00:11कोरकपुर की इस है थ्यासिक खोलिका दाहम समिति के सोभायात्रा कारेकरम में
00:22आज केस सोभायात्रा का सुभारम बकरने के लिए यहां पर उपस्थी
00:31काली बाड़ी के महंत सिरविंद्र राज जी माराज
00:39गोरकपुर के लोकप्रियसांसर और जिनकी मधुर बाड़ी में आप लोगों ने भी हो ली कि कुछ अधुरी की सुने है
00:57गोरकपुर के महापुव डॉक्टर मनलेश सिरवास्तो जी
01:04गोरकपुर ग्रामेड से लोकप्रियरिदाया से विपिन सिंग जी
01:14भारती जन्पा पार्टी के प्रदीश की उपाध्यक्स बिधान परिशा सदस्से डॉक्टर धर्मेंद सिंग जी
01:24आज की से कारिक्राव में पस्ति
01:31खौनिका दहन समितिकी अध्यक्स सिराम प्रकाश गुप्ता जी
01:37सयोजग सियासिष गुप्ता जी
01:44बंचिका संचालन कर रहे सिसंदीप सर्मा जी
01:50भारती जन्पा पार्टी महानगर की सयोजग
01:55सिराजेष गुप्ता जी
02:01आज केस सुभायात्रा कारिक्रम के उसर पर उपस्ति
02:08महानगर के हमारे सभी गणमान्य नाकरिकर्ण
02:14विभिन सामाजिक प्यापारिक संवट्मों के पतादिकारिगर्ण
02:18और उपस्तित बैन और भाईयों
02:22भोले का उत्सो प्रारंब हो चुका है
02:28आज देरात्री में होलिका दहन का करिक्रम संपन होगा
02:38होलिका दहन के सोभा यात्रा के आउसर पर मैं
02:42आप सभी उपस्तित महानभावों का सज्जनों का
02:51महानगर वाशियों का जन्पद वाशियों को
02:57और पुरे प्रदेश वाशियों को
02:59होली की हिर्दे से बढ़ाई देता हूँ
03:02अपनी सुपकामनाई देता हूँ
03:06मैं इस होलिका दहन समीति के प्यदादी कारियों को
03:10मैं पिसेश रूप से बढ़ाई देता हूँ
03:12जिनकी सताप्ति वर्स चल रही है
03:15यहने सो वर्स की अपनी यात्रा को
03:18अनुवरत रूप से कमीटी आगे वढ़ा रही है
03:22मैंने बढ़ाई देता हूँ
03:24और इनके पूर्व अध्यक्स से पटवा थे
03:30बहुत समर्पित कारे करता थे
03:33आकस्मिक निधन उनका हो गया था
03:35मैं उनको इस उसर पर बिनम्र सर्धान जली भी देता हूँ
03:42बैन और भाईयों
03:46अविवस्था से विवस्था
03:51अराजक्ता से अनुसासन
03:56अधर्म से धर्म
04:00और असत्य से सत्य की यात्रा जब होती है
04:05तभी हम उपद्रों से उपर करके
04:09उच्सों की सोवयात्रा का हिस्सा बनते हैं रही उच्सों आज
04:17गुरकपुर के अंदर
04:20इस विरासत गल्यारे के अंदर
04:24खोले का दहन समित की सताप्ती महत्सों के उसर पर निकलने वाली सोवयात्रा के उसर पर देखने को मिल्ला है
04:34हम गत्वर्स तक भी आते थे संक्री गली हुआ करते थे एक बाहन बामुस्किल जा पाता था
04:46ब्यापार अस्त प्यस्त था ग्रहक नहीं आपाते थे
04:55अब विवस्ता कासा सामराच्य था
04:58और यहां के बैपारियों को तो नुक्सान होता ही होता था
05:01लेकिन उनके कारण काली बाड़ी के बाबा को उनसे ज़्यादा नुक्सान हो जाता था
05:09लेकिन अब
05:16मैं इस बात को मान सकता हूँ कि
05:20जब यह गल्यारा बन रहा है और जिस दिन बन जायेगा यह गोरकुर का सबसे खुपसूरत गल्यारा होगा गोरकुर का
05:30हम लोगों ने बंदु सिंघ पार्क में कुछ दुकाने बना के देनी हैं और वागी दुकानों को बनाने की लिए
05:37भी हम लोगों ने जग्वी चिनित कर दिया उसके लिए पैसा भी अलॉड कर दिया
