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  • 14 hours ago
इजरायल और ईरान की दोस्ती से लेकर दुश्मनी तक की पूरी कहानी, देखें वारदात में

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00:00नवस्कार मैं हूँ शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदाद
00:03पिछले छे दिनों से अमेरिका इसराईल और इरान के बीच जंग जारी है
00:08पिछले साल जून के बाद ये दूसरा मौका है जब अमेरिका ने सीधे इरान पर हमला किया है
00:14जबकि एरान और इसराईल की दुश्मनी बरसों पुरानी है
00:18लेकिन क्या आपको पता है कि एक दोर ऐसा भी था जब एरान और इसराईल एक दूसरे के गहरे दोस्त
00:25हुआ करते थे
00:25यहां तक कि इसराइली खुफ़े एजनसी मुसाद और एरानी खुफ़े एजनसी के बीच भी गहरी दोस्ती थी
00:32तो फिर ये दोस्ती दुश्मनी में कैसे बदली पेश पूरी कहानी
00:42आम तोर पर दो देशों के बीच लडाई की शुरुआत तभी होती है
00:46जब दोनों की सरहद एक दूसरे से लगती हो
00:48और उनमें अपने अपने अपने इलाके को लेकर अन बनो
00:53लेकिन इरान और इसराहिल के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है
00:56फिर भी सालों से दोनों देश एक दूसरे के साथ कभी शैडो वार
01:01तो कभी सीधी लडाई लड़ते रहे
01:04लेकिन ये जानना भी कम अजीब नहीं है
01:06कि जो इरान और इसराहिल इस वक्त एक दूसरे के खून के प्यासे है
01:10उनके रिष्टों की शुरुआत कभी दोस्ती से हुई थी
01:141948 में इसराहिल के वजूद में आने के बाद
01:17उसे काफी चुनोटियों का सामना करना पड़ा
01:20दुनिया के ज़्यादा तर देशों ने तब इसराहिल को माननेता देने से इंकार कर दिया था
01:25खासकर मिडलीस्ट के मुस्लिम देश इसराहिल के सक्थ खिलाफ थे
01:29लेकिन तब इरान ने इसराहिल को माननेता दे तब इरान में यहूदियों की भी अच्छी खासी तादाद हुआ करती थी
01:37एक देश के तोर पर माननेता मिलने के बाद इसराइल ने इरान को हत्यारों की सप्लाई शुरू की और इरान
01:45ने बदले में इसराइल को तेल देना चालू किया
01:48रिष्टे कुछ इतने अच्छे हो गए कि दोनों देशों की खुफिया एजिंसियों ने टेकनोलोजी से लेकर जॉइन ट्रेकिंग तक किये
01:55लेकिन इरान में आयतल्ला खुमैनी की अगवाई में इस्लामी करांटी की शुरुआत क्या हुई
02:01इसराइल के साथ इरान के रिष्टे खराब होने लगी
02:05खुमैनी ने अमेरिका और इसराइल को शैतानी देश करार दिया और मुस्लिम रास्ट की मांग उठाने लगी
02:111989 में एरान पूरी तरह से मुस्लिम देश बन चुका था
02:16और इसी के साथ इसराइल के साथ एरान के रास्ते अलग हो गए
02:21इसलामिक करांती के बाद एरान और इसराइल के रिश्टे लगबख पूरी तरह से खत्म हो चुके थी
02:27दोनों देशों के बीच आवाजा ही बंद हो गए
02:30एर रूट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया
02:33दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर भी विराम लग गया
