00:00मैंने बाभी आश्रम में ये देखा कि वो एक बहुत शांदार सी बिल्लिंग है, पूरी संगमंगमेटी बनी हुई है, और
00:07उस बिल्लिंग में जो है अच्छे साजो समान है, आराईश उर्दू में शब्दिक होता है, और सुख सुविधा मेरे चाल
00:18से, बहुत अत्याधूनि
00:29महाराजी थे और वहां पर रुके थे, शायद उनकी वज़े से ऐसाओने किया है, लेकिन गीधर है, फिमिंग पूल है,
00:37इनके लिए लिफ्ट है, बताया जारा है महाराजी के लिए थी, जो बहुत स्थूल काय हो गए थे, उनके लिए
00:43वह विवास्ताई थी, लेकिन ये सब
00:45चीज़े वहां पर हैं, आपने विचित्र क्या देखा, अलग क्या है, अलग है ये मैंने का कि जो बहुत सख्त
00:52सा बच्चों के लिए रूल रेगुलेशन होनी चाहिए, सुबह सुबह उठो, वेद पाठ करो, ब्रमभूत ने पूजा करना सब को
01:02सिखाया जाए, तो इस तर
01:14मुझे नहीं मतलब लगी कि ये नॉर्मल वेद पाठी बच्चों के चीज़ें हैं ये, ऐसा है मुझे लाग है
01:21अबने कुछ महिलाओं का जिकर भीवां के किया, क्या है जब में वहां पर थी, अभी की स्थिती मुझे मालूम
01:31नहीं है, चार साल पुरानी बात है, तब वहां पर एक स्थ्री थी, वही उस मत की मालकिन थी, उन्ही
01:37के कुछ बंगलोड से रिष्टदार आई हुए थे, दो म
01:44महिला है वहां पर रह रह रही थी, जब मैं वहां पर गए थी, जब मैं वहां पर रुकी हुए
01:50हूँ जितने दिन, ये महिलाओं का जिकर है, और वो महिला जो वहां की मालकिन है, उसे मैं ये बात
01:56पूची थी, कि आप उनकी माता है, या पत्नी है, मतलब कौन है, स्वभाव
02:10जिग्यासा के तहट मैंने उनसे यह सवाल पूछा था
02:12तो उन्होंने यह बजाए दा, मैं उनकी सखी हूँ, माता और पत्नी नहीं हूँ
02:16अवे मुक्तेश्वरा अननजी से मेरी डायरेक्ट बात देखना मुखातिब कभी हुई ही नहीं हूँ
02:37यह लगातार मुझसे बात करता था, देली बात करता था
02:39तो यह चाह रहा था, मैं और रहूं
02:42क्योंकि उसको यह फाइदा हो रहा था कि यह कभी नगभी कोई ना कोई फैवर फाइनिशली ले रहा हो
02:48च्शोटे-मोड़े कई बिल है, वो देने हो
03:03कि यह तो एक सोने की मलगी है, यह तो रोज ही अंडा देगी सोने का तो इसको तो ना
03:07जाने दो.
03:08एक दिन में क्यों काट दिया जा जाए इसको.