05:43जो यहाँ पर डाइट कॉलेज के पास एक नया कॉंप्लेक्स तैयार होना है
05:54दिखें किसी को जाड़ना नहीं वफन पुल सके उसके सामने आउसर आ सके उसका प्योसा है आगे बड़ सके
06:08वह रवी की संतों कहीं भी नाचगा करके पैसा कमा सकता लेकिन काले बड़े के बाबा कहा से कमा
06:18जब आपकी संब्रिती होगी तभी बाबा के पास भी कुछ आएगा और इसीलिए
06:28इस गल्यारे को बिसेश रूप से कोरकपुर का पुराना कोरकपुर है
06:34पहले यहीं से पूरा पूर्वियुत्तर प्रदेश का ब्यापार संचालित होता था
06:42गोरकपुर, बिहार, मैपाल के अंदर बड़े पैमाने पे लोग इसी पांड़े हाता में आकर के
06:48साधी ब्याव से जुड़िवे सभी सामान खरीते थे
06:54लेकिन जब कंजिसन हुआ, भीड़ भाड हुई, संक्री कर लिया हुई, जाम हुआ, ब्यापार उजड़ने लग गया
07:04मांग के इन रूप सुविधा नहीं दे पाए, और अब डवल इंजन की सरकार, वो सुविधा भी दे रही है,
07:15सुरक्सा भी दे रही है
07:19और सुविधा और सुरक्सा का पैड़ नाम क्या है, कि इनके जीवन में तो खुछाली आएगी, गोरगपुर बिकास करेगा, प्रदेश
07:29बिकास करेगा, प्रदेश बिकास करेगा, तो देश बिकास करेगा
07:36बिकास की काई उपर से नहीं आखी बिकास नीचे से उपर जाता है
07:43सरकार योजना बना सकती है
07:46और मैं धन्यवाद लूँगा विरासत कल्यारे से जुड़े वे सभी ब्यापारियों को
07:53यहां के नागरिकों को
07:56उनके मन में पीड़ा जरूर थी
08:00लेकिन उन्होंने ब्यक्त नहीं किया बन्कि सयोग किया
08:03राजुसी का प Porsiak में कितना सानदार कल्यारा
08:06मैं भी जैसे मैं यहां प्रवेश किया तो
08:10मैं सुयम पैचान नहीं पा रहा था
08:12मैंने काली-बढ़े के बाबा से पोछा
08:14मैंने का हम लोग कहां आ रहे हैं पाड़ी हाता कहा है
08:17बाबा ने का यही है
08:19मैं समझा कि ऐसा तो नहीं है कि बाबा जो है डोसा खिलाने के लिए काली बड़ी निधा है
08:26यह देख कि उन्होंने कभी खिलाया नहीं लेकिन मैं सुनता हूं कि खिलाते हैं
08:33बाबा ने कहा नहीं यही है पांडे हाता का मारग
08:37देखो पहले की तुर्णा में तीन गुना ज़्यादा चोड़ा हो गया है
08:42देखो नो किता सांदार लग रहा है
08:44और अभी यहां पे भसाड़ भी काईदे से आजाएका नो
08:47एक जैसा कलर एक जैसी डिजाइन के साथ
09:01विरासत का संग्रक्षन आप परव और त्योवारों के मात्यम से भी करते हैं होली
09:08सो वर्सों से यह होली का दहन समिती
09:13इस सोभा यात्रा के मात्यम से अपनी विरासत का संग्रक्षन कर रही है
09:21दिपावली हर घर में मनाई जाती है
09:25सरकार के सयोग किया हो सकता नहीं है
09:27इस होली के कारिक्रम में
09:29सरकार नहीं सयोग करती है
09:31लेकिन सुताइस पूर्थ भाओं के साथ
09:33हजारों की संख्या में
09:36लोग अपने पर्व और तेभार का हिस्ता बन करके
09:39सोक आनंद लेते हैं
09:42आपा धापी की युग में
09:44को समय conservative उत्सा से, प्रेम से मिल सके, इससे ज़्यादा की बात किए हो सकती है, कोई तनाव नहीं,
09:54कोई उपत्रव नहीं, कोई भेह नहीं, कोई अराजेपता नहीं, कोई बुल्टागर्दी नहीं, यह तो नामराज्य है,
10:07सब को सुरक्षा का एसास है
10:10सब को विश्वास है
10:11एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव है
