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ईरान से युद्ध के बीच खुद अमेरिका के पास कितना है तेल का स्टॉक? देखें वारदात

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00:00नमस्कार मैं हूँ शम्स तहर्खान और आप देख रहे हैं वारदात
00:03तेल उत्पादन के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है एरान
00:08जबकि गैस उत्पादन के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश
00:13मगर अब जब वही एरान जंग से जूज रहा है तो जाहिर है पूरी दुनिया में तेल में आख तो
00:20लगेगी
00:20लेकिन क्या आपको पता है कि जिस अमेरिका की वजह से जाने अंजाने पूरी दुनिया पर ये जंग ठोब दी
00:28गई
00:28खुद उस अमेरिका के पास अपना तेल का भंडार कितना है
00:32तो चलिए आज वारदाप में आपको अमेरिका की उस दादागिरी की कहानी सुनाता हूँ
00:39जो डॉलर और पेट्रो डॉलर के दम पर चल रही है
00:50एक बहुत पुराना मज़ाग है
00:52कि अमेरिका में कभी तख्ता पलट क्यों नहीं होता क्योंकि अमेरिका में कोई अमेरिकी गूतावास नहीं है
00:59एक रिपोर्ट के मताबिक सेकंड वाल वार के बाद से अमेरिका ने दुनिया भर के दूसरे देशों की सरकारों को
01:06गिराने
01:06यानि तखता पलग की करीब सौ बार कोश्चेंगी
01:10ऐसे देशों की तो कोई गिंती ही ने
01:12जहां अमेरिका ने अपनी सेना न भेजी हो
01:15या जंग न की हो
01:17पस यूँ समझ लीजे के दुनिया के दूर दरास के किसी कोने में
01:21किसी छोटे से देश में भी कुछ हो रहा हो
01:24या ना भी हो रहा हो
01:26तो अमेरिका वहां कूद पड़ता है
01:29आकड़े ये बताते हैं कि 1776 में जब से अमेरिका का जन्म हुआ है
01:33तब से लेकर अब तक सिर्फ 20 साल को अलग करते हैं
01:37तो 240 साल पुराना अमेरिका
01:40223 सानों तक किसी न किसी देश में जब लड़ता ही रहा है
01:45अब सवाल यह है कि कारीब 8 अरब की आबादी वाली इस दिनिया जो 105 वे देश है
01:51उन सभी देशों में हमेशा अमेरिका अपना सिक का क्का क्यों चलाना चाहता है
01:55उन देशों में वो हमेशा अपनी दखलनदाजी क्यों करता है तो इसका जवाब है ये
02:04है तो ये काघस का एक टुकड़ा लेकिन बस इसी काघसी नोट में
02:08अमेरिका को पिछले 60-70 सालों से दुनिया का सूपर पावर बना रखा है
02:14ये इस डॉलर का ही घमंड है जो अमेरिका के सर चढ़कर नाचता है
02:20ये अमेरिकी रास्ट्रपती डोनेल्ट टरम्प है इसराईल को साथ लेकर इरान से जंग इनोंने ही शुरू की
02:27पर अब जब इस जंग की आच तेल और गैस की शक्र में पूरी दुनिया महसूस कर रही है
02:32तब यही टरम्प ये कहकर दुनिया भर के देशों का मजाक उड़ा रहे
02:36कि दुनिया को इरान से बचाने के लिए जंग की इतनी तीमत तो चुका नहीं होगी
02:41थोड़ी परिशानी तो होती है पर कोई नहीं जल्दी तेल और गैस के दाम पहले जैसे हो जाएंगे
02:50अभी तो तेल की आख सिर्फ पाकिस्तान, बांगला देश, इंडोनेसिया, सिंगापुर और कुछ अन्य देशों तक ही पहुँची है
02:57भारत में होटलों और रिस्त्रा के चूल है, अभी सिर्फ बैंगलूरू में बुझे है
03:01हाला कि मुंबई में इसका ट्रेलर दिखने लगा है
03:04पराने वाले दिनों में ये गैस और तेल क्या खेल करेंगे कहना मुश्किल है
