00:00ओम जैशिव ओमकारा, स्वामी जैशिव ओमकारा, ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अरधांगी धारा, ओम जैशिव ओमकारा
00:22एकानन चतुरानन पंचानन राजे, हन्सानन गरुडासन विष्वाहन साजे, ओम जैशिव ओमकारा
00:38दो भुज चार चतुर भुज दस भुज अतिसो हे, त्रिगुण रूप निर्खता त्रिभुवन जन मोहे, ओम जैशिव ओमकारा
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