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  • 4 hours ago
वारदात: गुस्सा, हत्या और नीला ड्रम... जानिए लखनऊ के मानवेंद्र सिंह मर्डर की कहानी

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00:00नवसकार मैं हूँ शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदाद गलती से हो गया था ये पांच शब्द
00:0619 साल के उस लड़के के हैं जिसने पहले अपने बाप को गोली मारी और फिर लाश के चार टुकड़े
00:13किये पर अफसोस इस कबूल नामे के बावजूद उसे अपन
00:29करने यह उसने वेब स्रीज से सीखा अगल रहा होगा अक्षित अपने पक्ष्ट रखना चाहेंगे घ्रतिस हो गया तो
00:56यह यहां इस वक्त उस गल्दी की बात नहीं कर रहा है जो अमूमत 18-19 साल की उम्र में
01:02लड़कों से हो जाती है
01:05यहां यह उस खुनी गल्दी की बात कर रहा है जिस गल्दी ने पिछले दो दिनों से देश के हर
01:11माबाब को और यहां तक की खुद बच्चों को चल चोड़ कर रख गिया है
01:19चलिए मान बीजी गुस्से में गल्ती से राइफल से गोली चल गया है ऐसी गल्तियां इस से पहले भी कई
01:27बार गुस्से में हो चुदे है लेकिन गोली मारने के बाद आउनलाइन चाकू खरीना बाजार से आरी लाना और फिर
01:36अपने हाथों से अपने ही बाप के चार टुक
01:39बड़े करें पर उन तुक्नों को किष्टों में ठिकाने लगाती जाना ड्राइंग रूम में उसी बाप के धड़ और सिर
01:46को ट्रम में रख दे रहे यह सब करने के बाद भी क्या कोई बेटा यह कह सकता है कि
01:52घल्ती से हो गया था
01:54गल्टी सो गया तो
01:58गल्टी सो गया तो
02:02गल्टी सो गया तो
02:07चलिए फिर भी माल लेते हैं
02:09कि इतना सब कुछ करने के बाद भी
02:11ये इस वक्त सच कह रहा है
02:13कि गल्टी से हो गया था
02:15पर थोड़ी देर के लिए
02:17सब कुछ छोड़कर
02:18आप इसे ध्यान से देखिए
02:20चेहरा बेशक मास्क से ढखा है
02:23पर हात पाउं आखे सब बोल रही है
02:26इसके देखने चलने बोलने या गर्दन हिलाने
02:29यानि इसकी बोडी लैंग्वेज को बस पढ़ते जाएए
02:34किसी भी पल इसके किसी भी हाउ भाउ से
02:37कहीं से भी ये लगता है
02:39कि इसे अपने किये पर कोई पच्तावा या अफसोस है
02:42कोई शर्म या डर है बिल्कुल नहीं
02:45या अतक की लखनाओ के एक आला पुलिस अफसर के सामने
02:49जब ये एक घंडे तक बैठा रहा
02:51और वो पुलिस अफसर इससे पूच्ताच करते रहे
02:54तब वो खुद परेशान हो गए
02:56उसे एक घंडे की पूच्ताच में उन्हें एक बार भी ये नहीं लगा
03:00कि इसे अपने किये पर कोई पच्तावा या अफसोस है
03:03बल्कि जिस तरह वो बाते कर रहा था
03:06खुद वो पुलिस अफसर हैरान थे
03:08हैरान थे इस बात पर कि आज की इस जनरेशन को क्या हो गया है
03:13जो उसने किया उसे अब भी उसकी कोई परवाह नहीं
03:17हाँ शायद अब उसे ये यकीन हो चला है
03:20कि अपने घर और अपने आजादी से दूर अब उसे जेल में रहना होगा
03:25इस बात को लेकर वो थोड़ा नर्वस जरूर है
03:32थोड़ा नर्वस तो है लेकिन अब उसके बारे में ज़्यादा नहीं कह सकता
03:36यह तो साइकोलोजिस्ट जो मान उस तरह के जो डॉक्टर्स हैं उनके लिए यह तस्वीर लखनो के आशियाना कोटवाली की
03:51है
03:51बुदवार को अक्षत को इसी कोटवाली से कोट ले जाया जाना था
03:55ताकि उसकी पुलिस रिमान ली जा सके
