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  • 3 minutes ago
दादी-नानी की रसोई

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00:04नमस्कार मैं डॉक्टर श्वेता तिवारी आप सभी का अभिननन परती हूँ आईए आज सुनते हैं राजस्थान पत्रिका की प्रधान सलपादक
00:13विद्या वाचसपती गुलाब कुठारी जी का परिवारिय परिश्ष्ट में प्रकाशित आले जिसका शीषक है दादी नामी
00:21की रस्वे प्रले काल क्या होता है इसका अनुभवतों मैंने माता के पेठ में कर लिया वारुनी रात्री आशुरी संसार
00:31अंधकार शीर सागर में विश्राम आगी का चिंतन नई नई शंकाय भय और भी जाने क्या-क्या मा का समबाद
00:40और बाहर की ध्वनिया मा के माध्यम से
00:43शरीर का विकास मा के अन्य से नितनया पिछले जन्मों से बिलन बहुत हूँ सोचता रहा कि क्या बाहर घर
00:51में भी यही खाना पड़ेगा पिछले जन्म के अनुभव कुछ और थी कर्म भी शायद बदल जाये अचानत एक विसफोट
01:00हुआ अंधेरा चला गया था तेज रो�
01:02शरीर में आखें नहीं पुल रही थी मैं भूमिष्ट हो गया था विश्व का अंग बन गया था शरीर अब
01:10मा की उश्वा से दूर अतीशीतल वातावरण में था शरीर में सिरहन दोड़ गई मा की चीख भी सुनी और
01:17मेरे आने का आलहात भी सुनाई दिया शरीर को जहड़
01:21पहुचकर साफ किया कुछ मुह में चटाया उल्टा लटका कर धपकाया मैं रोश्णी की चका चौंध में अस्तिवस्त था पिछले
01:30जन्म में तो पैदा भी काल कोट्री में हुआ था मैं भूख के मारे तरप रहा था एक जगह ले
01:37जाकर सुला दिया गया कुछ देर बाद म
01:40आई खाने की व्यवस्ता ही बदल गई थी अब तक मैंने अपने आप कुछ नहीं खाया था माके यहां से
01:47आ रहा था और पूरे शरीप में वित्रित हो जाता था डोर डिलिवरिस से भी बहुत आगे नितनया मैं मीठा
01:56चरबरा कर्टा किस प्रकार एक ही इस्तान पर विश्�
02:02यात्रा हर यात्रा के बाद नए व्यन्यन फिर भी कहला आया धाबा कोई व्यवस्ता नहीं धाइनिंग हॉल नहीं पर उसने
02:10वाला नहीं कैसा लगा कोई पूछ ने वाला नहीं हां सब कुछ वातानू कोल लिता
02:15dadi ke ghar mein
02:17aur nani ke ghar mein
02:19bada antar tha khani me
02:20pita nene dadi ke pete mein
02:22khanadani khana khaya
02:23maan ne sasuraal mein joh khaya
02:26pihar se to bhoot bhinna tha
02:27uska shariir, uski maa
02:29nani dvara nirmit tha
02:31mujhe shuru ke dinon mein
02:33pita ke ghar ka khana mila
02:35joh pita aur dadi ko mila tha
02:37vah khana to
02:39pidiyo se parampara ka khana tha
02:42pita ka ghar to badalta nahi
02:44yaehi anna khanadani ke
02:46loom ke man ka nirvaraan karta hai
02:48vaisi kaamnayan aur
02:50aachran
02:51maa ka shariir nani ke shariir
02:53aur anna se evan nani ka shariir
02:55uski maa
02:57pad nani ke anna se bana
02:59meirei shariir me maa ki maa ki maa
03:01ka anna aya
03:02vaisi hi vichar aur lagawa aya
03:05dadi ke ghar ke jaisi parampara
03:07se mukt hai nani ke ghar ka anna
03:11swachandita ka
03:12vatavaran nani ke ghar mein hii
03:14mil saktta hai maa bhi
03:15jab pihar jati hai
03:16swachand ho jati hai
03:46dhekho toh
03:48yun toh dadi ke shariir se hii bantah
