00:00आजकल एक टर्म चल रही है मम्मी समाच
00:02कि मम्मियां तो ऐसी होती ही हैं
00:05मम्मियां तो ऐसी होती ही हैं
00:07मम्मियां ऐसी होती हैं तुमने बना डाला उनको
00:10इनोसेंस ही नहीं कई तरीके की सम्मानजनक पदवियां उसको दी जाती हैं
00:15मा का प्यार, मा की महानता, मा का भलिदान, मा की जिंदगी बरबाद करके इसको तुम मा की महानता बोल
00:22रहे हो, मा की कुरवानी बोल रहे हो, मा की जिंदगी तुम खुद खा गए, और स्वांग ऐसे करते हो
00:26जैसे मा की न कोई अपनी जिंदगी है, न मा की कामनाएं है, अभी
00:45मा के हाथ बड़ी बड़ी मारते बना सकते थे मा के हाथ बड़े बड़े गरंथ लिख सकते थे मा के
00:50हाथ बेला नी नहीं कलम भी उठा सकते थे मा के हाथों में बंधनी नहीं बल भी हो सकता था
00:57पर तुमने मा के हाथों से यह सब छीन लिया और अब कह रहे हो मा के हाथ का गा�
01:02जाजर का लूवा
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