00:00मैं, शेखर, आज भी ठीक से नहीं जानता कि मैं जिन्दा हूँ या किसी और की जिन्दगी जी रहा हूँ।
00:07एक सुबह मैं उठा और मुझे सब कुछ जाना पहचाना लगा।
00:12कमरा, खिडकी, पंखे की आवाज, लेकिन आइने में चहरा, मेरा नहीं था।
00:19जब मैंने उस चहरे को छुआ, तो दिल में अजीब सी घबरहट हुई।
00:23फोन उठाया, कॉन्टेक लिस्ट में मेरी बीवी का नाम था, लेकिन मैं शादी शुदा नहीं हूँ।
00:30ऑफिस गया, लोग बोले, सर, आज आप अलग लग रहे हैं।
00:35अलग, शाम को एक डायरी मिली, आखरी पेज पर लिखा था, अगर तुम ये पढ़ रहे हो, तो मैं हार
00:43गया।
00:43धीरे धीरे उस आदमी की यादे मेरे दिमाग में भरने लगी, उसकी गलतिया, उसका गुस्सा, उसकी आत्महत्या की कोशिश, और
00:53फिर एक रात आईने में वही आदमी दिखा, उसने कहा, मैं बाहर नहीं निकल सका, इसलिए तुझे अंदर ले आया,
01:02अब मेरी यादे हर द
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