00:00जंगल में सुबा का सुरज तुरू हुआ और चोटे परिंदे अपनी घूसलों से जागने लगे।
00:04ये चोटे परिंदे अपने दोस्तों के साथ खेलते, दाने तलाश करते और खुशी मनाते।
00:09चोटा परिंदा अपने परों की मश्क करता और पहली बार उड़ने की हिम्मत करता है।
00:14जिन्दगी में हमेशा खतरात आते हैं लेकिन परिंदे होश्यारी और होसले से उनका सामना करते हैं।
00:18ये जिन्दगी का सबक है, दोस्ती, मेहनत और होसले से हम हर बलंदाई कुछ हो सकते हैं।
00:23आखिरकार मेहनत और होसले के बाद चोटे परिंदे ने अपने खुआप की बलंदी चोली और आजादी का लुटफ लिया।
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