03:09वैसे भी ट्रम्प को दुनिया के परेशानी से क्या लेना
03:13अमेरिका वो देश है जिसके पास इस वक्त 44 से 48 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है
03:20ये तेल के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है
03:24लेकिन कमाल देची अमेरिका अपने तेल के भंडार का इस्तेमाल खुद नहीं करता
03:29बल्कि दूसरे देशों को बेचता है और अपने लिए दूसरे देशों से तेल खरीडता है
03:34जानते हैं क्यों तो चलिये आपको सच्चाई बताता हूँ
03:39यह मामला हलके और भारी तेल का है
03:41American Petroleum Institute की मताबिक
03:44अमेरिका का 80% तेल हलके खिस्म का है
03:48जबकि अमेरिका की ज्यादा तर तेल रिफाइनरी भारी तेल के हिसाब से बनी है
03:5320 सदी में अमेरिका को मिलने वाला ज्यादा तर तेल
03:56Latin America और Canada से आयात किया जाता था
04:00जो भारी कच्चा तेल होता था
04:02और उन दिनों में अमेरिका में रिफाइनरी भी इसी हिसाब से बनी
04:06इसके बाद 2000 के दशक की शुरुवात में अमेरिका के तेल उत्पादन में एक बड़ा बदलाओ आया
04:11टेक्नोलोजी बदली और शिल चट्टानों से बड़े पैमाने पर हलका कच्चा तेल निकाला जाने लगा
04:17अब अमेरिका जिस तरह का कच्चा तेल निकालता है वो हलके खिसम का है
04:22और उसके पास जैसे रिफाइनरियां है वो भारी तेल के लिए है
04:26यानि तेल और रिफाइंडियों में मेल नहीं है
04:29और एक्सपर्स की मानी तो रिफाइंडियां बनाना भी आसान नहीं
04:33इन में करोडों डॉलर का खर्च आता है
04:35एक फैक्ट ये भी है कि हलका कच्च तेल
04:38quality के हिसाब से भारी तेल के मुकाबले अच्छा होता है
04:42जिसके दुनिया के बाजार में अच्छे क्यमत बिलती है
04:45ऐसे में अमेरिका खुद अपना हलका कच्चा तेल
04:48दूसरे देशों में निर्यात कर उससे मोटा मुनाफ़ा कमाता है
04:52जबकि दूसरों से सस्ते दर्पर भारी तेल मंगवाकर उसे रिफाइन करवा लेता है
04:57यानि उसे दोनों तरफ से फायदा होता है
05:01वैसे अगर दुनिया के बारे में बात करें
05:04तो जिन के पास सबसे ज़्यादा तेल के भंडार है और जो तेल बेचते भी है
05:08उनमें पहले नमबर पर वेनेजुला है जिसके पास 303 अरब बैरल तेल का भंडार है तेल के भंडार के मामले
05:16में ये पहले नमबर पर है लेकिन अमेरिकी प्रतिबंद के चलते वेनेजुला भंडार के हिसाब से न तेल निकाल पाता
05:22है न बेच पाता है तेल भंडार और उत्
05:38इसوقत अमेरीकी हमले को छेल रहा एरान है
05:41इरान के पास इसवक्ड दोसुट नौ अरब बेरल तेल का भणडार है
05:45इतना ही नहीं गैस उतपालं के मामले में ये इरान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है
05:51रोजाना की खपत को देखते हुए इरान के पास इस वक्त इतना तेल है जो आने वाले 297 तर खत्म
05:58नहीं हो सकता
05:59इरान के बाद इराक, युए, खुए, गटर, रूस और लीबिया भी उन देशों में आते हैं जिन के पास सबसे
06:07ज़्यादा तेल के भंडार है
06:09क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में 90 की सदी से ज़्यादा तेल की खरीद फरोग किस करिंसी से
06:16होती है
06:16डॉलर, अमेरिकी करिंसी, और जब इसी डॉलर से तेल या गैस खरीदा जाता है, तो वो डॉलर, पेट्रो डॉलर बच