03:24मुझे मैं घर की एडिक्टेट प्राणी हूं, मैं होमसिख हूँ तो बहुत दिन हो गए है वैसे भी मैं अपने
03:30लेखनी के लिए जितना प्रयास कर सकती हूं, कफिनतं, कफोड़तं वैसे ही मैं कर रही हूँ
03:36मेरा इतना भयंकर समय यहां मैंने लगा दिया है, मैंने उसके लिए पांच उपर्नियासों का मतेरियल जोड दिया था दो
03:44महीनों में
03:44तो मेरा रहने का कोई और अचेते बचाई में था मझे खुद बहुत बेचैनी थी वहां जाने की
03:49उनसे मेरा कोई विवार कहरे हैं तो उनसे पुछे कि आपकी मेरी कहां बाचीत हुई है यह है और जो
03:56है कि यह वेक्ति तोड़ ऐसका आच्छन जो है इसकी भाशा है उसकी कभी हाथ नहीं पकड़ा या ऐसा उसका
04:02कुछ नहीं है लेकिन उसकी भाशा है कि देखिए हम लोग प
04:17अब इस तरह की बात करेंगे ना तो फिर मुझे झाल है कि ये बात कहनी पड़ जाएगी
04:21अब उसे वह इस तरह करने है कि वह कहर ہیں ये कि रांक्षन लगा देंगी
04:24कर देंगी वह कर देंगी
04:25क्या नह Wow जन्हना सच बात नक हूँ
04:28मैं कुई भी बात दुप कर देंगी
04:47तो उनको दिक्कत आ रही है, तो अब आपको दिक्कत आ रही है, तो अब आपको दिक्कत आ रही है,
04:50तो मैं इसमें क्या कर सकती हूँ, मैं कोई सरकारी नौकल नहीं हूँ, मैं कोई मंत्री के या राजनीतिक पत
04:55पर नहीं बैठी हूँ, मैं किसी की E.A.P.A.C.A. नहीं हूँ,
05:16अगर आप लोग अंकुष लगाएंगे तो यह कैसे होगा हम दुनिया के सबसे बड़े लोग तांतरिक देश में जी रहे
05:22हैं
05:22इतनी सतन्ता तो एक रड़की को मिलनी चाहिए
05:24पत्रकार उठा रहे हैं
05:26पत्रकारों को मैं धक्का मार के निकाल दें
05:27कै दो कि भई अमेर से बात मत तरो क्यो तुम्हारी हिम्मत हुई अभी मुपतेशरा नंद इतने महांज हैं
05:32उनके खिलाफ तुमने मुलसे सवाल कैसे तूछ लिया
05:34अरे आप लोग ने भी तो यह नहीं कहा कि अभी मुपतेशरा नंद जी रेपेस्ट हैं
05:39आपे बइनिया यह मन्ती जी ऐख वाटिसरास कि आपतेशरी हैं
05:42आप सारी पत्तरकार हमें से बस बुछ रहे हैं कि
05:44वहां रहती थली ती तेढ़ने क्या तर्ज़�ilगा बताथीये प्ला की मधूद दशीया
05:52अब आप लोग आज पूछ रहे हैं क्योंकि आज मुद्दा उठ गया है, तो मैं क्या अप से कहूं कि
05:56सुझे, अभी इमात पूछीए, जब फैसला जाएगा तब पूछीएगा, तो यह तु नहीं है ना, आप पूछ रहे हैं, हम
06:01अदार हैं, आपका काम इमानदारी का है, मे
06:14पैसा भी नहीं ले रहे हैं, सिरी सी बात है, अगर देखिए, यह मेरी बिल्कुल निजी राये हैं, अगर किसी
06:21चेयर पर लांचन लगता हो ना, तो उसे बो चेयर खुद ही छोड़ देनी चाहिए, इमानदाई से, उसे कहतना चाहिए
06:26भाया, अभी इतने सारे बड़े बड
06:44इतना सा आप सहयोग करके आप तक तक वेट कर लें, कि घ्या हमारा हो गया है, इस मामले का,
06:54मेरे उपर जो आरोप लगेते हैं, निकल गए या अगर वो फांस गये तब कोई बात ही नहीं है, लेकिन
07:02अगर आप उसे स्क्लीन चिट को मिल गए या स्वच्चता से निकल गए �
07:06और आपकी सारे आरोब बेबुनिया थे, आप वापस कुर्सी पर आ जाईये, है ना, तो मेरे ख्यान से तो ये
07:11अच्छी बात है, अगर अपना जमीर होता, मेरा अपना जमीर होता, तो मैं ऐसा करती है, अभी कई उनके उत्तरडायत
07:18हैं, उनके सिर पर, सानातनियों का सारा बे
07:35आपने ये कुर्सी रखो, मैं बहुत सुकून से जीवन जीने वाली और बिल्कुल कोई लोब के बगएर जीने वाली भी
07:41अगती हूँ, तो मैं खहते थी भाईया, मैं सिम्मेदारी नहीं उठा पाऊंगी ये वाली, इतना इतना बवाल हो रहा है,
07:47थोड़े दिन के लिए ठ
08:08झाल
Comments