00:00Eik çoçay se gatao mei мнеira nam ki ek loppi rahiti thi.
00:02Usse kitaabin pardana sabse ziyada pacesanth tha.
00:04Her rove school janae ke liayach train sẽ brother jati
00:07اور aupnay sabse pacesanthida kitaabon ka dhare aupne saath leti.
00:10Lekin kuz ajeeb ho raha tha.
00:11Her rove jub mira station pahunch thi,
00:13ussi eek kitab gaayb ho jati.
00:15Usnei apni seat ke nìche d affa,
00:17yâtriyon se pôccha,
00:18spreadsheet in kua ni kucca naihi janta tha.
00:19Eeg din train mein mira ne dekha
00:21कि एक चालाक आदमी हर रोज की तरह उसके पास घूम रहा था
00:23उसकी आँखें तेज और सस्विशस थी
00:26और जैसे ही ट्रेन एक अंधेरी सुरंग में घुसी
00:29वह फिर से मीरा की किताबें चीनने की कोशिश करने लगा
00:31तब ही ट्रेन के कमपार्टमेंट में
00:33एक सुनहरी रोशनी वाला स्वरूप प्रकट हुआ हनुमान जी
00:36उनकी आँखें जैसे सुभह के सूरज जैसी चमक रही थी
00:38और उनका रूप देखकर पूरा कमपार्टमेंट साहस और शक्ती से भर गया
00:41हनुमान जी ने मीरा से धीरे से कहा
00:57और मीरा की किताबें वापस कर दी
00:58मीरा ने हनुमान जी से पूछा
01:00धन्यवाद लेकिन आप मेरी मदद क्यों कर रहे हैं
01:03हनुमान जी मुस्कुराए और बोले
01:05ग्यान और इमानदारी सोने से भी बड़े खजाने हैं
01:08हमेशा इन्हें सुरक्षित रखना
01:09उस दिन के बाद मीरा बिना किसी डर के अपनी किताबें पढ़ती रही
01:12और जब भी वह ट्रेन देखती
01:14उसे याद आता कि वह दिन जब हनुमान जी उसके साथ ट्रेन में आये थे
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