06:24जाता है
06:27अब इस डॉलर या पेट्रो डॉलर के नाम पर अमेरिका कैसी दादगिरी करता है, कैसे दूसरे देशों में तखल देता
06:34है, कैसे दूसरे देशों पर हमले करता है, और कैसे उन देशों में तखता पलट करता है, पेशे पूरी कहा
06:44कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी डी सेक्स के मुताबिक
06:481947 से लेकर 1989 तक अमेरिका ने 70 अलग लग देशों में
06:53सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जिनके दस्तावेजी प्रवान मौजूल थे
06:58लेकिन ये सलसला इसके बाद भी नहीं थमा
07:01अमेरिका ने 1989 से लेकर अब तक डर्जनों मुलकों में
07:05सत्ता परिवर्तन के लिए अलग अलग किस्म के ऑपरेशन चला है
07:08पिर चाहे वो खुले आम हो या फिर ठके चुपे तरीके से
07:12जिन देशों में अमेरिका ने ये हर्कंडा अपनाया
07:14उनमें सर्विया, अफगानिस्तान, एराक, लीबिया, सीरिया, सूडान, एरान, यूकरेन, जॉर्जिया, हेथी, वेनेजुला, ग्रांडा, पनामा, पाकिस्तान, समेथ, और भी कई देश
07:27शामिल है
07:27प्रोफेसर जेफरी के मताबिक अगर इन सारे ऑपरेशन को इस लिस्ट में जोड़ दिया जाए
07:32तो तखता पलट की अमेरिकी कोशिशों की तादाद सौ तक पहुँच जाएगी
07:36हाला कि वो कहते हैं कि 1989 के बार इस मामले को लेकर कोई पक्की स्टेडी सामने नहीं आई है
07:43क्योंकि इन में से ज्यादा तर आपरेशन सीक्रिट रहे
07:46और अमेरिका ऐसी तखता पलट की कोशिशों से इंकार भी करता रहा है
07:51ये सारी जंग, ये सारी दादागिरी, ये सारी हेकडी और ये सूपर पावर का घमन सिर्फ तब तक है
07:58जब तक इस डॉलर ये पेट्रो डॉलर का रुद्बा है
08:01पर इतिहास कवा है कि जब जब इस टॉलर के रुद्बे को दुनिया के किसी भी देश ने कम करने
08:06की कोशिश की
08:07उस देश को अमेरिका ने बरबाद करके रख जिया
08:11यह तस्वीर तो इसी साल जन्वरी की है
08:14इस तस्वीर को देखकर पूरी दुनिया हैरान तो जरूर हुई
08:17पर मजाल किया जो अमेरिकी दादागिरी के खलाफ कोई देश अपना मूँ खोलता
08:22एक देश के रास्ट पती और उनकी बत्नी को उनी के देश में खुसकर
08:26अमेरिका पहले बंधक बनाता है फिर अमेरिका लाता है और इसके बाद दोनों को जेल में डाल देता है
08:33याद रखे यह वो वेनेजुएला है जिसके पास दुनिया भर में मौजूद तेल के भंधार का अकेले 17 पीसदी हिस्सा
08:40है
08:41वेनेजुएला तेल उत्पादन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है
08:45एक रिपोर्ट के मताबिक वेनेजुएला में कुल 303 अरब बैरन तेल का भंधार है
08:51इसलिए अमेरिका को वेनेजुएला या उसके राश्रपती से कोई मतलब नहीं
08:56उसे मतलब था तो सिर्फ वेनेजुएला के टेल से
08:59और अब वो उसके कब्से में है
09:01यानि तेल के भंधार वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश
09:04अब एक तरह से अमेरिका के कब्से में है
09:09सद्दाम हुसैन की कहानी तो याद होगी आप
09:11ये भी आपको याद होगा कि कैसे अमेरिका ने इराक के पास
09:15मास डिस्ट्रक्शन विपन के नाम पर इराक पर नाटो सेना के जरीए हम लगते
09:20और कैसे सद्दाम हुसैन को फांसी के तख्ते पर चढ़ा दे
09:24पर आज तक इराक से वो मास डिस्ट्रक्शन विपन कभी नहीं लिए
