00:00क्या आप जानते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की बानसुरी को सिर्फ बानसुरी नहीं कहा जाता, उसका दिव्य नाम है, मुरली और
00:09विशेश रूप से वन्शी, कहा जाता है, श्रीकृष्ण की वन्शी कोई साधारन वाद्य नहीं थी, वो प्रेम, आकर्शन और आत्मा
00:19की �
00:20पुकार थी, जब श्रीकृष्ण वन्शी बजाते थे, तो केवल गोपिया ही नहीं, पेड रुप जाते थे, नदिया बहना भूल जाती
00:29थी, और पशुतक ध्यान में लीन हो जाते थे, क्या आप जानते हैं, श्रीकृष्ण की वन्शी में नौ छेद होते
00:38हैं, और सनातन मा
00:39सन्यता के अनुसार, ये नौ छेद, मानव शरीर के नौ द्वारों का प्रतीक हैं, जब श्रीकृष्ण वन्शी बजाते हैं, तो
00:48संदेश यही होता है, अपना अहंकार खाली करो, तभी ईश्वर तुम्हारे भीतर से बोलेगा, एक और रहस्य, श्रीकृष्ण वन्शी को
00:59ह
00:59हमेशा, हृदय के पास रखते थे, क्योंकि भक्ती का मार्ग, मस्तिश्क से नहीं, हृदय से होकर जाता है, और शायद
01:09इसी कारण, श्रीकृष्ण युद्ध भूमी में भी, हाथ में शस्त्र नहीं, हृदय में प्रेम रखते थे, अगर ये जानकारी आपको
01:18नई लगी, त
01:20समझ लीजिए, सनातन सिर्फ धर्म नहीं, जीवन जीने की कला है, जै श्रीकृष्ण
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