10:16और यही यही रामराज्य की अवधारणा है
10:21और प्रधान मंत्री जी इसी बात को लेके कहते हैं
10:24कि जब इस प्रकार की स्थिति आएगे
10:26तो भारत को विक्सित भारत और आत्म निर्वट भारत बनने में कोई देव नहीं लगने बाने हैं
10:36और यही इस्तिफी पैदा करने के लिए ये कारे चत्ता है बहुत सीकर ये कारे जब होगा अब देखना
10:44सांदार गल्यारा जो भी जाएगा दौरों के नगूती करेगा
10:48यहां का ब्योसाइप फिर से पन पेगा
10:52कुछ लोगों के वही पर परतिस्तान दुकाने आ गए लेकिन कुछ लोगों को जहां पर वहां जगे कम हो गई
10:57थी नहीं मिल पाया
10:59बंदु सिंग पार्क में और यहां पे नॉर्मल में जो हम लोग कॉंपलेक्स बनानी जा रहे हैं
11:06यहां पे उनको भी तुकाने उपलबते करवाएंगे
11:08और मैंने ये भी कहा है
11:12तुकान का किराया इतना रखना कि हर ब्यापारी उसको बहन कर सके
11:16कि बहुत ज्यादा गिराया भी मत देना ऐसा नहीं कि लोग ज्यादा आवेदन करते तो उसमें काली बाड़ी की बाबा
11:24कि दर रेड़ बढ़ते जाए रेड़ बढ़ाना बत उसमें
11:29और इसलिए अच्छे डंग से कारिक्रम हमारे हो भूली का इत्यवार हम सब को इस बात का इसास करा रहा
11:38है
11:40कि परव और त्यवार हमें तब आनंद का उसर देते हैं तब सांती होती है सोहार तो होता है
11:49आज पूरी दुनिया की अंदर उपद्रव है राचकता है अभिवस्ता है छीना छक्ती है लेकिन हम सब भारत वासी गौरव
12:01के नभोती कर सकते हैं
12:02भारत का इससी नित्रत प्रथान मुंत्री मोदी जी के नित्रतों में भारत को विकास की नई बुलंदियों के और पहुंचा
12:09करके नए भारत का दर्सर हम सब को करा रहा है यह नया भारत
12:16जा आउसर भी है और उत्सो भी है
12:20हर वेक्टी के लिए, हर तब्के के लिए
12:22क्या लौजवान हो, क्या बुजर्ग हो
12:25क्या महलाएं हो, क्या फुरुस हो
12:28क्या नदाता किसान हो, क्या ब्यापारी और उत्यमी हो
12:32समाज के हर वेक्टी के लिए आउसर है
12:37और आउसर के साथ-साथ पर्व और त्यवारों की एक लंबी स्रिंखला
12:46उत्सो के रूप में हम सब के पास है
12:502014 के पहले उत्सो नहीं मनाई जा सकते थे
12:54नहीं मनाई जा सकते थे
12:57उत्तर प्रदेश में तो पर्व और त्यवार के पैदे कर्फियू लग जाता था
13:02कितना अतनाव रहता था
13:09सरकारे समाज को बांटी थी उस समय
13:16और बांटे का जो पाप करती थी उसका पेड़ाम
13:20व्यापारी को देना होता था
13:22नागरी चुकाते थे
13:26पर और तेवार के पहले कर्फ्यू लग जाता था
13:30गुंडागरती चरम पर ना बेटी सुरक्सी थी ना व्यापारी सुरक्सी था
13:36लेकिन आज
13:40ना कर्फ्यू है और ना दंगा
13:43अब तो यूपी में है सब चंगा
13:48अब सब और उत्सव है
13:51पुरे प्रदेश भर में उत्सव
13:53पिसले पंदरा दिनों से मतुरा बिंदावन में होली का कारिक्रम चला है
14:01अलग अलग अस्तानों पर
14:04गोकुर में बरसाना में नंदकाओं में
14:07बलदेव में गोवरधन में
14:10मतुरा में
14:14लाखों की संख्या में परसाना में जिस दिन होली थी
14:17दस लाख से दिक लोग वहाँ आए थी सोली के उत्सव में
14:20दस लाख से दिक
14:23नंदकाओं में यही
14:26भारी भीड उमर रही है
14:30कोकुल
14:33ब्रिंदावन
14:34गोवरधन