03:59जिस तरह से इसने अपने पिता को मारा उस खबर को सुने के बार खुद मीडिया में बहुत से ऐसे
04:05लोग थे
04:05जो सिर्फ उसे देखने कोटवाली चले आया
04:09जैसे ही अक्षत को कोटवाली से बाहर लाया गया
04:12बाहर खड़ी मीडिया ने उन सारे सवालों को अक्षत की तरफ उचाल दिया
04:16जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है
04:20खास कर हर माबाब जौलाद बाले है
04:23खुद मीडिया के मन में अक्षत को लेकर कैसे कैसे सवाल थे
04:27पहले उन सवालों को ही सुन लीजिए
04:30वैसे भी अक्षत का जवाब सिर्फ पांच शब्दों में दिलेगा
04:35अक्षत आप कुछ बताएंगे क्यों मडर किया है
04:39अक्षत कैसे आपकी बहन भी इंवाल्व है
04:40क्या रीजन था आपने क्यों इस तरह की निर्मा मत्या की अपने पिदा की
04:58इतने सारे सवाल थे अक्षत के लिए
05:01पर बार बार लगातार तमाम सवाल तोहराय जाने के बावजूद
05:05अक्षत में सिर्फ दो सवालों के जवाब थी
05:08एक जवाब पांच शब्दों और दूसरा गर्दन हिलाकर
05:13जो जवाब पांच शब्दों में दिया
05:15उसका सवाल ये था कि उसने अपने पिता को क्यों मता
05:31इसके साथ ही बीच में कई सवाल और आए
05:34लेकिन अक्षत खामोश रहा
05:36अलबत्ता उसी खामोशी के बीच
05:38बड़ी खामोशी से गर्दन हिलाकर
05:41उसने एक और सवाल का जवाब सरूर दिया
05:44सवाल ये था कि क्या पापा को मारने में बहन भी शामिल थी
05:48इस पर अक्षत ने नाम गर्दन हिला है
05:53अपक्षत आप कुछ बताएंगे कि उमडर्किया है अब अच्छत आपकी बहन भी इंवालवे इस में प्लर अख्टेवल आप्षत आपने अपनी
06:06बहन से क्या कहाता कि अश्वाब आपने अपनी बहन से
06:22यानि अक्षत खुद तो जुर्म कुबूल कर रहा है
06:25पर साथ ही अपनी छोटी बहन को बेकसूर बता रहा है
06:28दरसल अक्षत की छोटी बहन को लेकर इसलिए बाते हो रही है
06:32क्योंकि 20 फरवरी की सुबह 4 बजे से साड़े 4 बजे के दरमया
06:36जब अक्षत ने अपने पिता मानवेंदर सिंग को उनी की लैसेंसी राइफल से गोली मारे
06:41तब गोली की आवास सुनकर उसकी बहन कीरती जाग गए थी
06:45कहा ये जा रहा है कि इसके बाद अक्षत ने कीरती को धमकी थी
06:49और ड्रा कर उसे अपना मूँ बंद रखने को कहा
06:51पर अगले चार दिनों तक घर में पिता की आधी अधुरी लाश पड़ी रही
06:56इस दौरान कीरती फस फ्रोर पर अपने चाचा चाची के पास भी गई
07:00पर उसमें दोस्त के घर भी गई
07:02इम्तिहान देने स्कूल भी गे पर तब भी चुप रहे
07:05यानि कीरती को ऐसे कई मौके मिले जब उसका भाई उसके पास नहीं था
07:10और वो सच बता सकती थी
07:13पर वो खामोश रही
07:15इसलिए कुछ लोग भाई बहन की मिली भगत को लेकर भी सवाल उठा रहे
07:19पर सवाल ये है कि क्या वाकई कीरती अपने भाई के साथ मिली ही थी
07:23या सत्मुच अपनी बहन को लेकर उसका भाई यानि अक्षद बेहत संसकारी है
07:29भती जाए इतना संसकारी था
07:31कि मतलब अगर चार लोगों के दस लोगों के बीच बढ़ता तो सब लोग कहते थे
07:36कि मतलब मानमेंद की बच्चे कितने अच्छे हैं
07:38लेकिन कभी कहते हैं सपनों में भी यह मैंने नहीं सोचा था
07:41कि मानमेंद का बेटा ही मानमेंद के साथ मैं यह कांड कर देगा
07:45अब उसके दमाग में एतनी नफरत पढ़ लई थी मैंने वाई फेस
07:48नफरत की बात कर रहा हूं, नीट वज़ा नहीं है, आप लोग कल से परसों से यहां पर हैं, क्या
07:53वज़ा आपको लग रही है?
