00:00और उसके बाद पहला स्पीकर अपोजिशन का इसलोपी होता है, यह हर साल हुआ है, इंदुस्तान के इतिहास में इस
00:23साल पहली बार लोक सबा में
00:30लीडर ओपोजिशन को बोलने नहीं दिया गया, मैंने स्पीच शुरू की, मुझे रोका गया, फिर शुरू की, फिर रोका गया,
00:51मैंने नरवाने जी की बात उठाई, देगा आपने,
00:56नरवाने जी ने किताब लिखी है, उसमें किताब में उन्होंने साफ लिखा,
01:11जब चाइना के टैंक, हिंदुस्तान की बाउंडरी के अंदर आ रहे थे, उन्होंने राजनाथ सिंग जी को फोन किया,
01:24उन्होंने से पूछा, मेरा ओडर क्या है, राजनाथ सिंग जी ने जवाब नहीं दिया,
01:34उसके बाद, जी डोबल को फोन गया, कि चाइना के टैंक, हिंदुस्तान के अंदर आ रहे हैं,
01:49मुझे क्या करना चाहिए, ओर्डर बताइए, कोई जवाब नहीं दिया,
01:58उसके बाद, जैशंकर जी को फोन गया, हिंदुस्तान के आर्मी चीफ ने उनसे कहा कि देखिए,
02:07चाइना की आर्मी, चाइना के टैंक अंदर आ रहे हैं,
02:12मुझे क्या करना है, कोई जवाब नहीं,
02:19उसके बाद, दो घंटे बाद, फिर से नरवाने जी ने,
02:25डिफेंस मिनिस्टर को कॉल किया,
02:30कहते हैं,
02:32आप मुझे ओर्डर दीजिए, दो घंटे हो गए हैं,
02:36आप प्रधान मंत्री से पूछिए,
02:41मेरा ओर्डर क्या है,
02:49यह सवाल इसलिए पूछ रहे थे,
02:53क्योंकि चाइनीज आर्मी पर फायर करने का निडने,
03:00प्रधान मंत्री को देना पड़ता है,
03:05यूद का निडने,
03:08आर्मी चीफ नहीं ले सकता है,
03:11वो मिलिटरी डिसेजिन नहीं होता है,
03:15वो राजनेतिक पॉलिटिकल डिसेजिन होता है,
03:18और वो प्रधान मंत्री लेता है,
03:24चाइना के आर्मी अंदर आ रही है,
03:30हिंदुस्तान के आर्मी चीफ घंटो फोन लगा रहे हैं,
03:35कोई जवाब नहीं,
03:39उसके बाद राजनात सिंग जी प्रधान मंत्री को फोन करते हैं,
03:46प्रधान मंत्री ने आर्मी चीफ से बात नहीं की,
03:52वो छुप गए अपने कमरे में,
03:56और रक्षा मंत्री से कहते हैं,
04:01कि आर्मी चीफ को बताओ,
04:07जो वो उचित समझें,
04:10वो करें,
04:12आर्मी चीफ अपनी किताब में लिखता है,
04:17कि उस दिन,
04:20मुझे हिंदुस्तान की सरकार ने,
04:23प्रधान मंत्री ने अकेला छोड़ दिया,
04:30बात समझें,
04:34आर्मी चीफ को जब ओडर देने का समय आया,
04:40चाइनीज टैंक्स को रोकने का ओडर आया,
04:46हमारे प्रधान मंत्री गाइब हो गए,
04:52यह तो शुरुआत थी,
04:55पार्लमेंट में यह बोलने की कोशिश कर रहा था,
05:00बोलने नहीं दिया,
05:02जैसे मैं बोला,
05:06अमिच्छा, नरेंद्र मोदी जी ने अमिच्छा जी की और देखा,
05:13अमिच्छा की और देखा,
05:16और अमिच्छा जी खड़े हो गए,
05:18बीजेपी के नेता खड़े हो गए,
05:20मुझे बोलने नहीं दिया,
05:23बाद चार-पाँच घंटे चली,
05:26पहले मैंने किताब दिखाई कहते हैं,
05:30ये किताब नहीं,
05:30पहले मैंने मैगजीन का आर्टिकल दिखाई कहते हैं,
05:33नहीं, अब मैगजीन का आर्टिकल कोट नहीं कर सकते हैं,
05:38फिर मैंने का ठीक है,
05:41अगले दिन में किताब ले आया
05:47किताब को कोट नहीं कर सकते
05:49फिर मैंने का ठीक मैं बोल देता हूँ
05:50नहीं बोल नहीं सकते
05:54मगर मज़े की बात यह नहीं है
05:57मज़े की बात दूसरी है
06:01क्योंकि इसी चीज़ के अंदर
06:03पर इसी भाशन के अंदर कुछ और छुपा हुआ है जो आज मैं आपको बताना चाहता हूँ
06:14हुआ क्या
06:18मैं नरवाने जी के बात कर रहा था
06:22चार-पांच घंटे मुझे रोका
06:25मगर बैक्ग्राउंड में एक और चीज चल रही थी
06:27और किसान भाई आप अच्छी तरह सुनो चार महीने के लिए
06:39हिंदुस्तान और अमरीका का जो समझोता है
06:44वो रुका हुआ था
06:50क्यों रुका था
06:55क्रिशी के मामले पर रुका था
07:00हिंदुस्तान की सरकार नहीं चाहती थी
07:06कि अमरीका की बड़ी बड़ी कंपनिया
07:12सोया कपास बुट्टा हिंदुस्तान में बेच पाएं दाल हिंदुस्तान में बेच पाएं
07:26हिंदुस्तान का कोई किसान नहीं चाहता, कोई राजनेता नहीं चाहता और हिंदुस्तान की सरकार भी नहीं चाहती थी
07:38चार महीने चर्चा बंद पड़ी थी, मैंने भाशन किया, भाशन में मैं सिर्म नरवाने जी के बात नहीं करने जा
07:56रहा था,
07:59मैं दो-तीन चीज और कहना चाहता था, मेरे भाशन खतम होते ही, अच्छी पतरे सुनिये आप, मेरे भाशन खतम
08:11होते ही प्रजदान मंत्री गए लोकसबा से,
08:18शाम को, बिना राजनाज सिंग जी, बिना शिवराज जोहान जी, बिना गड़करी जी, मतलब बिना अपने कैबिनेट से पूछे,
08:32उसी दिन, शाम को नरेंद्र मोधी जी ने, ट्रम्प को फोन को लगाया,
08:42ट्रम्प ने ट्वीट किया है,
08:46कि हिंदुस्तान के प्रधान मंत्री ने मुझे फोन किया,
08:56हिंदुस्तान के प्रधान मंत्री ने मुझे फोन किया,
08:59और कह दिया,
09:02कि यूएस इंडिया डील को मैं साइन करने को त्यार हूँ,
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