00:00चीन जाहिर बात है एरान से बहुत बड़ी तदाद में कच्छे तेल का आयात करता है तो चीन नहीं चाहेगा
00:08कि ये जो सप्लाइ लाइन है ये ख़तम हो जाए रुख जाए जैसे अमरीका ने वेनुजुला पर कपजा कर लिया
00:16अब वेनुजुला का जो कच्छा तेल है वो कि
00:19उसको बिचा जाएगा किस कीमत पर बिचा जाएगा चीन को बिचा जाएगा या नहीं चीन को महंगे दर पर बिचा
00:26जाएगा ये सब अपसे अमरीका तै करेगा इसी तरह से चीन को आशंका है कि एरान पर भी अगर अमरीका
00:34का वर्चस्व हो जाएगा तो एरान से जो कच्�
00:48तेल का आयाद करता है उसके लिए कोई पेमेंट डॉलर्स में नहीं करनी पड़ती है वो इरान की करेंसी या
00:57चीन की जो करेंसी है यूआन उसी में ही पेमेंट हो जाती है पेमेंट का आदान परदान तो चीन चाहेगा
01:04कि इरान के साथ उसका कच्छे तेल का जो सोर्स है वो ल
01:17लगातार सप्लाई कर रहा है वेपन्स इरान को इसके अलावा चीन ने अपनी नेवी के चार-चार बड़े-बड़े युद्ध
01:26पोतों को उत्तरी आरब सागर में ओमान का खाड़ी के पास
01:31स्टेट ऑफ हर्मूस के पास डेपलॉई किया हुआ है लेकिन चीन ने जो ये युद्ध पोत स्टेट ऑफ हर्मूस के
01:38पास डेपलॉई किये हैं ये महज डेटरेंस हैं वकई युद्ध क्या ये लड़ सकते हैं अमरीका की नेवी के साथ
01:46वहाँ पर सवाल ही नहीं उठता है ज
01:59खामने खुद भी जो हां के सरवोच नेता है उन लोगों का अभी ये मानना ये सोचना है कि अभी
02:05वाली स्थिती को किसी तरह से टाल ले जाओ अगर टरंप का कारेकाल पूरा हो गया तीन साल बाद वो
02:11राश्टपती पत से हड जाएंगे उसके बाद फिर कोई खत्रा नहीं र
02:29डोनाल्ड टरंप का कारेकाल तो अभी देखा जाए चार साल तक बाकी है देखिए वहां पर राश्टपती कोई भी हो
02:39जाए वो हमेशा इरान के ऊपर दवाब बनाके रखेंगे
02:53हाँ इसमें सकतेता है देखिए जब तक जो बाइडन थे उन्होंने कभी भी इरान के ऊपर खुले आम हमला करने
03:02की धमकी नहीं दी
03:06लेकिन ये समझना पड़ेगा कि 1979 में जब इरानियन करांती के बाद से आयतला खौमीनी पहले थे अभी खौमीनी है
03:13सत्ता में
03:14चाहे वहाँ डेमोक्रेट्स पावर में रहें वाइट हाउस में या रिपब्लिकन्स हमेशा इरान के उपर आर्तिक प्रतिबंद लगते रहे हैं
03:23मिलिटरी दवाब बनाए रखा गया है
03:25सिर्फ इतना है कि डोनाल्ड ट्रम्प के कारेकाल में यानि पिछले साल फरवरी के बाद से डोनाल्ड ट्रम्प का जो
03:35वेक्तित तो है खलबली पैदा करने वाला वेक्तित तो है इरान के उपर थोड़ा ज़्यादा दवाब है
03:43डोनाल्ड ट्रम्प चाहते है कि अपने कारेकाल में करके इस होम वर्क को कम्पलीट करके जाएं
03:49तो क्या वो चार साल के अंदर आयतला खामानी की सरकार को गिरा पाएंगे
03:57मेरा आकलन ये है कि आयतला खामानी की वहाँ बहुत बड़ी फॉलोइंग है
04:02देखो शिया सुप्रीम धरम गुरू हैं वो दुनिया भर के शिया उनको मानते हैं भारत में भी जो शिया हैं
04:09उनको मानते हैं
