00:00ये सूतक काल, अगर हम सामान्य शब्दों में से समझें, क्या है सूतक काल, कब से कब तक ये है,
00:07क्या चीजें उसमें करने के लिए आप कहेंगे लोगों?
00:12देखे, श्विता जी, मैं आपको थोड़ा गणित के माध्यम से ग्रहने को समझाने का प्रयास करता हूँ,
00:18ये सार्धानी, खट, सहस्त्रानी, योजनानी, बिवस्चताह, और बिसकंभो, मंदलस्चेंदो, तथा, शीत्या, सताधिकां, ये है, श्लोक है, ग्रहन से संबंधित है,
00:32और इसको आप गणित के माध्यम से समझें, कि प्रत्वी से जो सूर की दूरी है, वे 6500 योजने, जो
00:47स
00:48भूकरण है, ये है 1600 योजन, यानि 16 योजन है, इसके बाद जो चंद्रमा का भिंब़ है, वोे 480 योजन
00:57है, तो अब आप देखिए कि सूर्य भिंबब से प्रत्वी का भूकरण कम है, छोटा है, और प्रत्वी के भूकरण
01:05से चंद्रमा का जो गोलाकार है, वह कम है, अब �
01:09ऐसी इस्थिती में अपनी पूर्व गती से सभी ग्रहों की अपनी अपनी गती आए ये पूरा जो ब्रह्मांड है यह
01:18360 अंसों में बिभाजित है और पूरे 360 अंस की इस पूरे ब्रह्मांड को जिसको हम क्रांती वरत कहते हैं
01:26यह क्रांती वरत 12 भागों में बटा हुआ है जि
01:39प्रत्वी की परिक्रमा यानि अपनी प्रत्वी पर जो है अपनी धूरी पर चक्कल लगाती रहती है अपनी पूर्वगती से भ्रमण
01:47करता हुआ
01:48चंद्रमा जब प्रतिवी के भूछाया में प्रवेश कर जाता है तो वह चंद ग्रहन का योग बनता है अब चंद
01:56ग्रहन की स्थिती यह है कि वह जब चंद ग्रहन का योग बनता है तो वह तीन प्रहर तीन प्रहर
02:04अपनी पहले से ही और सूतक का योग बना देता है तीन प्र
02:16अर्थात प्रातह काल के 6 बज करके 20 मिनट से सूतक काल आरंफ होगा और जब तक घ्रहन का मोक्षयं
02:25होता है
02:26मध्यानकाल में जिस प्रकार में आपको बतोगाई कि घ्रहन का समय सायंकाल के 3 बज कर 20 मिनट से हैं
02:32और ग्रहन का जो मद्ध काल है वह 4 बज़ करके 34 मिनट से ले करके 5 बज़ करके 33
02:40मिनट तक रहेगा और ग्रहन का जो मोक्ष काल है वह 6 बज़ करके 47 मिनट में जा करके स्वाप्त
02:47होगा
02:48तो इस प्रकार से यह पूरा गणित है और आपको बतला दू कि ग्रहन निश्चित रूब से प्रभावित करता है
02:55और मैं गणित के माद्यम से आपको समझा सकता हूँ कि ग्रहन किस प्रकार से सामान लोगों की तो बात
03:01छोड़ दीजिए गर्व में पल रहा जीव भी ग्रहन क
03:05के प्रभाव से प्रभावित होता है इतना अधिक उसका प्रभाव होता है कि वह गर्व में पलने वाले जीव को
03:11भी नहीं छोड़ता है इसलिए गर्वतिस्त्रियों के लिए भिशेश नियमों का वरणन शास्त्रों में किया गया है और मैं आपको
03:19बतला दू कि ग्रहन किस �
03:20से पढ़ते हैं इंद्राल पे संभवोग यहा दसाल पे निश्चयों मता हमारे शास्त्रों में जोतिस शास्त्र में क्योंकि है विज्ञान
03:30है और यहां पर गणित का पूरा समी करण है जब केतू और चंद्रमा की दूरी 14 अंस के अंदर
03:40आ जाती है इस पस्ट गती के इस प
03:44भावना बनती है और लेकिन जब वह इस पस्ट 10 अंस से भी कम हो जाता है तो गरहन निश्चित
03:51रूप से पड़ेगा ऐसी इस्थिती बनती है और हमें सा जब सूर गरहन या चंद गरहन पड़ता है तो सूर
03:58और चंद्रमा में
03:59छे राशियों का अंतर रहता है चंद्रमा एक सो असी अंस में होता है और जब सूर ग्रहन परता है
04:06तो चंद्रमा और सूर दोनों एक ही राशी के एक ही अंस कला विकला में आकर के इस्थित हो जाते
04:12हैं तो यह कह देना ग्रहन के वास्तविक ग्रणित को ज़िए आप सूर शि
04:29रहने वाला प्रत्येक जीव आकास मंडल में गोचर करने वाले हमारे ग्रहों की गती के आधार पर ही प्रभावित होता
04:37है चाहे वह मनुष्य है चाहे पक्षी है अंडज है श्वेदज है उद्भीज है जरायुज है ऐसा कोई व्यक्ति नहीं
04:45है जो की ग्रहण के प्रभाव स
04:47प्रभावित रहो अर्थात आकास में गोचर करने वाले ग्रहों से प्रभावित रहो ऐसा नहीं हो सकता है
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