09:28फिर इराक में तख्ता पलट और सद्दाम को मारने की असली वज़ा क्या थी
09:33ये वज़ा थी वही डॉलर
09:39एक रिपोर्ट के मताबिक इराक पर अमेरिकी हमले से करीब तीन महीने पहले
09:44सद्दाम हुसैन ने अपने कैबिनेट में एक फैसला लिया था
09:47फैसला ये कि अब इराक तेल का कारोबार डॉलर में नहीं बलके यूरो में करेगा
09:52कहते हैं कि तब सद्दाम हुसाइन ने अमेरिकन बैंक में रखे कई मिलियन डॉलर निकालकर उसे योरो में कनवर्ट कर
09:59दिया था
09:59डॉलर की जगा योरो में कारोबार का मतलब साथ था कि डॉलर का रुद्बा कम होता
10:05और बस इसी वज़ा से मास डिस्ट्रक्शन विपन की आलब इराक में तखता पलटकर सद्दाम हुसाइन माड डालाए तब से
10:13लेकर आज तक तेल संपन्ने देश होने के बावजूद इराक बद्धाल है
10:22लीविया पर करीब 40 सालों तक हकूमत करने वाले करनल मौमार गदाफी की कहानी सद्दाम हुसाइन से कताई अलग नहीं
10:30थी
10:30अमेरिका ने गदाफी पर मानवदिकार के उलंगन का इल्जाम लगाया
10:34और 2011 में लीविया में तख्ता पलत कर वो हालात पैदा कर दिये के करनल गदाफी मारे की
10:412011 के बाद से आज तक कभी एक संपन्न देश रहा लीविया बदहाली के कगार पर है
10:47अमेरिका को तब भी करनल गदाफी की हकुमत या लीविया में मानवदिकार के उलंगन से कोई लेना देना नहीं था
10:54असल कहानी ये थी कि 2009 में करनल गदाफी जो तब अफरीकन यूनियन के प्रिसिडेंट पी थे
11:01अफरीकन देशों के लिए ट्रेड के वास्ते टॉलर की जगह एक नई करंसी गोल्ड दीनार शुरू करने का प्रस्ताव ला
11:08चुके थे
11:12नाइजीरिया, ट्यूनिशिया, इजिप्ट और अंगोला इसके लिए राजी भी हो चुके थे
11:16यानि इन देशों में अब व्यापार में लेंदेन के लिए टॉलर की जगह गोल्ड दीनार चलन में आने वाला था
11:22तब अमेरिका को भी ये खबर लगते कि गोल्ड दीनार लाने के लिए करनल गदाफी लीविया में बड़े पैमाने पर
11:29गोल्ड रिजब कर रहा है
11:30तब लगभग डेड़ सो टन गोल्ड लीविया जमा कर चुगा था
11:34असल में किसी भी देश की करनसी की वैलिय उस देश के नैशनल बैंक में जमा गोल्ड यानि सोने से
11:41आँकी जाती है
11:41बस ये पता चलते ही मानवदिकार के उलंगन का राग अलापते हुए
11:46अमेरिका ने नाटो देश की मतद से लीविया में भी तफ़ता पलट कर करनल का दाफिक रास्ते से हटा दियो
11:55तो डॉलर को सीधे चुरौती देने जा रहे ही इन दोनों देशों का हश्र आपके सामने है
12:00दुनिया भर के देशों में करीब 96 पीसदी कारोबार ट्रेड या लेंदेन के लिए डॉलर का ही इस्तमार कोता है
12:07और बस डॉलर की इसी ताकत अमेरिका को सूपर पावर बना रखा है
12:12पर क्या डॉलर का ये रुद्बा का भी खत्म हो सकता है
12:15तो चलिए इसके लिए एक तस्वीर आपको दिखाता हूँ
12:18ये तस्वीर 2024 में हुए ब्रिक्स समिट की है
12:22इस समिट के दोरान रूस के रास्टरपती ब्रादिमिर पुतिन ने
12:26ब्रिक्स और उसके समर्थक देशों के लिए एक नई करंसी लाने का प्रस्तावर खत है
12:30ये वही प्रस्तावित करंसी की तस्वीर है
12:33अपने नाम के हिसाब से ब्रिक्स के कुल पांट देश मिंबर है
12:37ब्राजीर, रशिया, इंडिया, जी, साउथ अफरिका
12:40इसके अलावा इरान, युए, इजिप्ट और इथोपिया को भी इसमें शामी किया जाता है