04:10इरान के गाओं में दूर दराज के शित्रों में छोटे-छोटे कस्बों में उनको माना जाता है
04:16तो उनकी धार्मी कारणों की वज़ा से जमीनी पकड बहुत मजबूत है
04:21ये कोई वेनेजूला जैसा नहीं है कि बस गए कमांडो लेकर और निकोले मादरव को उठा के ले आए
04:28और कोई काउंटर फायर नहीं हुआ
04:33क्या वेनेजूला में तो हम अब आस्ते आस्ते पता ही लग रहा है कि
04:37अमरीका ने उनके वाइस प्रेसेंट को डिफेंस मिनिस्टर को और मिलिटरी के बड़े बड़े अफसरों को पहले से ही अपने
04:42बस में कर लिया था
04:43इस तरह का कोई सफलता इरान में अमरीका को कभी नहीं मिलेगी
04:50बिल्कुल दिवनात सर एक और सवाल है सौदी अरब और खासकर और भी मुस्लिम देशों की भूमका को लेकर भी
04:57लोग बहुत संदेह जाहिर कर रहे हैं
05:00कई सारी बाते सामने आती हैं एक बात तो ये सामने आती है कि इरान के जो आसपास पडोस के
05:05सारे मुस्लिम देश हैं वो नहीं चाहते कि युद्ध हो क्योंकि इससे वो भी प्रभावित हो सकते हैं लेकिन बहुत
05:12साए लोगों का ये भी कहना है खासकर सौदी अरब को लेकर
05:27साथी अरब के जो राज कुमार है वहां के जो राजा है किंग है वो कैसी सलाह दे रहे होंगे
05:32इस वक्त वाइट हाउस के अधिकारियों को खासकर ट्रम को
05:35हाँ इसमें कोई शक नहीं है कि दिती विश्यू युद के बाद से ही सौधी अरब जो है अमरीका के
05:41निकट रहा है क्योंकि अमरीका ने
05:44पचास के साठ के दशक में यानि कोल्ड वार के समय से ही सौधी के किंग को और अभी वहां
05:53प्रिंस है मोहमद बिन सुल्तान उनको भरोसा दिया हुआ है कि तुम राज करो अमरीका तुमरे पिछे है देखिए इन
06:04सब देशों में पस्चिमेशिया के देशों में सौधी अरे
06:08भी आप भी उसमें इंक्लूडेड है डेमोक्रेसी कहीं पर नहीं है कहीं पर किंग है कहीं पर प्रिंस है कहीं
06:14पर शाह है कहीं पर अमीर है इन सब लोगा ने अपने जनता को उभरने नहीं दिया जनता जो है
06:22खुले आम सरकार के बारे में कुछ बोल नहीं सकती है तो इन सब
06:27को डर है कि जनता किसी भी दिन विद्रोव कर सकती है खासत दोर से अगर
06:31जनता को लगे कि उनके शाशक ने इरान के खिलाफ युद्र में अमरीका का साथ दिया है तो
06:39जनता विद्रोवी कर सकती है ऐसा पहले हो चुका है तो सौदी अरिविया जो है
06:45फिलाल खुल कर अपनी जंता को नाराज करना नहीं चाहेगा
06:50दूसरी चीज है कि सौधी अरेविया भले ही सुनी मुलक हो
06:54लेकिन फिर भी वह दुनिया भर के जो
06:57दुनिया भर में देखे इरान तो एक शिया मुलक है
07:00और दुनिया के जो 46 मुसलिम देश हैं
07:03उनमें से काफी बड़ी तादाद में ऐसे मुसलिम देश हैं
07:06जहां शिया की तादाद काफी ज़्यदा है
07:10जैसे भारत में भी आप श्रीनगर चले जाएए
07:12लगनो चले जाएए, हैद्राबाद चले जाएए
07:14ये दिल्ली में आप देख लिए बड़ी तादाद में शिया रहते हैं, साओधी अरेविया दुनिया बर के शिया को भी