02:36तहरान के इसराइली दूतावास को फिलस्तीनी दूतावास में बदल दिया गया
02:41और तो और दोनों ही देशों ने अब एक दूसरे को माननेता देना ही बंद कर दिया
02:46इरान ने पहले तो इस्राइल को माननेता दी थी
02:49लेकिन बात में इरान कहने लगा कि इस्राइल ने फिलस्तीनियों का हक मारा है
02:53अब एक तरफा प्यार कहां तक चलता तो इसराइल ने भी इस्लामिक रिपब्लिक को मानने से इंकार कर दिया
03:00आगे चलकर रिष्टे तबहुर खराब हो गए जब इरान ने इसराइल के विरोधि सीरिया यमन और लिबनान जैसे देशों को
03:07हत्यारों की सप्लाई शुरू कर दी
03:09दरसल तब इसराइल धीरे धीरे फिलिस्तीन की जमीन को कबजाने में लगा था
03:56मुख था
03:58سال 1948 से पहले ये था फिलिस्तीन
04:14तब भी यहां कुछ यहुदी शनार्थी रहते थे
04:18मगर तब फिलिस्तीन पर सौ फीसदी फिलिस्तीनियों का कब्जा था
04:22और इसराइल का नामो निशान भी नहीं था
04:241948 में अंग्रेजों ने फिलिस्तीन के दो टुकड़े कर दिये
04:29जमीन का 55 फिसदी टुकड़ा फिलिस्तीन के हिस्से में आया
04:33और 45 फिसदी इसराइल के हिस्से में
04:37इसी के बाद 14 माई 1948 को इसराइल ने खुद को एक आजाद देश खोशित कर दिया
04:43और इस तरह दुनिया में पहली बार एक यहूदी देश का जन्म हुआ
04:53मगर यरुशलम को लेकर लड़ाई अब भी जारी थी
04:56क्योंकि इसराइल और फिलिस्तीन दोनों यरुशलम को अपनी राजधानी बनाना चाहते थे
05:01फिर धार्मिक लिहास से भी यरुशलम ना सरफ मुस्लिम और यहूदी बलकि इसाईयों के लिए भी बेहत खास था
05:08तब ऐसे में सियुक्त रास्ट बीच में आया और उसने एक तरह से फिलिस्तीन के एक और टुकड़े की
05:18अब यरुशलम का आठ फिसदी हिस्सा से युक्त रास्ट के कंट्रोल में आ गया
05:23जबकि 48 फिसदी जमीन का टुकड़ा फिलिस्तीन और 44 फिसदी टुकड़ा इसराईल के हिस्से में रहे
05:29मगर जमीन की लडाई इसके बाद भी जारी रही
05:321956, 1967, 1972 और 1982 में इसराईल फिलिस्तीन लड़ते रहे और इसराईल लगातार फिलिस्तीनियों की जमीन पर कबजा करता रहा
05:44और फिर नौबत ये आ गए कि पहले 55 फिसदी और फिर 48 फिसदी से सिमटते हुए 22 फिसदी और
05:52अब 12 फिसदी जमीन के टुकड़े पर ही फिलिस्तीन सिमट कर रहे गया
06:02जबके आधिकारिक रूप से यरुशलम को छोड़कर इसराईल लगभगबाकी के 80 फिसदी और पर कबजा कर चुका था
06:09ले देकर फिलिस्तीन के नाम पर अब दो ही और बज़े ए गज़ा और दूसरा विस्ट बैंक
06:15वेस्ट बैंक अमूमन शांत रहता है जब की घज़ा गरम क्योंकि घज़ा पर एक तरह से हमास का कंट्रोल है
06:25इसी सिकुर्टे फिलस्तीन को लेकर इरान 1989 के इसलामिक करांटी के बाद से इसराईल से लड़ता रहा
06:32यही वो लड़ाई है जो आज भी जारी है
06:36दुनिया की सबसे चत्रखवी एजन्सी, दुनिया के सबसे थाकतवर हत्यावों से लैस
06:41और दुनिया की सबसे बेखावज सेना होने का धावा करने वाले
06:45इसराईल के परधान मंत्री बेंजमिन नितनियाहू से जब पूछा जाता है