12:50ब्रिक्स में शामिल देशों की कुल जीडीपी, दुनिया भर के देशों का 37 फीसद है
12:55जबकि आबादी के हिसाब से सिर्फ ब्रिक्स से जु exceptional देशों की आबादी, दुनिया भर की कुल आबादी का 45
13:00फीसद है
13:01अब जरा सोचिए अगर ब्रिक्स अपनी करंसी ले आया तो डॉलर का क्या होगा पर ब्रिक्स को भी पता है
13:08कि वो जो भी करंसी लाएगा उसकी वैलियू डॉलर से आखी जाएगा बस इसलिए ब्रिक्स ने तैय किया कि प्रस्तावित
13:14नहीं करंसी डॉलर से नहीं बलकि उसकी �
13:17ब्रिक्स के मिंबर देशों के बैंकों में रखे रिजर्व गोल्ड यानि सोने के भंडार और उन देशों की अपनी करन्सी
13:24के वैल्यू से आखी जाएगे
13:2640 फीसदी वैल्यू सोने के कुल भंडार और 60 फीसदी इन देशों की अपनी करन्सी की वैल्यू से
13:35ब्रिक्स का प्लैन ही यही है कि आने वाले वक्त में अलग अलग देशों के साथ जो भी वे अपार
13:40वो वो डॉलर से नहीं बलके ब्रिक्स की अपनी करिंसी से
13:48भारत ब्रिक्स का एक एहम मिंबर है
13:50पुतिन ने ब्रिक्स की नई करंसी बेशक 2024 में प्रस्तावित की
13:55पर उससे दो साल पहले ही 11 जुलाई 2022 को भारत सरकार ने एक बहुत एहम एलान किया था
14:01एलान ये कि भारत दूसरे देशों के साथ अपना ट्रेड इंडियन करंसी यानि भारतिये रुपए में करेगा
14:08इस एलान के बाद ही कई देशों के नैसल बैंकों ने भारत में अपनी ब्रांच भी खोलनी शुरू कर दे
14:14जाहिर है ये एलान अमेरिका को भी बुरा लगा होगा पर भारत को भी पता है कि सिर्फ इंडियन करंसी
14:20से ट्रेड करने का तब तक कोई मतलब नहीं जब तक कि रुपए की वैल्यू मजबूत नहीं
14:25और किसी भी देश की करंसी तभी मजबूत होती है जब उस देश में सोने का भंडा यानि रिजर्ब गोल्ड
14:32ज्यादा होता है
14:35रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया ने 2017 के बाद से ही बड़े पैमाने पर गोल्ड खलीदना शुरू कर दिया था
14:412024 में तो भारत गोल्ड खलीदने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश था
14:46इस वक्त पूरी दुनिया में सोने का भंडा रखने के मामले में भारत आठवे नमबर पर है
14:52भारतिय रिजर्ब बैंक के पास इस वक्त करी 840 टन गोल्ड का भंडा है
14:572024 की सबसे ताजा रिपोर्ट के मताबिक
15:00गोल्ड डिजर्व यानि सोने का भंडार रखने के मामले में
15:03अमेरिका पहले नमबर पर है
15:05अमेरिका के पास इस वक्त फुल 8133 टन सोना है
15:10दूसरे नमबर पर जर्मनी है
15:11जिसके पास 33,555 टन सोना है
15:1524,551 टन सोना के साथ इट्ली तीसरे नमबर पर है
15:18चौते नमबर पर फ्रांस है जिसके पास 2436 टन सोना है
15:23पांच्वे नमबर पर रूस है जिसके पास 2335 टन सोना है
15:28छटे नमबर पर चीन है जिसके पास 2254 टन सोना है
15:32आठ सो पैंतालीस टंड सोना के साथ जापान साथ में नमबर पर है जब कि आठ सो चालीस टंड सोना
15:39के साथ भारत आठ में नमबर पर है
15:42अब सोची डेड़ सो टन गोल जमा करने की खबर सुनते ही जब अमेरिका ने लीडिया में तखता पलट कर
15:49दिया
15:49तो भारत की अपनी करिंसी में वेपार पड़े पैमाने पर गोल जमा करना और ब्रिक्स के साथ नई करिंसी लाने
15:56पर गोर करना
15:57क्या अमेरिका और अमेरिकी डॉलर को सीधे चुनोती नहीं है?
