00:08ुलच्टे सुलच्टे धाकों में उडिसा की सतियों पुरानी विरासत छिपी है
00:13तस्वीर में दिख रही ये साथगी दरसल एक बड़े बदलाव की गवा है
00:17बरगड के बरपाली गाउं की रहने वाली सुलोचना महर यहां केवल धागे नहीं सुलजा रही
00:23बलके ग्रामेंड महिलाओं के लिए आत्म नर्भरता का नया रास्ता बुन रही है
00:28कभी पिता ने जिस काम को कठिन मान कर उन्हें इससे दूर रखना चाहा
00:32आत्सुलोचना उसी हुनर की सबसे बड़ी उस्ताद बन चुकी है
01:11साल 1997 में एक दरजी से शादी करने वाली सुलोचना ने जब ससुराल में करगा समहाला तो उनका मकसद सिर्फ
01:19रोजी रोटी नहीं
01:20बलकि लुप तो होती संबल पूरी कला को बचाना था
01:24जिला प्रशासन से डिजाइनर ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने पीछे मुड कर नहीं देखा
01:29आज उनकी जादूई उंगलियों का कमाल है कि साची पत और मंजूशा जैसी पारमपरिक साडिया यहाँ फिर बाजार की शान
01:37बन गई है
01:41सुलोचना की सफलता का सबसे बड़ा प्रमान साल 2008 में मिला
01:45जब ओरीशा के ततकालीन राजिपाल उनकी बुनी साड़ी देखकर मंत्र मुप्त हो गए थे
01:51उस एक शाबाशी ने सुलोचना को नैशनल ट्रीनर बना दिया
01:55साल 2023 में उन्होंने लेहला दाख जाकर सेना की 50 महिलाओं को बुनाई सिखाई और अब तक वे 1000 से
02:03जादा महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा कर चुकी है
02:35मिशन शक्ति और जिला प्रशासन के सहयोग से आज सुलोचना महर न केवल एक सफल उद्दमी है बलकि नारी शक्ति
02:43का वो चहरा है जिन्होंने शुन्य से शिखर तक का सफ़र तै किया है
02:47उनकी ये कहानी सावित करती है कि अगर इरादे फॉलादी हो तो एक करगा भी पूरी दुनिया में नाम कमा
02:54सकता है
02:55ETV भारत के लिए संबलपूर से बादशा जुस्मान कुमार राना की रिपोर्ट
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