06:49क्या आपके देश के लिए तीन सबसे बड़े खत्रे कौन है तो जानते हैं वो क्या कहते हैं वो कहते
06:55हैं आर्थिक राजनितिक और सामरिक तोरपर इरान को पंगू बनाने की अमेरिका और इसराइल की तमान कोशिशों के बाद भी
07:10अरब में अगर कोई मुलक खड़ा है तो व
07:13इरान ने वरना इराक लीबिया और टियूनिशिया की मिसालें आपके सामने हैं जिसे इन देशों ने मिलकर तबाह कर दिया
07:20आज भी अगर इसराइल और अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे ताकतवर देशों को मिडल इस्ट में कोई टक कर दे
07:26सकता है तो वो कोई और नहीं बलक
07:42शिम में घाजबटी पर मौजूद फिलिस्तीनी संगठन हमास जिसके साथ एरान शिया सुन्नी का फर्थ मिटाकर पूरी शिद्दत से खड़ा
07:51है उसे ना सिर्फ पैसों से बलकि जंग के सामान से भी लैस करता रहा है इरान से इसराइल के
08:00खौफ की दूसरी वज़ा है उत्
08:17हिजबल्ला अक्सर इसराइली सेना पर रॉकेट लांचरों से हमला करता रहता है इसे भी इरान का समर्थन हासिल है
08:27इसराइल के खौफ की तीसरी वज़ा है पूरब में मौजूद सीरिया जहांके सरहदी इलाकों में इरानी मिलीशिया की मौजूदगी रही
08:35है और जो हमेशा इसराइल के लिए खत्रा बनी रहती है
08:38इसराइल अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद सीरिया में इरान की मौजूदगी को खत्म नहीं कर पाया है
08:44मिडल इस्ट में अमरीकी दबाओ के बाद में इसराइल इस कोशिश में नाकाम रहा है
08:53इरान की इस ताकत के पीछे उसकी अपनी कोशिशें तो हैं ही
08:56साथी चीन और रूस जैसे देशों की दोस्ती ने भी उसे कई मौकों पर बदद की
09:01रूस और चीन की बात करें तो चीन खासकर मिडली इस्ट में अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है
09:07पिछले कुछ सालों में उसने कई अरब देशों के साथ बिलियन डॉलर डील साइन की है
09:12इरान के साथ उसने 400 बिलियन डॉलर के समझोते की है
09:16मगर चीन अरब में ये सब क्यों कर रहा है उसकी मनशा क्या है
09:23दूसरे विश्वयुद के बाद से ही चीन मिडलीस्ट में एक्टिव हो गया था
09:26मगर उस दोर में तेल और गैस की खोज होने के बाद
09:29अमेरिका यहां कूट पड़ा और तब से ही इस पूरे रीजन में अशान्ती का दोर शुरू होता है
09:35जिन देशों ने अमरिका की मर्मानी को माना वो उसके दोस्त बन गए और जिन्होंने उसे नकार दिया
09:41वहां ग्रिह युद या किसी ने किसी और पहाने से अमरिका ने या तो हमला कर दिया
09:46या वहां की सरकारों को सत्ता से बेदखल करवा दिया
09:51आज भी एरान पर जो हमले हुए हैं उसके पीछे एरानी न्यूकलिर प्रोग्राम नहीं बलकि वही तेल है
09:57जानकार मानते हैं कि एक बार जैसे जैसे इन देशों में तेल खत्म होना शुरू होगा
10:02यहां फिर से शान्ती की बहाली होना शुरू हो जाएगी
10:09बहरहाल सवाल यह है कि जब सेकंड वल वार के दोरान चीन मिडल इस्ट में एक्टिव हो रहा था