14:35बलदेव
14:37मतुरा यह लंदी स्रिंखला
14:39होली खेलने के लिए
14:41और यह सोता होता है
14:43सरकार कोई सयोग नहीं करते
14:46सरकार के उस सयोग
14:47सुबिद वहाँ पर विवस्ता बनाने में युगदान देती
14:50बागी लोग सोता आते हैं
14:53उत्सो कानंद लेते हैं
14:56विदेशियों की आँखी फटी की फटी रह जाती है
14:59इतने अच्छे उत्सो
15:02क्या मिलना है
15:04जो लोग हम पे आरोप लगाते थे
15:09क्या हम पटे हुए है
15:12कहां पटे है
15:14कहां भी भाचन है
15:17यह हजारों की संख्या मेर सर्दा
15:19यहां पे लोग होली खेलने के ले आए है
15:21होली का दान की सोभा यात्रा में भाग देने के ले आए है
15:26किसी की जाती का पता नहीं
15:29सारे लोग मिलकर के एक साथ
15:33होली का आनंद ले रहे है
15:37होली के आनंद के साथ
15:39इस सोभा यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं
15:44हजारों वर्स पहले कभी होलिका का तहन हुआ होगा
15:49हजारों वर्स पहले
15:52हिर्ण कस्यप का वद्वा होगा
15:55लेकिन आज भी
15:57हमें याद रखना होगा ये होलिका
16:01प्रश्टा चार के रूप में
16:03अभिवस्ता की रूप में
16:05अराजक्ता की रूप में
16:08जहां कहीं भी है
16:11इस भरश्काचार रूपी
16:14अराजक्ता रूपी
16:15अभिवस्ता रूपी
16:16उपद्रो रूपी
16:18इस भोलिका को दहन करने के लिए
16:21हम लोगों को हमेशा तैयार होना होगा
16:28यहिंद कस्यब जो माफिया की रुप में पनपा रहा होगा कभी आतंगबाद के रुप में रहा होगा उक्रमाद के रुप
16:36में रहा होगा
16:40उस समय भगवान विष्णों के अवतार नर्शिंग अवतार ने अवतरी भोकर के हिनकस्यब का वद किया था
16:52इस धर्टी को धर उम्मे करने के लिए सत्य और उस समय के समाज को सही दिसा देने के लिए
17:02याद करना, अविवस्ता, अराजक्ता, गुंदा गिर्दी, माफिया गिरी, जवरन हडपने की प्रवर्टी
17:14ये जब भी होगी वे सब भी हिनकस्यब जैसे ही है
17:20ये प्यार से नहीं मानेंगे क्योंकि लातों के भूद बातों से नहीं मानेंगे
17:29और उनसे निपटने के लिए हिनकस्यब को मारने के लिए, रावन को मारने के लिए, कंस को मारने के लिए
17:42किसी न किसी नर्शिंग को, किसी न किसी राम को, किसी न किसी गृष्ण को आउतरित होना पड़ेगा
17:52तब बिवस्ता बनेगे, समाज में सजनों का संगक्षन हो पाएगा
17:58दुर्जन जब समाग तो होंगे, सदाचार और उत्सा का ये वातावन हम अब सब के जीवन में देखने को मिलेगा
18:08आज ये घुलिका दहन का करिक्रम होगा और मैं पीर करूंगा गुरपुर वास्यों से, प्रदेश वास्यों से
18:16घुलिका दहन हम करें, बुराईयों को जलाएं
18:22हर प्रकार की बुराई को, अविवस्ता को, रस्ताचार को, नकारात्मत्ता को जलाने का एक आउसर है
18:32हम उसके साथ औहंकार को जलाएं
18:40और याद करना होली का दहन
18:44किसी के घर के सामने ऐसी जगे पे नहो जहां से घर को नुकसान हो सकता
18:51किसी परतिष्टान के सामने नहीं होना चाहिए
18:54उससे दूरी थोड़ा दूरी बना करते है
18:58लेकि परवर्तिवार का अनन्द तभी है जब दूसरे को ठेस पहुचाए बगर
19:04नुकसान पहुचाए बगर उत्सा के साथ हम उसका अनन्द ले सके
19:13उत्सा का अनन्द तभी होता है जब हर गरीब
19:16हर नागरिक