03:49joh kisi anna pariwaar se
03:52aai hai kintu pita ke paad
03:54khandan ke vriksh ka biege hoota hai
03:56jis mei saat peedhii ki anna pari
03:59pita ke shariir ki anna pari
04:28antim dhatu shukr mei
04:58maabhuta mitti hii hai
05:29iske bhi haamare shariir ki bhaati
05:58bhaag vahi ghrit ka ansh hai
06:00jis anna se amrita ras nikal jata hai
06:03man ko nahi bhaata
06:04pratyek shetra ka anna bhinna hoota hai
06:07panchagni ke sithant ke anusar
06:09jivaatma
06:10surya se chal kar
06:11haamare purush shariir me
06:13anna ke sath hi aata hai
06:15anna matri shariir ka
06:17poshak nahi hai
06:18balki anna ka laahak bhi hai
06:20aaj ka vijyan
06:22anna ke vibirid shikshah
06:23dhenne laga hai
06:24joki ghatak hai
06:25shariir ke sabhi dhatu
06:27ka nirman thaihya jata hai
06:29protein, calorie, carb,
06:31jaisi shabd,
06:32jal, jeevan ko
06:33prakrati se dure kar dhe te hai
06:35main bhi bahar akar
06:37vijyan ke yug me
06:38pravish kar gaya
06:39ab dhekho
06:40mere dhabae ka sara anna
06:42pichhe chut gaya
06:43naya anna ho gaya
06:45maa ka dhud
06:46haam, abu jhe
06:47prayas karna pardtah hai
06:49peenay ke liye
06:49ek khilonye me
06:51itna amrita dhara
06:52ho saktta hai
06:53manok shir sagar ho
06:55aisa to mahi
06:56samaj saktta ho
06:57kehani ko to maa
06:58ek dhudh huyye
06:59intu pratyekistan paan
07:01me
07:01naya swad
07:02joh awashye hi
07:04maa ke
07:04anna ka anna hai
07:06aur haan
07:07maa ka anna bhi
07:08toh
07:08deri product
07:09hi hai
07:10joh samasya
07:11peet me
07:12rehte
07:12a rahi thi
07:13bha toh
07:14aaj bhi
07:15vaisi hi hai
07:15bhojan ka
07:45sa-sarabhudh hi
07:46हाँ, अब जो दूज में आ रहा है, म मा के घर का है, न निहाल का है
07:51पिछले कुछ समय से भी वही था, पहले अंधेरा था, आज उजाला है
07:56जो पहले था, आज नहीं है, पहले मुझे भी कुछ न दिखाई देता था, नहीं सुनाई, न भूग लगती थी,
08:04नहीं पेट वरता था
08:05पहले मैं महा माया के हाथों में था, अब मैं प्रक्रती के हाथों में आ गया हूँ
08:11मा के साथ साथ सभी परीजनों के हाथ में आ गया
08:15अब मैं मन से भी खाता हूँ, शरीर से भी खाता हूँ, बुद्धी से कम खाता हूँ
08:20कुछ चहरों को देखकर बहुत अच्छा लगता है
08:23मा को जब दूद पिलाना बहुत अच्छा नहीं लगता
08:26तो बोतल धमा देती है मुह में
08:29कौन सा दूद होता है नहीं मालूम
08:31हाँ भूक में पत्थल भी खा लेते हैं
08:33सुना है डेरी का दूद है
08:35जिसमें पानी मिलाकर बोतल में भरा जाता है
08:38मिलावट से ही मेरी स्वास्थे रक्षा हो रही है
08:41सुनता हूँ कि यह दूद भी जहर से कम नहीं है
08:44इसमें हजारों पशों का दूद मिश्टित है
08:47नकली दूद भी है कीट नाशक और रसायन युक्त
08:50खाद ठंडे दूद का विग्यानिक आविशकार
08:54जिसे कई देशों में निशेद कर दिया गया है
08:56और मेरी माँ मुझे प्यार से बिला रही है
08:59पूतना की तरह
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