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  • 3 weeks ago
Transcript
00:00एक गरीब किसान खेतों में काम करते करते ठक गया
00:03भूखा और प्यासा वो किनारे बैट गया
00:05उसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था
00:07तब ही अचानक एक नूरानी चहरे वाले बुजर्ग वहां से गुजरे
00:11किसान ने कामती आवाज में कहा
00:13हजरत मेरी मदद कीजिए
00:15मैं सुबह से भूका हूँ
00:16मैंने कुछ नहीं खाया
00:17दोस्तों अल्ला के वलियों से बंदों की परिशानी देखी नहीं जाती
00:21उन्होंने आसमान की तरफ हाथ उठाए और दुआ की
00:24कुछ ही देर में महां जमीन से एक पेड उगाया
00:27जिस पर ताजे फल, गर्मा गरम रोटियां और गोश्ट लटका हुआ था
00:31अल्ला के वली ने किसान से कहा
00:33ए अल्ला के बंदे पेट भर कर खा और अपने रब का शुक्र अदा कर
00:37किसान ने पेड से खाना तोड़ा और तसल्ली से खा लिया
00:40उसके चहरे पर सुकून और दिल में शुक्र गुजारी भर गई
00:43उस पल उसने समझ लिया
00:45अल्ला अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता
00:48वो अपने वलियों के वसीले से उनकी मदद फरमाता है
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