00:00फेजान अब्दुल्ला कोरडिया मेरा नाम है, मैं साओधी अरबिया मक्का मदिना से आ रहा हूँ सफ़र करके, वहां कुछ यूद
00:08जैसा कुछ था नहीं, बाहर था, तुक में रियाच में के वहां कुछ बंबारिन की थी, सही सलामत हम यहां
00:16तक पोच गये, सुखा रहे हैं,
00:18गवर्मेट ने सब कुछ गया था, एरपोट बंद थे, दो चिन दिन बंद रहे हैं, तुक में अमारी 28 तारिक
00:26की फ्लाइट थी, फिर कैंसलों के 1 तारिक की आई, फिर कैंसलों के 3 तारिक की आई, और फिर 4
00:33तारिक, नहीं, वहां पे तो कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, �
00:35न्यूस में लगादार गवर्मेट की सुतना मुझब न्यूस ने देखता रहे थे, एरपोट तक हम गए नहीं थे, समाचार में
00:43सुन लिया के एरपोट बंद हो गया है, फिर टिकेट ने ओटोमेटिक ली फ्लाइट कैंसलों हो गया है, बहुत खुसी
00:49हो रही है, बस आज हम
00:51अपने देश वापस आ गया, नहीं सरकार द्वारा रयास किया गया, उसने अलजन्टली दो तिन दिन ने सारे फ्लाइट प्रेद
00:58दी, बहुत फ्लाइट चलो हो गया, इंडिया की बहुत सुक्रिया सरकार का दन्यावाद।
01:21गया है, और फ्लाइट बन थी है, और हमारे हमने यहाँ भी बात कि थी, और हमारे घरवालों ने भी
01:27बात कि थी, वह बोला था कि बहुत अच्छी सिस्टम थी है, हमको ले के आए गया है, सरकार का
01:35बहुत बहुत प्लाइट नाम सानिया मुश्टक भाई मलेख है, मैं वडो�
01:51जब वहां पर एरपोर्ट पर पहुंचे हमको बताया गया है कि जिद्दा से आपकी फ्लाइट कैंसल हो गई है
01:55मगर फिर हमको वहां से वीजा कंपनी वाले आए और हमको अच्छे से अच्छी होटल में मक्का का जो होटल
02:01है वहां पर हमको रखा गया था
02:03खाने पीने के साथ में हमको जो फैसिलिटी थी वो भी प्रोवाइड होई थी
02:06यहाँ पर हमने इंडिया में देखा न्यूज में ऐसा बता रहे थे कि हजी बहुत परेशान है
02:10बस में रो रहे हैं कि हमको वापस बुला लो ये कर लो वो कर लो
02:14ऐसा वहाँ पर कोई भी खौफ का डर का माहूल नहीं था हम लोग सब अच्छे से वहाँ पर थे
02:19बस हमको ये बताया जा रहा था फ्लाइट डीले हुई है थोड़ा सा सबर कर ले उसके बाद में आपका
02:24रास्ता खुले का तो आप अपने मुल्क जा सकते हैं
02:26वहाँ पर जो है वो सिक्यूरिटी काफी जादा थी हम हाजियों के लिए चाहे वो बस में आ रहे हो
02:31या टैक्सी में आ रहे हो हमको सही सलामती से हमारे मुकाम पर हमरी होटल पर वापस से पहुचाया जा
02:36रहा था
02:56खौफ में जी रहे हैं लोगों को वापस आना है लोग रो रहे हैं ऐसा कुछ भी नहीं है वहाँ
03:00पर पहले मक्के में गए फिर मदीना में गए वहां बहुत अच्छा खाने में पीने में कोई बात की तकलिप
03:08नहीं थी जैसा हा था ऐसा ही हाँ तक हम लोग आए
03:15हमको तो हमको तो खबरी नहीं पढ़ रही जैसे यहां फिलाइट बंद हुई है नास्ता मिला वक्तियारी मिली सहरी मिली
03:22अच्छी तरियों साहे
03:23मेरा नाम शारुक शेक है हम लोग मदीना गएते मक्का शरीफ उम्रा करने अलहम दो इल्ला बहुत अच्छा माहूल है
03:29वहाँ पर कोई तकलिफ नहीं है बहुत शुकून का माहूल है बहुत अच्छे से जारत करी बहुत अच्छे से हम
03:34लोग नहीं है जो भी हम लोग दरगा
03:37गए ते वो दरगा गए, मदिना सरीफ की भी मुकम्मल जा रहा हुए, कोई डर का माहुल नहीं है, बहुत
03:42सुकून से फ्लाइट कैंसल हुई थी, तो थोड़ी तकली पड़ी तीन-चार दिन हम लोगों को ओटलों में रहना पड़ा,
03:47श्टे करना, पड़ा, खाने पीने में थ
04:01कर रहा हुए, लेकिन ऐसा कुछ था नहीं वहाँ पे, बहुत अच्छा माहुल था माता, बहुत सुकून से अम लोग
04:05ने जारत वगेरा भी की, जब यूद का माहुल स्टार्ट हुआ, उसके बाद भी हम लोग अच्छे से वतलब जारत
04:12कर रहे तो कोई तकलीफ नहीं थी, �
04:16अच्छा माहुल था, बहुत सुकून है, बहुत सुकून है, थैंक्स फॉर, थैंक्यू, थैंक्यू, थैंक्यू
04:44हुआ थैंक्यू
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