सबज बरपा होगा जब तिरा निशाँ।
03:57अफतावे हश्र में बहर है अमाल।
04:04होवेगी अनवाए खिलकत जमवान।
04:12क्यूं न हो साए में उसके दो जहाँ।
04:22हो रहे हैं हम जो दोजक के हतब।
04:30सर पे ये आमाल लाए हैं घजब।
04:36रखते हैं चश्में नयत हैं तुझसे सब।
04:45तुझसी वाकिस से कहें न वावाल लब।
04:51रह्मत उलिल आलमीनी या रसूल।
04:59हम शाफी उल्मुझनी देनी या रसूल।
05:15रुसिया ही जुर्म से हैं बेशतर।
05:23रुसपीदों में खजल मुझे को न कर।
05:28एक के आँखे हैं मेरी ही धर।
05:36तुझसे राजी बेबसर आए नजर।
05:47हो रहे हैं हम जो दोजक के हतव।
05:54सर पे आमाल लाए हैं घजब।
06:02रखते हैं चशने नयत तुझसे सब।
06:10तुझसी वा किससे कहें नावाल अब।
06:16रह्मत उलिल्ल आलमीनी या रसूल।
06:25हम शाखे उल्मुझनी या रसूल।
06:40जब तलग तसीर का था कुछ गुमां।
06:47गह कुरें खन निरत गह सुभाखं।
06:54वत्यकसन तो नहीं ये दोस्तान।
07:02अब यही है हर जमान दिवे जबान।
07:12हो रहे हैं हम जो दोसक के हैं तब।
07:19सर पे ये आमाल लाए हैं गजब।
07:26रखते हैं चश्में नहीं देना कुछ से सब।
07:34कुझे सीवा किससे कहिना वाल लब।
07:41रह्मत अलिल आलमीनी या रसूल।
07:49हम शाफियल मुझनी बीनी या रसूल।
07:57हम जो रहांगी भूंग
07:59की देना किमाद के रहांगी ये झालमीनी ये डु़ Fish
08:04के रहांगी ये टाम्ल।
08:07हम चज़ Doing the Mewydd j criticizing
08:07में शाफिया मैं जो भूद।
08:08को रहांगी ये ये जो उन्वादोन
08:10क्यादा जो क्या कू़च्व
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