00:00माम आप इतनी देर तकıs ऑफिस कैसे बानच कर लेती हैं? घर कौन संफालता है?
00:05एक सीनियर महिला मैनेजर से पूछा गया ये सवाल सुनने में शायद छोटा लगे, लेकिन इस एक लाइन में भारत
00:13के कॉर्पोरेट बोर्ड्रूम की असली कहानी चुपी हुई
00:16चमकते इमारते, क्लास के केबिन्स हैं, बड़े बड़े टाइटल है, सब कुछ modern और advanced दिखता है
00:22पर तस्वीर बदलती है जब उसी boardroom का chair count सामने आता है
00:26अभी जिस सवाल का जिक्र इस वीडियो के शुरुआत में मैंने किया था
00:31वो बस इसलिए नहीं कि हम कुछ दावे करना चाहते हैं या कोई थियोरी आपके सामने रख रहे हैं
00:35वो इसलिए कि हम facts आपके सामने रख रहे हैं
00:39Corporate India की चमकदार इमारतों के पीछे एक खामोश सच्चाई चिपी हुई है
00:44जो हाल ही में सामने आई KPMG और AIMA की एक report
00:49Women Leadership Inc. इंडिया 2026 के आखड़ों में
00:54200 से ज्यादा professionals के सर्वे पर आधारत इस report में
00:5962% women यानी 62% महिलाएं और 38% पूरुष शामिल थे
01:05अलग-अलग sectors, education से 21% इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस
01:10manufacturing से 15% financial services से 12% ये data इन सारे sectors से लिया गया
01:16तस्वीर साफ निकल कर आई, बदलाव हो रहा है लेकिन बहुत थीमा
01:20अगर 10 लोगों की leadership की team है तो औसतन सिर्फ दो महिलाएं
01:25उस टेबल पर बैठती है
01:262024 में 35% organizations में 30% से ज्यादा महिलाएं leadership role में थी
01:332026 में या आखड़ा बढ़कर 44% हो गया
01:37सुनने में progress लगेगी लेकिन पूरी तस्वीर देख लीजे एक बार
01:4146 वीसिदी कंपनियों में महिलाओं की हिस्सदारी अब भी
01:4510 से 30 स्वीसिदी के बीच अटकी है
01:4810 स्वीसिदी organizations में top level पर एक भी महिला नहीं
01:51और पिशले 5 सालों में 30 स्वीसिदी कंपनियों में कोई सुधार नहीं हुआ
01:55कुछ में तो बलकि किरावट आ गई है
01:57अब सबसे बड़ा मित सुनिया
01:59महिलाएं खुद आगे नहीं बढ़ना चाहते
02:01रिपोर्ट इससे सीधे खारच कर रही है
02:04उन्या से फीसिदी यानि 79%
02:06विमन लीडर्शिप रोल्स चाहती है
02:0952% सी सूट
02:11यानि CEO, CFO जैसी
02:13पोजिशन तक पहुँचने का सपना देखती है
02:15यानि महत्व कांग्शा की कमी नहीं है
02:17कमी है रास्ते की बराबरी में
02:19इस रिपोर्ट में एक इंपोर्टन फ्रेज है
02:22ब्रोकन रांक
02:22यानि पहली प्रोमोशन की सीड़ी
02:25जहां से करियर की असली रफ्तार शुरू होती है
02:27यहीं सबसे ज्यादा फिसलन है
02:30भारत में 74% और्गनाईजेशन में
02:33लंबे समय से काम कर रही
02:35महिलाओं में से 30% से भी काम
02:37लीडर्शिप तक पहुँच रही है
02:38कई जगा यह आकरा 10% से भी कम है
02:41जबकि पुर्शों में 68% और्गनाईजेशन ने माना
02:45कि 30% या उससे ज्यादा पुरुष लीडर्शिप तक पहुँच चाते है
02:49शुरुआत बराबर लेकिन आगे बढ़ने की रफ्तार अलग-अलग
02:52मिट केरियर वो दौर है जहां सपने और जिम्मेदारियां टकराते है
02:5665% लोगों का मानना है कि इसी इस्तर पर महिलाई सबसे ज्यादा बाहर हो जाती
03:0148% ने work-life balance और burn-out को सबसे बड़ी चुनौती बताया
03:0638-40% ने परिवार और caregiving जिम्मेदारियों को वजह माना
03:1124% ने gender bias का नुभव किया है
03:1449% महिलाओं ने स्विकार किया कि उन्हें उनके workplace पर भेदभाव से देखा गया
03:21या फिर उन्होंने वो भेदभाव जहला
03:32सबसे जादा चुबने वाला आकड़ा सुनिये
03:34सिर्फ 28 वीसिदी कर्मचारियों को promotion process unbiased लगी है
03:39यानि 10 में से 7 लोगों को system पर भरोसा ही नहीं है
03:42pay parity पर भी सिर्फ 42 वीसिदी लोग मानते हैं कि salary या wages बराबर है
03:48आठमाज को women's day है और अब हमें ये तैय करना होगा कि क्या हम सिर्फ तालियां बजाएंगे तारीफ करेंगे
03:55या system भी बढ़लेंगे
03:56बराबरी की बात करना असान है लेकिन उसे लागू करना हिम्मत और साहस माग रहा है
04:01आज अगर 10 में से 2 महलाएं टेबल पर है तो ये उनकी शमता की कमी नहीं है
04:05व्यवस्था की कमजोरी है
04:07सवाल अब ये नहीं कि महलाएं तैयार है या नहीं
04:10सवाल ये है कि क्या corporate अंडिया सच में तैयार है
04:13इसी सवाल के साथ आपको छोड़के जा रहे है
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