10:15तो उसने अपने पर समेट क्यों लिए
10:17इसके पीछे दो वज़ा है
10:19पहली वो मिडल इस्ट के किसी भी देश से अपने रिष्टे खराब नहीं करना चाहता था
10:23दूसरी और सबसे एहम वज़ा यह थी
10:26कि चीन उस दोर में इतना मजबूत नहीं था
10:28कि वो अमेरिका का सामना कर सकी
10:30मगर अब है
10:32चीन बड़े योजनबत तरीके से
10:34मिडल इस्ट में अपना दबदबा कायम कर रहा है
10:36ये चीन की ऐसी कोशिश
10:38और इरान के साथ उसके अच्छे रिष्टे का सबूत है
10:41कि अमरिका और इस्राइल के हमले के बाद इरान ने
10:44बेशक पूरी दुनिया के लिए
10:46स्टेट आफ हॉर्मूस का रास्ता बंद कर दिया हो
10:48लेकिन चीन एकलोता देश है
10:50जिसके लिए रास्ता भी खुला हुआ है
10:53अमरिका सूपर पावर होने के मुगालते में जी रहा है
10:56और चीन इन सब के बीच
10:58मिडल इस्ट में चुपके से घुसता जा रहा है
11:00सीधे तोर पर नस है
11:02मगर चीन अमरिका को कूटनी तिक तोर पर
11:04दुनिया के हर इलाके में चुनोती पेश कर रहा है
11:07मिडल इस्ट में दबदबा बनाने के पीछे चीन का मकसद
11:11सिर्फ अमरिका को सूपर पावर की गद्टी से हटाना ही नहीं है
11:15बलकि वो अपनी तेल और गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए
11:18दोस्त भी तलाश रहा है
11:21सैन ने ताकत के प्रदर्शन की बात करें तो चीन ने
11:24मिडल इस्ट में अब तक ऐसा नहीं किया है
11:26वो बहुत चतुराई से एक एक गदब फूप फूप कर रख रहा है
11:30एक तरफ जहां अमरिका की नीती पाटो और राच करो की है
11:33वहीं लालच तो चीन का भी है
11:35मगर उसकी नीत लड़वा कर पैसे कमाने की नहीं है
11:38मिला कर पैसे कमाने की है
11:41वहीं अमरिका सालों से शीया सुनी करवा कर
11:44सौधी अरब को इरान से
11:46कुर्द को अरब से
11:47तुर्की को सीरिया और लीबिया से लड़वा रहा है
11:49जबकि चीन का मानना है कि अगर आर्थिक रूप से ये देश तरक्षी करते हैं तो शांती खुद बहुत बहाल
11:56हो जाएगी
11:57जाहिरे चीन ने जिस तरह बिलियन डॉलर की इंवेस्मेंट मिडल इस्ट में कर रखी है
12:01उसे देखते हुए आज नहीं तो कल उसे अपने हितों की रक्षा के लिए यहां अपने बेस बनाने पड़ेंगे
12:07ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका ने बना रखे है
12:16अमेरिका इसराईल और इरान के भी जंग को छे दिन हो चुके हैं
12:19जंग चाहे कितने भी लंबी चले एक दिन रुकेगी जरूर पर सवाल फिर वही है
12:24कि क्या भविश्वे इरान और इसराईल फिर एक दूसरे से नहीं लड़ेंगे तो इसका जवाब है
12:29जब तक फिलिस्तीन और फिलिस्तीनियों की जंग जारी रहेगी तब तक एरान इस जंग का हिस्सा रहेगा
12:35एरान के लिए जंग सिर फिलिस्तीन के लिए ही नहीं है
12:39बलके फिलिस्तीन के अंदर मौझूद 35 एकड़ की जमीन के एक ऐसे टुकड़े के लिए
12:44जिसका मालिकाना हक तैकरना शायद किसी के बूते की बात नहीं
12:54यह पूरी दुनिया कुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाक एकड़ जमीन पर बसी है