07:55मैं लोग कल दो फैर में 12 वज़े क्या वज़ा लग रही है?
07:59मेरे सामने पुलिस कस्टड़ी में जा चुका था, मैं बहन से ही पूछ रही हूं, तो मैं बहन कह रही
08:08थी, मुझे कुछ नहीं पता, मेरे सामने गोली चली तो मेरे कान सुन हो गए, तो मैं डर गई, चाची
08:12के पास आके नीचे आ गई, फिर मैं उपर गई नहीं।
08:29तो पहली चिटा कर तो भेहन को भी लग सकती थी
08:44तरह से देखा तो उसने हमने किस तरह से मारी तो किया रही तो एक अग्षट की बुआ यानि मानवेंद्र
09:04की छोटी बहन ने ये भी बताया कि 19 फरवरी की रात करीब
09:08साथे बारा से एक बज़े के दर्मयान मानवेंद्र एक शादी से घर लोटे थे इसके बाद रात एक बज़ कर
09:14चौतीस मिनट तक वो उनलाइन थे
09:18साथी करके आए थे वो एक साड़े बारा एक बज़े एक लगबाग आए उनका मोबाइल मैंने चेक किया तो एक
09:24चौतिस पर उनको ओनलाइन दिखाई दे रहे थे फिर मैं कहते ना जब ठका आ रहा इंसान लेटता है तो
09:29पहली नीद में गहरी नीद होती है वो तो उसने ग
09:43पूचेगी तो खुदी बताएं लखनो पुलिस का भी कहना है कि बाप बेटे के बीच बहस या जगड़ा एक बज़े
09:50के बाद हुआ
09:52लेकिन पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जब जगड़े के बाद रात दो बज़े के आसपास
09:57मानवेंद्र सो चुपे थे तब अगले दो धाई घंटे तक अक्षत क्यों जाकता रहा अगर गुस्से में था तो उसी
10:04वक्त गोली मार सकता था या तो हो सकता है
10:19वो भविश में एक अगर नहीं डॉक्टर की पढ़ाई कराने की जित को लेकर रिष्टेदारों ने मानवेंद्र को कई बार
10:44समझाया
10:44बाद में मानवेंद्र इस बात पर राजी हो गए कि वो जो करना चाहे उसे करने देंगे अक्षत बीविये कर
10:51बिजनेस करना चाहता था
10:53नीट का कोई प्रेसर नहीं था नीट का लड़के ने एक बार मना कर दिया
10:58कि मना कर दिया था तो उन्होंने मतलब ज्यादा जोर नहीं दिया सबी लोगों ने फैमिली में मैं ममी ने
11:04मैंने पापाने सब लोगों ने ये बोला कि अगर उसका मन नहीं है पढ़ने का तो आप मत जोर दीजिए
11:11जो को मतलब
11:12नई खून है नई जन्रेशन है जो उसका मन है करने का वो करने दीजिये तो उन्होंने ये बोला था
11:18भाई ने कि चलो ठीके आप उन्हों को चरना तो
11:20अब हमें कोई मतलब नहीं जिस लाइन में जाना तो उसने कहा मुझे कॉलेज में एड़ीशन कराना मुझे बीबीए करना
11:26जो भी करना तो बिजनेस करना चाहत।
11:29अक्षद की बुआ ने ये भी बताया कि उनकी भावी यानि अक्षद की मा की 9 माई 2018 को मौत
11:35हो गई थी। उनकी मौत अस्पताल में हुई थी जा उनकी ब्रेन की सरजरी हुई थी।
12:03अक्षद के दादा कभी यूपी पुलिस में दरोगा हुआ करते थे हाला कि वह बहुत पहले रिटायर हो चुके लेकिन
12:10मानवेंद्र अभी अपनी कार में पुलिस का स्टिकर लगाया करते थे इसे इत्तिफाक के हैं या अक्षद की समझ कि
12:16कटल के बाद जिस कार में उसने �
12:18पिता की लाश के टुक्डों को ठिकाने लगाया यह वही कार थी जिस पर पुलिस लिखा है शायद अच्छत को
12:24पता था कि कार पर पुलिस का स्टिकर होने की वजह से पुलिस वाले उसकी कार की तराशी नहीं लें
12:32जिस गाड़ी का इस्तमाल मानवेंदर के बेटे आने कि अक्षत ने मानवेंदर के ही शुकु कराने के लिए किया
