00:00चार दश्कों से जादा की सक्रिय पत्रकारिता में एक्टिव पत्रकार के तौर पर शामिल होने के बाद
00:09BBC के फॉर्मर इंडिया हेड संजीव शिरिवास्तवा ने जैपूर के बापुनगर में एक कचोड़ी की दुकान खूली है
00:15क्या है उसके पीछे के कारण और कैसी चल रही है दुकान नी तमाम बाते जानेंगे खुछ संजीव शिरिवास्तव से
00:20संजीव टी आपको बहुत-बहुत बदाई यह बताएं कि क्या मुखे कारण था इस प्रकार का डिसीजन लेने के देखो
00:29एक तो यह इसमें मैं खुद इतना गहनता के साथ इस शोध में कभी नी डूबा हूँगी इसका कारण क्या
00:35था यह बस क्या होता है जब आपकर स्टा
00:50सब्सक्राना एक कभी कॉलेज में पढ़ता था तब ही सुसता था मुझे खाने का बहुत शॉक है और कचोडिया मेरी
00:55पेपरेट हैं और राहिस्थानियों की जाहता रहें तो कभी मन में आता था कि कभी कचोड़ी बेचेंगे मौका लगा तो
01:02अभी मौका लग गया अब उस
01:05पर इतनी चर्चा हो रही है तो मुझे हरानी है क्योंकि इसका कोई विशेश अर्थ इसको को गुड आर्थ नहीं
01:10है चैसे हम दोवे पढ़ते थे न स्कूल में तो एक तो सराला आर्थ होता था था कि जो दिखता
01:14है फिर उसका एक गुड आर्थ होता था कि साभी इसका डी�
01:19पूरे मीनिंग है नहीं, एक मेरा शौक था, मौका था, दस्तूर भी था, पूरा कर लिया, और…
01:28क्योंकि जादतर पत्रकारों को लोग संजीदा लोग मानते हैं, ऐसे लोग जो कि देश दुनिया की जो अलंत मुद्दो पे
01:33अपनी राय रखते हैं, अपनी बात को आगे रखते हैं, और ऐसा व्यक्ति जो कि इंडिया का, बीबीसी का हेड
01:40रह चुका हो, अगर वो व्यक्ति क
01:42चौड़ी के दुकान खोल रहे हैं, तो उसके पीछे के कारण क्या हैं, क्या कोई मजबूरी रही, financially or otherwise,
01:48इसके देश में जो जर्नलिजम की पत्रकारिता की वर्तमान में स्थिती है, क्या वो उसके पीछे की वज़े है, क्या
01:56कहना चाहें। तो देव आपने बहुत सारी बात
02:10में से हूँ, अगर अपने मुझ से बूलू, मतलब है, ठीक है, भगवान की बड़ी खरपा रही है मुझ बे
02:15और मैं बड़ा खुश नसीब रहा हूँ, मुझे लिए हमेशा बहुत अच्छे अफसर्श अब जवाब है, जो सोशल मीडिया पर
02:21स्पेकुलेट कर रहे थे, क्य
02:23क्या कोई माली हालत की वज़े से कोई financial compulsion की वज़े से संजीव शिरवास्तव ने ये फैसला लिया और
02:29उन्होंने साफ तोर पर कह दिया है कि उनकी ऐसी कोई financial मजबूरी नहीं थी, हाँ, बिलकुल भी नहीं थी,
02:37शौक की बात है, अब क्या बहुत लोग समझ नहीं पाते है
02:40असाइनी से की एक जीवन मिलता है, अब उसमें कई हसरतें ऐसी होती हैं, जो हमाई पूरी नहीं हो सकती,
02:47है ना, उनको ले के उपड़ जाएंगे, भगवान के पास, कई ऐसी भी हसरत होती हैं जिनको हम पूरी कर
02:52सकते हैं, तो एक लाइफ है, उसमें एक ही एक चेज करते र
03:08नराज हूं और कुंटे तूं हताश वह ऐसा बजी नहीं है ठीक है वो तो मेरे जीवन का हिस्सा है
03:14वो तो मेरे सांस लेने जैसा है आप मुझके नीघा के पूछ लिजा राज नीती और विदेश नीती के बारे
03:21में और टिपनिया में कर दूगा तो पत्रकारिता क्यों नहीं क