12:59जिस पर दुनिया भर के लगबग 8 अरब इनसान बसते है
13:06इस 95 अरब 29 करोड़ 60 लाक एकड़ जमीन में से
13:10सिर्फ 35 अकड़ जमीन का एक ऐसा टुकड़ा है
13:13जिसके लिए बरसों से जंग लड़ी जा रही है
13:16जिस जंग में हजारों जाने जा चुकी है
13:19लेकिन आज भी दुनिया के गुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाक एकड़ जमीन में से
13:25इस 35 अकड़ जमीन के मालिकान अहक को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया
13:33यह यरुशलम है और इसी यरुशलम में 35 अकड़ जमीन के टुकड़े पर एक ऐसी जगह है जिसका तालुक तीन
13:41तीन धर्मोजे है
13:42इस जगह को यहुदी हर हवायत यफिर टेंपल माउंट कहते है जबकि मुस्लिम इसे हरमल शरीफ उलाते है
13:50कभी इस पर फिलस्तीन का कब्जा हुआ करता था बात में इसराईल ने इसे अपने कब्जे में ले लिया
13:56लेकिन इसके बावजूद आज की सचाई ये है कि 35 एकड़ जमीन पर बसे टेंपल माउंट या हरमल शरीफ न
14:03तो इसराईल के कब्जे में और नहीं फिलस्तीन के
14:06बलकि ये पूरी जगह से युक्तरास्ट के अधीन है
14:1035 एकड़ जमीन के ये वो टुकड़ा है जिस पर सेक्रो साल पहले इसायों का गब्जा हुआ करता था
14:17लेकिन 117 में यहां मुसल्मानों का गब्जा हुआ
14:20और तब तब से लेकर 1908 तक मुसल्मानों का ही टब्जा था
14:26लेकिन फिर 1948 में इसराइल का जन्म हुआ और उसके बाद से ही जमीन के इस टुकड़े को लेकर जब
14:32तब जगड़ा शुरू हो गया
14:34आए जानते हैं कि आखिर पैती से कड़ जमीन के इस टुकड़े पर ऐसा क्या है जिसके लिए सदियों से
14:40यहूदी इसाय और मुस्लिम लड़ते रहें
14:55मुस्लिम मानिताओं के मताबक मक्का और मदीना के बाद हरम अलशरीफ उनके लिए तीसरी सबसे पाक जगा है
15:02मुस्लिम धर्म गरंट पुरान के मताबक आखरी पैगंबर मुहम्मद मक्का से उड़ते हुए घोड़े पर सवार होकर हरम अलशरीफ पहुँचे
15:11थे
15:11और यहीं से वो जन्नत गए
15:13इसी माननता के मताबक तब यरुशलम में मौझूद उसी हरम अलशरीफ पर एक मस्जिद बनी थी
15:19जिसका नाम अलगसा मस्जिद है
15:23माननता है कि यह मस्जिद ठीक उसी जगह पर बनी है
15:26जहां यरुशलम पहुचने के बाद पैगंबर मौम्मद अपने पाउं रखे थे
15:32अलगसा मस्जिद के करीम ही एक सुनहर गंबद वाली इमारत है
15:36इसे डॉम आफ दा रॉक कहा जाता है
15:38मुसलिम माननता के मताबक यह वही जगह है
15:41जहां से पैगंबर मौम्मद चन्नत कहते है
15:44जाहिरे इसी वज़ा से अलगसा मस्जिद और डॉम आफ दा रॉक
15:47मुसलमानों के लिए बेहत पाग जगह है
15:50इसलिए वो इस जगह पर अपना दावा ठोकते है
16:03यहोदियों की माननता है कि यहरुशलम में 35 से कड़की उस जमीन पर उनका टेंपल मौंट है
16:09यानि वो जगह जहां उनके ईश्वर ने मिट्टी रखी थी
16:12जिस से आदम का जन्द हुआ
16:14यहोदियों की माननता है कि यह वही जगह है
16:16जहां अबराहम से खुदा ने कुर्बान ही मागी थी