07:20नाराज नहीं करना चाहेगा, हाँ ये हो सकता है कि साओधी अरेविया मुह बन रखे और प्रिष्ट भूमी से अमरीका
07:28को कहे कि हुजूर आप जो मर्ज
07:42ये जंग होती है, तो इस जंग में कौन-कौन सी वो आवाजे होंगी, कौन-कौन सी देश होंगे, जो
07:48खुल कर अमेरिका के खिलाब बोल सकते हैं, या वो अपना विरोध दर्ज करवाएंगी।
08:12उनको लगता है कि एरान में हुमन राइट्स का वालेशन हुआ है, तो एरान की वो निंदा करते हैं, कडी
08:19निंदा करते हैं, लेकिन कोई भी यूरोप का देश इस युद्ध में अमरीका के साथ नहीं है, अच्छा, विरोध करने
08:28वाले काफी सारे देश हैं, जाहिर बात है
08:30दुनिया में जितने भी 56-57 मुस्लिम देश हैं, सब जगा अमरीका के, अमरीका जब इरान पर हमला करेगा तो
08:39उसका विरोध होगा, विरोध करने के लिए कुछ पश्चिमेशिया के देश भी विरोध कर रहे हैं, जैसे मैंने कहा क्योंकि
08:47उनको ये डर है कि उनके यहाँ प
09:01पश्चिमेशिया के देशों को मालूम है कि अगर युद्ध हुआ, तो युद्ध में उनका बम उनके यहाँ पर भी गिर
09:08सकते हैं, रॉकेट उनके यहाँ भी गिर सकते हैं, इरान ने कहा है, तो इराक को, कुवेट को, कवतार को,
09:15सब को डर है, कि इरान ने अमेरिकन बेसे
09:19पे जो rockets और missiles दागी उनसे उनके infrastructure को नुक्सान हो सकता है
09:24तो खुलकर अमेरिका के समर्थन में इसराइल के अलावा कोई नहीं आएगा
09:32विरोध करने वाले काफी होंगे
09:34definitely United Nation में फिर से रूस और चीन खुलकर परस्ताव लाएंगे अमेरिका के विरोध में
09:43जे
09:44दियोनासर ये विरोध जो होगा और शब्दों का ही होगा
09:47कोई सेन विरोध तो करने पाएगा अमेरिका का अगर युद्ध हुआ तो
09:52जी हाँ चीन देखिए बहुत दूर है
09:55तो चीन किसी भी हालत में अपनी आर्मी नेवी एरफोस को
10:02सिगनिफिकेंट मातरा में यानि युद्ध बदल सके उतनी बड़ी मातरा में इरान तक नहीं पहुँचा सकता
10:08दूसरी बात है शीजिंग पिंग अपने धै में बहुत क्लियर है कि उनका धै फिलाहल जो है शत्परतिशत के इंद्रित
10:16होना चीए ताइवान के एकी करण के लिए
10:19तो वो अपनी जो नेशनल पावर है नेशनल रिसोर्स हैं उसको इरान की दरफ डिसिपेट नहीं करेंगे खरच नहीं करेंगे
10:26जहां तक रूस की बात है रूस छोटे मोटे हेल्प दिता रहेगा लेकिन रूस के पास खुद ही हत्यारों की
10:35कमी पड़ रही है यूकरेन का युद लड़ने के लिए
10:38जो हम रोज के एनलेसिस के बाद में देखी रहे हैं कि रूस की फौज भी कोई बहुत ज़्यादा सक्सेस्फुल
10:45नहीं हो रही है युद दूमी में क्योंकि रूस की फौज के पास भी हत्यारों की कमी पड़ रही है
10:51तो वो इरान को ज़्यादा कुछ भेड नहीं पाएगा
10:56अब्सक्राइब एफ लूज टूज की लुज की एज लूज वर नहीं रहीं है अजे लुज श्यूद भी इन हमयां ज़्यादा
11:03अभी है आफ लूज़ दूज के लूज झाप लूज झाएब लूज धूज
11:05झाल
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