03:37करता हूं अभी भी बिहार elections में था तो वो तो वो कोई यह नए कि कोई नई चीज करने
03:43के लिए आपको पुरानी पुस्तक को बंद करना पड़ेगा वो तो खुली हो यह किताब वो अध्याय तो जारी है
03:49यह उसमें जोड़ दिया है तो मेरा मेरे जीवन में थोड़ी काविया
03:53आत्मक ढंग सब्सक्राइब थोड़े रंग भर रहा हूं जो मेरे इच्छा है वो करने कोईश्ट कर रहा हूं इसके पीछे
03:57को बहुत ऐसा कारण नहीं है हां पत्रकारित अगा जो आज कढ़र रहा है उससे को इमें बड़ा प्रसंद नहीं
04:03ऐसी वात नहीं है लेकिन उसकी
04:17है कि हमारे समय में हमें हूं बेपरवा और बट डेफिनेटली एक जो मीडिया का कारेक्टर था जो मिज़ा में
04:25इससा मानना है कि मीडिया का क्या काम है कि सरकार के वाच्डॉग अब बाएंड लाज मेंस्ट्रीम मीडिया मुझे ओपोजिशन
04:32की वाच्डॉग की भूमिका म
04:34उनकी इच्छ है मैं क्या करूं इसमें मुझे बात थोड़ी नागवार गुजरती है लेकिन उसी तरह से जो सोशल मीडिया
04:40की दुनिया है वो सब बिलकुल एंटी मोधी है वो भी मुझे बात अजीब लगती है वह सावन के अंदे
04:46को हरा हरा क्यों नजर आता है वह आप दे
05:04हो रहा है समय परिवड़तें चील है फिर वेसा हो जाएगा पुराना था तो कोई मतलब मैं उसकी भी चिंता
05:11है मैं ऐसा निया कि अरे साब क्या हो गया मैं और बस मैं ऐसा ही हूं मतलब जैसे आपने
05:20कहा थोड़ा मस्त टाइप थोड़ा बहुत जादा वजन लेके निचलता
05:25है किसी वीजी आपर यह है Sanjeev Shreevastav का कहना कि जो वर्तमान में इनके हिसाब से पत्रकारिता की स्तितिय
05:32है उससे कोई बहुत जादा खुश नहीं है पर उससे कोई बहुत जादा चिंतित भी नहीं है अब बात करने
05:37की कोशिश करेंगे कि क्या कुछ यहां पर काफे के बार
05:55तो आपग हमने हमारी ठोड़ा जयपुर में एक अज़ नहीं है और बिना रहा है तो हमने ये
05:59शुडू की है貅 चौरी तो आप उसको ठ्राई कर सकते हैं ये मने ली थी आप से
06:0426 human Companies iska Matar Ka registered टेस्ट ये आप ενा है सास्पत्पर आप
06:12कार घ्रामक्न क्वार मेनी से land actu
06:25हर किसी को बच्चे हों, बड़े हों, उनको पसंद आ सकता है
06:28इसका अगर ऐचिगु नियुग तरीयार करी है
06:30तो
06:30उसने बड़ा विरोध किया, ये सब मत करो तुम
06:32तंप मकिए
06:34लेकिन अब वो भी क्या करें ना भारत में पतिना
06:38और
06:38वो जन्हें मेरे
06:51कुछ मिठाईयां जो मेरी पसंद की हैं जादा वो अच्छे शुद तरीके से हम बनाएं पीछे रसोई है बिल्कुल साफ
06:58सुत्रिया आप देखिए अच्छा तेल इस्तमाल होता है डबल फिलता इस तरह की बाते और
07:04काफे भी खुलने के तैयारी में उसके भी कुछ आइटम सब रखने जा रहे हैं तो जगे चुकी है मेरी
07:10जगे है जगे हमारे पास है स्थान है तो थोड़ा सा इसको अगर इसका विस्तार भी हो जाएगा तो अच्छा
07:18लगगा लेकिन हां बहुत जादा नहीं फेला आप फेल
07:33चीज में है नहीं चाहते के बहुत ज्यादा बढ़न लें संजीव जी आपसे रिक्वेस्ट करूंगा अगर आप भार काउंटर से
07:37इस तरफ आजए और दिखाना चाहूंगा यहां पर जो कैफे है इसका भार कभी आपको दिखाएंगे यह है रेट लिस्ट
07:44जो है और इस त
