00:00अंधेरा और बारिश की बुंदे, औरत चुपचाब बैठी थी, बिल्कुल शांत, जैसे वो वहाँ थी ही नहीं, संतोष ने बात
00:10शुरू करने की कोशिश की, संतोष कहते हैं, इतनी रात को अकेले, डर नहीं लगता, औरत सुनसान आवाज में कहती
00:19है, जो अकेला होता है, व
00:29कुछ अजीब हुआ, आटो का रेडियो अपने आप चालू हो गया, उसमें एक पुराना भजन बजने लगा, ओम नमस्षिवाय, संतोष
00:40ने रेडियो बंद किया, लेकिन कुछी सेकंड बाद, रेडियो फिर से अपने आप चालू हो गया, इस बार और जोर
00:48से, संतोष डरत
00:50हुए कहते हैं, मैडम, आपके साथ कोई और भी है क्या, औरत बिलकुल ठंडी आवाज में कहती है, क्या हुआ,
00:59डर लग रहा है, संतोष का चेहरा पीला पड़ गया, उसने रियर व्यू मिरर में देखा, और जो देखा, वो
01:07उसकी रूव तक हिला गया, पीछे कोई नहीं थ
01:10सिर्फ दो दिन पहले, उसी रास्ते पर एक औरत का मर्डर हुआ था, पुलिस को उसका शव जंगल के पास
01:18मिला था, खून से लत्पत, लोगों ने बताया था, वो औरत अकसर सफेद साड़ी पहंती थी
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