16:19अबराहम के दो बेटे थे
16:20एक इसमाईल और दूसरे इसहाग
16:23अबराहम ने खुदा की राह में इसहाग को कुर्बान करने का फैसला किया
16:27लेकिन यहोदी माननताओं की मताबिक
16:29तबी फरिष्टे ने इसहाग की जगा एक भेड को रख दिया
16:33जिस जगा पर ये घटना हुई उसका नाम टेंपल माउंट है
16:37यहूदियों के धार्मिक ग्रंथ हिबू बाइवल में इसका जिक्र है
16:41बाद में इसहाग को एक बेटा हुआ जिसका नाम जैकब था
16:46जैकब का एक और नाम था इसराइल
16:49इसहाग के बेटे इसराइल के बाद बारा और बेटे हुए
16:52उनके नाम थे 12 ट्राइब आफ इसराइल
16:56यहूदियों की माननिता के मताबिक इन्हे कबीलों की पीडियों ने आगे चलकर यहूदी देश बना है
17:03शुरुवात में इसका नाम लैंड ओफ इसराइल रखा
17:061947 में इसराइल की रावेदारी का आधार यही लैंड ओफ इसराइल बना है
17:13लैंड ओफ इसराइल पर यहूदियों ने एक टेंपल बनाया जिसका नाम फस टेंपल था
17:17इसे इसराइल के राजा किंग सुलिमान ने बनाया था
17:21बाद में ये टेंपल दुश्मन देशों ने नस्ट कर दिया
17:24कुछ सौ साल बाद यहूदियों ने उसी जगा फिर एक टेंपल बनाया
17:28इसका नाम सिकंड टेंपल था
17:30इस सिकंड टेंपल के अंदरूनी हिस्सों को Holy of Holies कहा गया
17:35यहूदियों के मताविक यह वो पाक जगा थी
17:37जहां सिर्फ खास पुजारियों को छोड़कर
17:40खुद यहूदियों को भी जाने की अजाज़त नहीं थी
17:43यही वज़ा है कि इस सिकंड टेंपल की Holy of Holies वाली जगा
17:47खुद यहूदियों ने भी नहीं देखे
17:51लेकिन बाद में रोमन ने इसे भी तोड़ दिया
17:53लेकिन इस टेंपल की एक दिवार बची रह गई
17:56यह दिवार आज भी सलामत है
17:58इसी दिवार को यहूदी वेस्टन वाल कहते है
18:01यहूदी इस वेस्टन वाल को Holy of Holies के एक आहाते का हिस्सा मानते है
18:05मगर चूँकि Holy of Holies के अंदर जाने की इजासत
18:09खुद यहूदियों को भी नहीं थी
18:11इसलिए वो पक्के तोर पर यह नहीं जानते
18:13कि वो अंदरूनी जगह असल में ठीक किस जगह पर है
18:18लेकिन इसके बावजूद वेस्टन वाल की वज़ा से
18:20यहूदियों के लिए यह जगह बेहत पविद्र है
18:32इसाईयों की माननेता है कि इसा मसी ने
18:35इसी पैती से कड़ की जमीन से उपदेश दिया था
18:37इसी जमीन से वो सूली पर चड़े फिर दोबारा जी उटे
18:41और अब जब वो एक बार फिर जिन्दा होकर लोटेंगे
18:45तो भी इस जगह की एक अहम भूमी का होगी
18:49जाहिर ऐसे में यह जगह इसाईयों के लिए भी उतनी ही पवित्र है
18:52जतनी मुस्लिमों या यहूदियों के लिए
18:58अब सवाल यह है कि 35 एकड़ की जमीन का यह टुकड़ा जब तीन तीन धर्मों के लिए इतना अहम
19:04है
19:04तो फिर फिर हाल इस पर कब्जा किसका है
19:06इन धार में के स्थलों की रख रखाओ की जिम्मेदारी किसके पास है
19:10और इसके लिए खास तोर पर यहूदियों और मुस्लिम आपस में लड़ती क्यों रहते हैं
19:17आज तक्बिरों
