00:00कोई दाम में भी बढ़ोतरी हुई है, इस गैस के दाम में मिल रही या असानी से?
00:03नहीं मिल रही सर, मैं दो दिन से खाना भी ने बना अपा रहे हैं इस गैस की बज़े से
00:29से कहूंगा कि दुकान को जरा दिखाईए यहां पर किरन और मनोज अपने घर का की सारी जिमिदारियां इसी दुकान
00:38से बुरा करते हैं किरन जी हमारे साथ है मनोज यहां पर मौजूद है किरन जी मैं देख रहा हूँ
00:42आप इस छोटे से गैस से चाय बनाकर लोगों को पिला �
00:45रही है कोई दाम में बढ़ोतरी हुई है ड्यास के दाम में मिल रही आसानी से परेशान है कि हमाने
00:55-खाने का जो धन्दा है सब परेसानी है अब तक अब आई है अब
01:11दो दिन से खाना भी ने बना अपा रहे हैं इस गयास की बच्चे जाए और इसे चीजों की जो
01:18महगाई हुई यह गयास अब को कितने रुपे किलो बता रहा है अगर 400 लुपे किलो इस चोटे से सिलिंडर
01:24को बढ़ने के लिए कितना किलो गयास आता है
01:29पहले कितने का मिलता है नॉर्मल मिलता था 100 लुपे किलो मिल जाता था चार गुना बढ़ गया है था
01:34चार गुना दाम बढ़ने से आप समझेजे इनकी आमदनी शायद चार गुने नहीं बढ़ी होगी
01:43इस चोटे से दुकान से ठेली से किस तरह से जीवन या पर नॉइडा जैसे बड़े शहर में करना कितना
01:50मुश्किल हो सकता है और उस पर से गैस की खीमतों की यह मार इसके लिए सरकार को ध्यान देने
01:55के आवशकता है कि किसी तरह इन गैस के दाम ना बढ़ें काला बाजारी
02:00ना हो और आसानी से उपलब्द हो हमेशा गरीब लोगों को ही मारा जा रहा है कि अब्रवी कैसे कि
02:14यह भी तो कमाके खा सके उनको भी तो जीने का हक बढ़ा गया एंप
02:26अभी कैसे कितने रुपए आप चाय बेचती है एक पर जाती है जो अभी नॉर्मल कि उसमें भी दाम बढ़ाने
02:33का सोच रही है आप सर उसमें कोई बढ़ाने का कुछ समाधानी नहीं पांच रुपए लेने में दस रुपए लेने
02:37में इनसान डरता है गरीब लोग क्या खाए
02:45बच्छों के लिए जब घर पर जाकर खाना बनाने की बात आती है घर पर अभी गैस है आपके नहीं
02:50है तो कैसे बनाएंगे अब सर क्या करेंगे जलाएंगे लग बनाएंगे खाना और क्या इंडक्शन कुकर के बारे में लोग
02:58अक्सर कह रहे हैं लेकिन बिजली भी काफी �
03:00बहकी बढ़ती है दस ग्यार उर्पे बिल जाता है मतलब उन्हीं उट जाता है उसमें करीब लोग तो नहीं भरपाएगा
03:05इतना बिल इंडेक्स चलाएगा तो क्या खाएगा उसमें मिजली का बिल भरेगा क्या करेगा बलकुर आ किरन जी हमारी सम्वेदाएं
03:13आपके साथ ह
03:14और ये कहानी सिर्फ किरन और मनोज की नहीं है ये कहानी कई ऐसे हजारों छोटे वयापारियों की है जो
03:21हर दिन अपनी ठेली लगा कर उससे जो आजिविका कमाते हैं उससे अपना जीवान यापन करते हैं दोहरी मार पढ़
03:27रही है एक तो गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है मि
03:42ये लोग रह रहे हैं 10 रुपे यूनिट तो मुझे लगता है कि उस इंडेक्शन की बिजली को भरने में
03:47भी कमर तूटने की पूरी संभावनाय बंती है
03:52नॉटा से One India News के लिए पंकज गुमारमेशन
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