12:37ठकाने लगाने के लिए किया वो गाड़ी इस वक्त हमारे साथ है आपको दिखा देющий
12:41हम इस वक्त आशेयाना थाने में हैं और आप ये नमब प्लेट देखें ये ब्रेजा गाड़ी है और इसी गाड़ी
12:46की डिग्गी में शव का एक हिस्सा जो आरी के जरीए अक्षत ने काटा था उसे इस गाड़ी की डिग्गी
12:54खोल कर इसमें भरा और फिर काकोरी की तरफ ले �
12:59और वहां पर शव को जलाया और बरामत कराया बड़ी बात यहां पर यह भी है इस गाड़ी पर आपको
13:05दिखाई पड़ेगा तो पुलीस की भी एक पट्टी लगी है जबकि परिवार में ना मानवेंद्र पुलिस से हैं ना उनके
13:11भाई पुलिस से हैं हां मानवेंद्र के ज
13:28लाकर खड़ी कर दी गई है यह थाना है और यहां पर फिलाल इस गाड़ी को लाकर खड़ा कर दिया
13:32गया है और इसी के साथ कुल मिलाकर कहानी यह है कि इस गाड़ी का इस्तमाल हुआ काकोरी तक इस
13:38गाड़ी को ले जाया गया और इसी गाड़ी में मानवेंद्र नहीं मानवे
13:56स्कैन यानि कि पैथलोजी क्योंकि काम करते थे तो इसलिए आपको लखनो स्कैन तमाम जो पैथलोजी सेंटर्स के कागज हैं
14:02वो गाड़ी में मिलें क्योंकि इस गाड़ी का इस्तमाल मानवेंदर ही अधिक करते थे बेटे ने तो तब इस्तमाल किया
14:08जब अपने ही पिता को �
14:10उन्हीं के गाड़ी से ठिकाने लगाने की बात हुई
14:14लखनो पुलिस के मताबिक अक्षट में अपना जरुम कुबूल कर लिया है
14:17उसने पूचताज के दौरान बताया कि उसके हाथों उसके पिता का गतल हो गया
14:22लेकिन गतल हो जाने के बाद उसे पक्ड़े जाने का डर सताने लगा
14:27तब उसने खामोशी से लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा
14:31पर लाश वजनी थी, अकेला उठाने ही समदा था
14:3523 तारिक को जब हम लोगों को इसके बारे में जब पुलिस जांच कर रहे थी दौरान सूचना मिली और
14:42उसके बच्चों से बच्चों से बच्चों से बच्चों का बेटा है
14:51उसके बाद चीजें खुल कर यह सामने आई अनावरन यह हुआ कि उसी लड़के ने जो उनका सन है
15:10उसको कट करके और मतलब उसको यही में लगाता कि कैसे वो शाथ्चे को नश्ट करें
15:16अंकित मिश्चा के साथ समझ श्रिवास तब लखनाओ आज तक
15:24मानवेंद्र की बेटी और अक्षत की बहन जो इस खतल की चश्मदीद है वो फिलहाल सदमे में
15:30और इसलिए लकनो पुलिस उससे पूछताज के लिए सही मौके का इंतिजार कर रही है
15:35इस बीच आशियाना थाने में इस गतल को लेकर जो एफ आई आर धर्च की गई है
15:41उसमें गतल की वज़ा साफ साफ लिखी है
15:43क्या है वो वज़ा आईए जानते हैं
15:58अक्षत ने 20 फरवरी की सुबा आउनलाइन चाकू मगाए
16:01पर आउनलाइन चाकू छोटे साइस का मिलता है
16:04उससे लाश के टुकड़े नहीं हो तब वो खुद बाजार गया और आरी खरीद कर लाए
16:09उसने अपने जूम का पूरा एकबाल कर लिया
16:11और हत्या की घटना के बाद की उसने सारी अक्टिविटी बताई है
16:16तो जब हत्या के बाद उसने ये शब को ठिकाने लगाने की योजना बनाई
16:20और उसमें सबसे पहले उसने ऑनलाइन वेपन दू हैं इस तरह के चाकू इस तरह को चीजे मंगवाई
16:56लखनो पुलिस के मताबिक अक्षत ने आरी से अपने पिता की लाश के कुल चार टुकड़े की
17:00इन में से दोनों हाथ और पैर वो कार में रखकर ठिकाने लगा चुगा था