19:19यरुशलम में 35 एकड़ जमीन के टुकड़े के लिए बरसों से जंग जा रही है
19:23लेकिन एक दूसी सचा यह भी है
19:26कि इसराइल फिलस्तीन के 55 फीसदी जमीन में से 43 फीसदी जमीन हड़प कर चुका है
19:321948 में जिस फिलस्तीन के पास 55 फीसदी जमीन थी
19:37आज वही फिलस्तीन सिर्फ 12 फीसदी जमीन के टुकड़े में सिमट कर रह गया
19:451187 से पहले कुछ वक्त तक हरमल शरीफ या फिर टेंपल माउंट पर इसाईयों का कब्जा हुआ करता था
19:52लेकिन 1187 में हरलम शरीफ पर मुसल्मानों का कब्जा हो गया
19:56इसी के बाद से हरमल शरीफ का पूरा प्रबंदर यानि की देखरेक की जिम्मदारी वक्फ
20:02यानि एक तरह से इसलामिक ट्रस्ट को दे दी गए
20:04तब से लेकर 1948 तक इसलामिक ट्रस्ट ही हरमल शरीफ का प्रबंदर देख रही थी
20:10इस दोरान इस जिगे पर गयर मुसलिमों की एंट्री नहीं थी
20:141948 से पहले हरमल शरीफ फिलस्तीन का एक हिस्सा हुआ करता था
20:19हाला कि तब भी यहां कुछ यहूदी शर्नार्थी के तोर पर रहा करते थे
20:23लेकिन उस वक्त फिलस्तीन अंग्रेजों के अधीन था
20:261948 में अंग्रेजों नहीं फिलस्तीन के दो टुकड़े कर दी
20:29ठीक वैसे ही जैसे 1947 में अंग्रेजों ने भारत के दो टुकड़े किये थे
20:34तब पूरे फिलिस्तीन की जमीन का 55 फीसदी टुकड़ा फिलिस्तीन के हिस्से में आया और 45 फीसदी इसराइल के हिस्से
20:42में
20:43इसी के बाद 14 में 1948 को इसराइल ने खुद को एक आजाद देश घोशित कर दिया
20:48और इस तरह दुनिया में पहली बाद एक यहूदी देश का जन्व हुआ था
20:52मगर यरुशलम को लेकर लडाई अब भी जारी थी क्योंकि इसराइल और फिलस्तीन दोनों यरुशलम को अपनी राजधानी बनाना चाहते
21:00थे
21:00फिर धार्मिक लिहास से भी यरुशलम नसरिफ मुस्लिम और यहूदी बलकि इसाईयों के लिए भी बेहत खास था
21:06तब ऐसे में सैयुक्तरास्ट बीच में आये और उसने एक तरह से फिलस्तीन के एक होड टुकड़े की अब यरुशलम
21:13का आठ फीसदी हिस्सा सैयुक्तरास्ट के कंट्रोल में आ गया जबकि 48 फीसदी जमीन का टुकड़ा फिलस्तीन और 44 फीसदी
21:21टुकड़ा इसराइल के ह
21:23इससे में रह गया यरुशलम का ये वो आठ फीसदी हिस्सा जो 35 एकड़ जमीन पर बसा है वही हरमल
21:30शरीफ या फिर टेंपल माउंट है दरसल आजाद देश बनने के बाद इसराइल यरुशलम को अपनी राजधानी बनाना चाहता था
21:37जपनी फिलस्तीन यरुशलम को अपन
21:57पर इसके बावजूद एक मसला भी बचा हुआ था और वो ये कि हरमल शरीफ या टेंपल माउंट के रख
22:03रखाओ की जिम्मेदारी किसे सौपी जाए तो इसका भी हल निकाला गया एक तीसरे देश जौडन को हरमल शरीफ या
22:10फिर टेंपल माउंट के प्रबंधन की जिम्मे
22:19अज़र देखे हाला कि वो पूजा पार्ट नहीं करेगी यही सिल्सला अब भी चला रहा है आज तक भी रोग
22:26तो वार्दात्म फिलाल इतना ही मगर देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप एकते रही आज तक
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