00:00तुलसी दास ने जो करा था साहस दिखाया था गजब अनहेरी रात सावन भादों और नदी पार कर गए पत्नी
00:06मायके गई हुई थी उनको कामना का आवेक चड़ा रात में तो नदी अधी पार करके और पत्नी का तुमंजला
00:12थे मिंजला कुछ घर रहा होगा वहां देखा वह
00:14देखा वहां चड़ा है कैसे चड़े पोले यहां सामने के दराजे से घुसें गया नहीं बंद पड़ा होगा रात में
00:18देखा रे उपड़ तको लटा कर रहा है बढ़िया चीज लटक रही है चलो इसी को पकड़ की उपर चड़
00:22जाते उसको पकड़ के चड़ भी गए और
00:25सोई पड़ी जन्जोड के जगाए बोले मैं आगया बोली आ तो गए आ कहां से गए मुख्य द्वार तो उधर
00:29है बोले मैं खिड़की से आया बोले तुमने हमारे लिए ही तो हमारे स्वागत के लिए ही तो दुपट्या नीचे
00:35डाला होगा उसी को पकड़ के चड़ए बो
00:55तामई जैसी प्रीति तैसी जव श्री राममा होती नतव भवभीती
01:00मैं एक साधारन इस्तिरी हूँ आप जितनी मुझ में प्रीति दिखा रहे हो मैं उसकी हकदार नहीं हूँ इतनी प्रीति
01:09अगर आपको राम से होती तो आप भवसागर तर जाते
01:11अगरे इस हार्ड मास के शरी से जितना प्रेम आप करते है न उतना ही प्रेम यदि आपने श्री राम
01:17से किया होता तो आज ये भवसागर पार कर जाते तिकार है ऐसे प्रेम पर
01:23और ये उन्होंने सुना पतनी हो तो ऐसे कथा कहती है कि उल्टे पाउँ वापस ही लोट गए और उस
01:32दिन वो ना हुआ होता तो हमें रामचरित मानस न मिलती
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