19:19खुसी के साथ छूम कर कि उस उत्सा का हिस्सा बन सके
19:23भेवीत न हो
19:25उसके मन में भे न हो
19:28किसी प्रकार का
19:30कोई पुंठा न हो
19:33और होली का दहन के अस्तव भी
19:35हम उसी प्रकार से त्यार करें
19:38घर से दूरी पे हो
19:42परतिष्टान से दूरी पे हो
19:48होली के गानों को
19:49होली के रूप में गाते वे
19:51हम एक कारिक्रम करें
19:56अगने देव की पूजा करें
20:01सृष्टिके रचियता भगवान विश्णु का स्मौन करें
20:06नरसिंग आवहान, नरसिंग अवतार का आवहान करें
20:10और ये करक्रम उत्सा के साथ हो लेके गाने में गाते भी गाएं
20:16असलील गाने नहों, याप करना जब भी किसी गाने में असलीलत आएगी
20:22वो पतन की ओर हमें लेके जाता है
20:25हमारे परो और देवारों के महतों को कम करता है
20:31असलीलत आनी होने चीए, परिवार के साथ लोग आ करके बड़करमा कर सके होने का दानस्तर
20:38हर बेटी, हर व्यापारी, हर नागरिक, हर बहन अपने को सुरक्सित मैसूस कर सके है
20:45ऐसा माहोल हमें करना होगा, तयार करना होगा
20:49कल विराम रहेगा, क्योंकि देरात्री से चंद्र गहन लगना शुरू हो जाएगा
20:59कल होली नहीं होगी, परसों होली का उत्सों का कारेकरम होगा
21:04होली का उत्सों कारेकरम में भी रंग और गुलाब का प्योग करें
21:07कीचर नहीं, केमिकल का नहीं
21:12आँखों पे न डालें
21:16जब रंग किसे पे नहीं डालना है
21:19कोई बिमार होगा, कोई बुज़ुर्ग होगा, मासूम बच्चे होंगे, किसी के घर में कमी होगी, वहाँ नहीं खेलना चाता है,
21:30जबरन नहीं करना है, लेकिन बैर भाव दूर करें, जैसे होली का कारिक्रम था,
21:38काली बाडी की बाबा और रविकिसन जी में 36 कांकड़ा था, दोनों मिलकरती मंच पर एक साथ आगए, आज दोनों
21:45आगए, दोनों गले मिल्दी, और इसलिए ऐसे ही कोई भेदभाव नहीं होना है, कोई मुनमुटाव नहीं होना है, अच्छे डंग
21:55से, उत्सापूर तरीके स
21:58होनी तो समरस्ता का परव है, हर प्रकार की बेर भाव को घुलाने का परव है, और इक परव हमें
22:07स्मर्ण कराते हैं समाचिक एक्ता की, जब समरस्ता होगी तभी एक्ता होगी,
22:15जब एकता होगी तब ही अखंडता होगी
22:19और इसको बनाए रखने के लिए हम सब को मिलकर के कारे करना है
22:23मैं आपको इस आउसर पर कुरी प्रदेश वासियों को घरदे से बधाई देता हूँ
22:28ग्रासत गल्यारा से जुड़े वे
22:31इस सांदार पांडए हाता में आज हम लोग इस उट्सव के साथ जुड़ेवे हैं
22:37इसकी सूप कामना देता हूँ
22:39अपनी मंगल में कामनाफ सब को देता हूँ
22:42परदेश वासियों को देता हूँ
22:44और यहां के सभी उद्यमी ब्यापादी और यहां के नाक्वीकों को
22:48इस विरासत गल्यागा के लिए उनके योगतान के लिए
22:51हिर्दे से उनका बिनंदन भी करता हूँ
22:53और उन्हें इस बात के लिए अस्वस्त करता हूँ
22:56की वे सबी लोग सांधार तरीके से रहेंगे उनको अच्छे शुविधा से युगत सरकार करेंगे हर परकार करेंगे आप सब
23:07की प्रति मेरी मंगल में शुब कामना हैं मेरे साथ आप बोलेंगे भारत माता की जैस्री राम
23:19जैस्री राम नर्सिंग भग्वान की नमा पारवती पतिये आप अबे
23:49झाल
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