16:03सुपरतीम बेलर जी और मनीश जहा के साथ दीपक सिंग आज तक
16:09साथ के दशक में अगर एक छोटी सी गल्टी नहुई होती
16:13तो आज भारतिय करंसी का रुथबा भी डॉलर से कम नहीं होता
16:17क्या आपको पता है कि एक दोर ऐसा भी था
16:20जब मिडल इस्ट के कई देशों की करंसी रुपए हुआ करती थी
16:24जरा सोचिए अगर आज भी मिडल इस्ट के इन देशों में
16:28रुपए ही वहां की करंसी होती तो फिर रुपए के कीमत क्या होती
16:34वैसे आप मेंसे कम लोगों को ही पता होगा
16:37कि आजादी के बाद 1947 से लेकर 1966 तक भारतिय करंसी खाड़ी के देशों में भी चला करती थी
16:44तब वोवान, योई, अतर, बहरीन और प्वैत में कोई दिनार ये रियाल नहीं हुआ करता था
16:50बलकि इन सभी देशों में भारतिय रुपै ही चला करते थे
16:56असल में भारत के साथ-साथ अंग्रेजों से इन देशों को भी आजादी मिली थी
17:00आजादी से पहले इन देशों में भारतिय रुपै ही चला करते थे
17:03मगर आजादी मिलने के बाद भी ओमाद, यूई, पतर, पहरी और क्वैत ने अपनी करंसी चापने की बजाए भारतिय रुपए
17:11को ही चलन में बनाये रखा
17:13फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब भारतिय रिजब बैंक ने इन देशों के लिए खास नोट चापने शुरू करते
17:33एक खास नोट चापता था, जिसे तब हज रुपए कहा जाता था, ये रुपए एच ए सिरीज के नाम से
17:40छपते थे
17:43परसाट के दशक में आचानक भारतिय करिंसी को किसी की नज़र लगी, पहले चीन के साथ 62 की जंग, फिर
17:50पाकिस्तान के साथ 65 की जंग, और उसके बाद 66 में, बिहार में भैंकर सूखे ने भारतिय एकोनोमी को तहस
17:57नहस करके रख दिया
17:59एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया, इंपोर्ट जरुरूरत से ज्यादा होने लगा, महिंगा या आस्मान छूने लगी, और जो रुपए तब
18:064 रुपए प्रती डॉलर गुआ करता था, वो अचानक बढ़कर साड़े 7 रुपए हो गया
18:10खाड़ी के देश घबरा गए, उन्हें जीडीपी गिरने का खत्रा लगने लगा, और तब इन देशों ने भारती रुपए की
18:17जगा अपनी अपनी करंसी शुरू करने का फैसला किया
18:20इस तरह 66, खाड़ी के देशों में रुपए की जगा, दीनार और तिरहम ने ले लिए
18:28सुपरतीन बेलर जी और मनीश ज़ा के साथ दीपर्क सिंग आज तक
18:34तो वारदात में फिलाल इतना ही, मगर देश और दुनिया की बाके खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
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