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ये वीडियो श्रीमद्भगवद्गीता - 10th जनवरी, 2026 (लाइव सत्र) से लिया गया है
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Transcript
00:00सबको रेलाईज हो गया कि हाँ हम बहुत दुखी हैं और उसका सोग भी मना लेते हैं लेकिन कुछ ही
00:07पलवाद सारा दुख भूल जाता है और फिर अपने दुनिया में मस्त हो जाते हैं इस रिपिटेशन को कैसे रोख
00:13सकते हैं
00:14भी करी इज़प आबरू होनी चाहिए लगण होनां चाहिए बस यही है और कुछ नहीं है पर हम लट फ्र
00:20हैं इस लट फंसे बाहर कैसे आए तुम अगर लट फोर होते हैं तो लात ठाने भी तुम्म्हें अनंत क्शमता
00:29होती हैं
00:30लाते पढ़नी चाहिए कि तुम्हें दिख जाए कि तुम लत्खोर नहीं हो अगर तुम लत्खोर होते तो जितनी लाते तुम्हें
00:36पढ़ती तुम खाते जाते लत्खोर की तो परिभाशा यही है लत माने लात खोर माने खाने वाला लात खाने की
00:42तुम्हारी क्षमता अनंत �
00:43नहीं है तुम लटखोर नहीं हो और जो कहें कि वो लटखोर है उसका समाधान यह है कि उसको इतनी
00:49लाते पड़े कि उसे दिख जाए कि उलतखोर नहीं है ऐसा लगता है अचारी जी कि
00:54जब लात पढ़ती है उस समय तक तो महसूस रहता है फिर आके कोई नम्ब कर जाता है
01:00यही है तो लात जब पढ़ती है उसके बाद कोई आकर मलहम लगा जाता है ठीक यही समझे है
01:07लात से मत मना करो, मलहम से मना करो
01:09उस घाव को दहकने दो, जखम को बहने दो
01:13इतनी जल्दी मलहम मत लगने दो
01:15जब जिन्दगी लात मारे तो इतनी जल्दी मनुरंजन की शरण में मत चले जाओ
01:18उस अपमान को भीतर दहकने दो, जलने दो अपने आपनों सम्मान को
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