00:00आचार जी, आज जार्खंड की जो इस्थिती है, उसे आप कैसे देखते हैं? और जार्खंड में क्या पूटेंशियल है?
00:07बहुत पूटेंशियल है, बहुत पूटेंशियल है। देखिए, शेहरी चमक-धमक जहां नहीं आई हो, वो बस अविकास की बात नहीं
00:22होती है।
00:23वो कोई अनिवार्य रूप से दुर्भाग्य की बात नहीं होती है। उसका एक अर्थ ये भी होता है कि बहुत
00:32तरीके की विकृतियां भी नहीं आई है।
00:36बहुत तरीके की चालाकिया, चतोराईया, कोटिलताएं ये सब भी नहीं आए हैं।
00:43और ये कोई छोटी बात नहीं होती है। ये भी अपने आप में महत्पूर्ण बात है।
00:48लिकिन ये बात पूरी नहीं है।
00:54भूलापन अगर भीतरी प्रकाश के साथ नहीं है, तो शोशन का शिकार हो जाता है।
01:02साधारन अर्थों में जिसको भूलापन कहते हूं परयापत नहीं होता।
01:06अगर आप भोले तो हैं, पर आप दुनिया के खेल, दुनिया की चतुराईयां समझते नहीं हैं, तो फिर आप शोषण
01:14का शिकार बनेंगे, चतुर होना नहीं, मैं कह रहा हूँ, चतुराईयां समझ में आनी चाहिए, लेकिन जहां पर अभी बाहरी
01:22विकृतियां नहीं पहु
01:36की जादा आसान हो जाते हैं, यहीं वज़य है कि जहरखंड से जहरखंड की आबादी के अनुपात में हमारी संस्था
01:46से बहुत जयादा लोग जुड़े हैं, आप जहरखंड को लें, बिहार को लें, उत्तर प्रदेश को लें, तो यह यहां
01:54पढ़ी उमें बहुत बड़ा ह
01:58लेकिन जब हम देखते हैं कि संस्था से कितने लोग यूड़े हुए हैं उत्तर प्रदेश से बिहार से और जारकंड
02:04से तो अनुपात बड़ा अच्छा नजर आता है जारकंड का जारकंड की अबादी की तुलना में यह इसी लिए है
02:14क्योंकि एक एक आदिम किस्म की निर्द
02:24निर्दोष्ता सहायक होती है अध्यात्मिक प्रक्रिया में लेकिन अगर अध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं चली तो वही निर्दोष्ता फिर व्यक्ति को और
02:32समाज को बंधन में फसा देती है और शोशन का कारण भी बनती है
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