Skip to playerSkip to main content
  • 4 hours ago
डलमऊ का किला, जिसे भर राजा डालदेव ने बनवाया था, आज खंडहर में तब्दील है.

Category

🗞
News
Transcript
00:07गंगा के तटपर बना डल्मव का किला कभी अवद की सिमाओं का रक्षक था
00:13मजबूत दिवारे और विशाल किला के सामने बड़े बड़े शोर्मा दम तोड़ देते थे
00:19वक्त और हालाज के भठी में तबकर बलुवा पत्थर से बना ये किला कई राजवन्शों को विजय और पराजय होते
00:29देखा
00:29ये किला मुगलों से लेकर अवद के नवाबों तक कई बार सत्ता परिवर्तन का गवाव बना
00:36कभी रंग और गुलाल में सराबोर हुआ तो कभी रक्त रंजित फिर भी हिमाले की तरह अपनी जगह पर अटल
00:45रहा
00:47इतिहास के पन्नों में गंगा के तट पर खड़ा ये किला आज भी खंड़हर में तबदील है
00:54लेकिन गंगा की बहती धराओं से आज भी अपनी वीर्ता की कहानी सुनाता है
01:00राजा डलदेव का सासनकाल 1402 इस्वी से 1421 इस्वी तक माला जाता है
01:07इस दोरान उन्होंने अपने सामराज को काफी मजबूत किया और उसी के संदर में उन्होंने किले का निर्मार किया
01:15इतिहासकार बताते हैं कि पंद्रहवी शताबदी में भार शिवो और नाग वंशों ने अवद छेतरे में अपनी मजबूत सत्ता अस्थापित
01:24की थी
01:25जिसका किंद्र ये खंडार किला था
01:28भरो का समराज अरखा से लेकर पच्छी में खीरों तक फैला था
01:34राजा डाल देव का शासन 1402 से लेकर 1421 इसवी तक माना जाता है
01:41इस दोरान उन्होंने अपने समराज को काफी मजबूत किया
01:44और लगभग आठ एकड बे इटू और लाल पत्थरों से इस किले का निर्माण कराया
01:51किले की उचाई 20 मिटर रखी उसके चारों और खाई बनाई गई
01:56खाई की दिवारें काफी मोटी थी जिसमें गंगा नदी का पानी भरा गया
02:02इसी वज़ा से दुस्मनों के लिए इस किले को भेद पाना बड़ा मुश्किल था
02:08इबरहीम सरकी का एक परतनित यहां था जो यहां डल्माण छेत्र को दिवार करता था
02:14उस परतनित उसका नम हाजी था उस परतनित ने बताया कि राजा डल जो हैं अपने प्रभाव को बढ़ा रहे
02:22हैं
02:22अता है इनको हराना बहुत आउस्यक है तो इस उद्देश से वो आये अपनी सेना के साथ लेकिन क्योंकि इनकी
02:30सेना प्रभल थी राजा डल लेओ का सीधा मुकारबा नहीं कर सकते थे
02:34इसलिए उन्होंने चल से होली के दिन अचाना काकमण किया और राजा डल को पराजिपर के उस प्रभिकार कर दिया
02:41जिसमें राजा डल मारे गए और ये लोक नायक थे इस कारण जो है वहां की जंता ने काफी उनको
02:48दुखवा और आज भी लोक वहां पे होली की दिन होली न
03:02पैला रहा था उसे जानकारी मिली कि हरदोई शित्र में भरो का बड़ा परभाव है शरकी की सेना अचानक एक
03:10दिन हरदोई पर आकरमन कर राजा हर देव को हरा दिया तब राजा डाल देव अपना परभाव बढ़ा रहे थे
03:18इबराहीम शाह सरकी ने अपनी सेना के साथ डल
03:32अभी एक गुपचर ने बताया कि हुली के दिन राजा डाल वो उनकी सेना हत्यार नहीं उठा देव इसके बाद
03:39उसने हुली के दिन धोके से डलमव किले पर आकरन कर दिया डलमव से चार किलो मीटर दूर पुक्रवली में
03:47दोनों सेनाओं के बीच भीशन युद्धोः पर
04:02हुली के दिन हुली न खेलने का परन ले लिया यहीं वज़ा है कि आज भी हुली के एक सप्ताह
04:08बाद वहां हुली मनाने की प्रमप्रा है
04:11मुगल काल में अकबर ने इसको एक परगना मनाया और यहां सैन चावनी की रहती थी बैस राश्पुतों के समय
04:20में भी यह सैन चावनी थी और इनका पूरा जो है राजा यह आपके राना बेनी मादों का इसमें प्रभाव
04:27था ब्रिटिस काल में भी सैन चावनी थी लेकिन �
04:30it is a good function to do it.
04:36after that, Ibrahim Shah Sharki has this
04:40characterized hisish shape.
04:43He used this to be sent to us.
04:49He also built each other.
04:52It is a great place to Kelach.
04:58In English, English has used the use of the youth for the youth.
05:05But the country is free, some authorities have come and gone.
05:10The government has been property in the city of Khandar.
05:13Now the government has been in the city of Khandar.
05:17It's a story of every leader who tells us about the story of the country.
05:49Thank you very much.
Comments

Recommended