17:05बकॉल पुलिस इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि उसने लाश के टुकड़ों को जलाने की कोशिश की थी
17:12जो हाथ और पैर है उसने आरी से जैसा उसने जूर में इकपाल किया है कि आरी से उसने काटा
17:17और उसको एक पनी बैग में डाल के और वो नहर के किनारे जाडियों में उसने चुपा दिया और जो
17:23बाकी का पोर्शन है उसको ग्राउंड फ्लोर में घर में ही था बाद में उस
17:38इसा उसने नीले ड्रम में रख दिया ताकि बात में उन्हें भी ठिकाने लगा सके लेकिन 20 फरवरी की शाम
17:44तक मानवेंद्र की गुमसुद्धी की खबर पडोसियों और रिष्टेदारों तक पहुँच चुकी थी लोगों का घर आना जाना शुरू हो
17:50गया लहाजा अक्षत क
17:52लाश के बाकि टुकड़े ड्रम से निकाल कर बाहर ले जाने का मौका ही नहीं नहीं नहीं नहीं हो जगह
18:11है नादर गंच की नहर है उसके पास जाड़ियों फेक दिया था जो बरामत पुलिस ने कर लिया है
18:16हम लोग ने टीमें बनाई थी ताकि जितने भी साच्छे हैं वो सब इकठा कर लिये जाएं तो सारे साच्छे
18:20लगवग अभी इकठा हो गये हैं फॉरेंशिक टीम ने भी मौके से साच्छी इकठा किये और आज उसको ग्रपतार करके
18:26मानियनयाले के समक्षन के प्रस्तूत क
18:40इस नीले ड्रम में उस जब को भरा गया हम उसकी तस्वीर आपको दिखाने जा रहे हैं ये वो ड्रम
18:47है नीला ड्रम जिसको लक्नवपुलीस ने आशियाना के उसी घर से बरामत किया है जहांपर मानवेंद्र की हत्या हुई
18:56वही तीसरा फ्लोर जहां पर मानवेंद्र के शरीर को उसी के बेटे के द्वारा यहां पर रखा गया
19:03आपको मैं करीब से दिखाऊं अगर यहां पर लाकर तो आप देख सकते हैं कि एक नया ड्रम प्रतीत होता
19:09है
19:09और अक्षत दुकान जाकर इस नया ड्रम को खरीदता है और इसी ड्रम के इस धकन को जिसको आप देख
19:16रहे हैं
19:17इस धकन को खोलता है और इसमें जो बॉडी पार्ट्स होते हैं यानि कि जो शव के टुकड़े होते हैं
19:23उन्हें एक एक करके भरता है
19:24और टुकडे भरने के बाद इसको यहां से बंद कर देता है
19:28लेकिन जब जो smell है जो कि अभी भी बहुत smell हमको आ रही है
19:31जब कि इसमें अभी कोई शब नहीं है
19:33उसके बाद भी यह जब smell करने लगता है
19:36तब बाद सामने आती है कि आखिर इतनी smell इस घर से क्यों आ रही है
19:40और इस तरह की नीले ड्रम की कहानी प्रदेश की जुर्म की कहानी में एक और दस्तक देती है
19:46जिला कोई और था अब राजधानी है
19:55यह मानवेंदर मडर केस की एफायार है
19:57इस एफायार में मानवेंदर के गतल की वज़ा लिखी हुई है
20:01वज़ा यह है कि मानवेंदर अक्षत को नीट किलियर कर
20:04एमबीबियस की पढ़ाई करने के लिए कहते थे
20:06इसी बात पर छगड़ा हुआ और अक्षत में अपने बाप को गोली वार दी
20:10पर एक सवाल जो आम लोगों के साथ साथ पुलिस को भी परेशान कर रही थी
20:15वो ये कि बेशक अक्षत चाकू या आरी खरीद लाए
20:19पर उसे ये कैसे पता कि लाश के टुकड़े कहां से और कैसे किये जाते ही
20:24तो लखनो पुलिस के मताबिक अक्षत ने ये आईडिया या लाश के टुकड़े करने का तरीका कुछ विफ स्रीज से
20:31सीखा
20:31इन में से एक हाल में आई विफ स्रीज वद्ध थी
20:36अंकित मिश्या के साथ समझ श्रिवास तब लखनो आज तक
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