07:58अमाम जो बाकी चीजे गाजर हल्वा जो है वो 550 रुपे पर केजी का लिखा हुआ और यहां पर वो
08:03बेवरिजिस का लिखा हुआ जिसमें मसाला चाहे 30, केसर चाहे 50, होट कॉफी 50 और पोल्ड कॉफी 100 रुपे का
08:09दाम जो है वो लिखा हुआ है और संजीव जी ने जैसे कह
08:11कि कैफे खोलने का भी इरादा है और वो खुल चुका है इन फैक्ट उस पे थोड़ा बहुत काम जो
08:16है वो जारी था आप यह देख सकते हैं कैफे का बहार का यह जैपूर का पौश बापुनगर का इलाका
08:24है और यहां पर यह दुकान जो है आपने सोशल मीडिया पर अंदर
08:41इसको चलाने का फैसला लिया है और सॉरी सॉरी सॉरी बात यह है कि एक तो क्योंकि जगे इस तरह
08:54की है आसपास काफी स्टूडेंस का फुटफॉल है कुछ उनिवरस्टी भी है पास में मेरे पत्रकार मित्र भी अब कई
09:01आने लग गये है कुछ राजने था भी आये है यहां
09:06तो बैठने उठने की भी जगह चाहिए थी प्लस थोड़ा मेरी बीचल काफी अच्छी हां कि थोड़ी और इसको वाइडन
09:15अप करें थोड़ी से और आइटम लेकि इसका मेनियों हमेशा बहुत शॉर्ट रहेगा मतला अंदर के आइटम जो आपने दुकान
09:22के देखे है श�
09:35भी सर इसी प्रमस में या अलग है वो आएटम से जडिनस यहां पर नहीं है अलग है तो यह
09:40आप देख सकते हैं यहां पर सिटं अडेंश्मेंट है और यह कंफे है अपर कंать यहां पर कम से कम
09:45तर मेंधरा लोग यहां से बैट कर खड़े हो कर खा सकते हैं तुछ यह भी
10:05संजीव शिरवास्तवा, एक्टिव जनलिजम के साथ साथ इस कैफे को किस तरह आप इसको चला पाएंगे, वो लगता है कि
10:15आप ज़स्बा जो है वो आपका पूरा इंवॉल्मेंट आपकी चाहिए होगी है, अब देखिए इंवॉल्मेंट तो इसलिए भी है कि
10:21मेरी जगह है
10:23मेरे शौक की जगह है, कई लोग आते हैं, खासकर युवा लोग आते हैं, नए लोग आते हैं, चाहिए नौज़ान
10:29पतरगार आते हैं, चाहिए नए नेता जिन, तो कि मैं 30-30 साल यहां रहा नहीं, तो मैं जैपूर के
10:34पूरी पीडी को एक तरह से मैंने मिस किया, तो यह व
10:51बात करने हैं, बड़ा मजा है, तो एक तरह से वह पत्रकारी तरह से भी जुड़ा रहना हुआ, मतलब में
10:55उनके द्वारा उनसे बातचीत करके, मुझे क्या चल रहा है जमीन पे, क्या हो रहा है, उसमें भी उसकी भी
11:03जानकरी रहेगी, दिल्चस्पी बनी रहेगी, और दे
11:22तो इसको इंजोई करना है, बहुत मैं अपने आपको सीरिसली निल देता, एक्चली में, सो इंजोईंग लाइफ, संजीव शिरवास्तवा साफ
11:31तौर पर ये कहते हुए कि अपनी जीवन को वो खुद बहुत संजीदगी से नहीं लेते, और इनको बिलकुल भी
11:35तरस का, दय
11:36का या पिटी का पात्र ना समझें, अपनी मर्जी से, अपनी खुशी से ये काम कर रहे हैं, और अभी
11:42भी एक्टिव जनलिस्स के तौर पर इन्होंने जो अपनी पुरानी माद्दा है, उसको खोया नहीं है, ये इनका मानना है,
11:50सर आपको बहुत-बहुत बदाई हो इसके ल
12:06इन्टिव लिया, उसके लिए आवार, क्योंकि में इस ट्रेडे में डिसा वालोगा जवाब भी नहीं होता, आज तक से बात
12:11करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर, कैमरा परसन निखिल शर्मा के साथ, देवंकर वधावन, जैपुर आज तक.
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