00:00ये आज से नहीं, 1937 से लेकर विवादों में हैं
00:061937 में मौलाना बुलकलामाजाद, हुसेन अहमद मदनी, हसरत महानी वगएरा जो इस वक्त के बड़े आलिम थे
00:13उन्हें ने कॉंगरेस को लिख कर दिया था बाख़एदा, कि इसमें कुछ पंक्तियां ऐसी हैं, जो हमारी आस्ता के साथ
00:19टकराती हैं
00:20तो 1937 में कॉंगरेस ने एक रेजलिशन पास किया, और कहा कि हमने ये पंक्तियां हटा दी हैं, आजादी में
00:29ये पंक्तियां नहीं गाए जाएगी, जो मुस्लमान की आस्ता को चोट करती हैं
00:32उस वक्त हमामला खत्म हो गया, सम्विधान जब बना उन्नी सो नन्चास में, तो उसमें भी अभी वक्ति की अजादी
00:40ती गई और कहा गया, कि किसी पर कोई चीज थोपी नहीं जाएगी
00:452016 में राष्टगान को लेकर एक मुकदमा सुप्रीम कोट में आया, तो सुप्रीम कोट ने कहा कि राष्टगान के लिए
00:52गर कोई खड़ा भी नहीं होता है, उसके सम्मान में, तो भी उसको देश-द्रोही नहीं कहा जा सकता
00:58तो मेरा सपस्ट मानना ये है, और जितने भी मुसल्मान आलिम हैं, कि जिन पंक्तियों में राष्टगेत के अंदर मुल्क
01:09को मा, दुर्गा, सरस्वती, जनहारनी, जनम देने वाली, जनम लेने वाली, ये इलिम देने वाली, ये कहा गया है, ये
01:20हमारी आस्था से टकराती है
01:22तो हमारे पास ले दे के एक आस्था है, मुसल्मान के पास सरकारी नोक्रियां तो है नहीं, मुसल्मान बहुत बड़े
01:29कारोबारी तो है नहीं, ले दे कर हमारे पास आस्था है, अगर हम अपनी आस्था भी खो बैठें, तो हमारे
01:36पास कुछ नहीं बचेगा, इसलिए हम पर
01:52मुझे आजादी है अगर कोई हम पर थोपने की कोईश करेगा तो हम इतनी आसानी के साथ उसको परदाश करने
01:58वाले नहीं है जैसे हमने बाबरी मसीद के फैसले को परदाश कर लिया चुकि यह हमारी आस्ता का मामला है
02:04यानि इसकी अनिवारिता को लेकर जो वो कह रहे हैं आप भी उस बास से तफाब रहे हैं बिलकुर बिलकुर
02:09जो अठाइस के अंदर एक अठाइस जन्वरी में फरमान पारित हुआ है करेमंतराले की तरफ से के तमाम सरकारी जगाओ
02:18उपर इसको गया जाएगा इसके सम्मान मे
02:32को लेकर ये ठीक है हमारा सम्मेदानी का अधिकार है ये भी हम ये भी करेंगे लेकिन हम गाएंगे नहीं
02:38बिलकुल नहीं गाएंगे ये जो वंदे मातरम के तालुक से कानून बनाया जा रहा है या गौर्णमेंट के तरफ से
02:48जब रिकिया जा रहा है कि इसका पढ़ना ला�
03:02को अपने मजब पर काइम रहने की और अपने मजब पर चलने की आजादी है उसके भी ये खलाफ है
03:09और इससे लोगों के अंदर एक गम गुसा पैदा होगा और इसको मजब में जो चीज़ हमारे मजब में मना
03:23है उसको करने पर मजबूर किया जा रहा है ये पैगाम जाएग
03:27और सिर्फ एक खुदा को मुसल्मान ही नहीं मानते बलके मुसल्मानों के अलावा इसाई भी एक खुदा को मानते हैं
03:36सिख भी एक खुदा को मानते हैं इस तरी के से और भी मजब के लोग हैं कि जो सिर्फ
03:41एक खुदा को मानते हैं तो जमीन की परस्टिस जो है वो इस नाम म
03:47सिवाए खुदा के किसी और की पूजा परष्टिस अबादत नहीं की जा सकता
03:52लेकिन इतने दिनों के बाद इस मुद्दे को क्यों लेकर आई ये उसको लेकर क्या गया है
03:58ये वो हकूमत जो है वो उल्जाए रखना चाहती है
04:01कि लोग इसी मसले में उल्जे रहें
04:03और जो जो इनके खिलाफ चीजें बेनल अक्वामी इंटरनेशन लेवल पर आ रही है
04:08उस पर पड़दा डालने के लिए और मुल्क की तरकी किस तरीक से हो
04:13उन तमाम चीजों पर ये फैल हो गए है
04:16इसलिए सिर्फ इसी मुद्दे को वो जन्दा रखना चाहते है
04:19हमारे हम पर तालीम कम है
04:21इसलिए लोग इसी की तरफ लगे हुए है
04:24और बस यही हुकुमत का मनशाओ और मकसद है
04:27रजा एकड़मी के दरफ से क्या प्रोटेस्ट किया जाएगा कुछ आगे की
04:33अब देखिए इस सिर्फने में
04:35उल्माए कराम से मशुरा किया जाएगा
04:38कि हम किस तरीके से इहतिजाज करें
04:42और या फिर मशुरा करने के बाद सुप्रिम कूर जाए जाए
04:48और इसको किसी भी तरीके से नाफिज करने के
04:51नाफिज हो इसके लिए जो कुछ भी कोशिश की जा सकती है
04:55हो कि यहीं
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