Skip to playerSkip to main content
  • 2 days ago
नई दिल्ली में “वंदे मातरम्” को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कुछ मुस्लिम धर्म गुरुओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि इस्लाम में इबादत केवल अल्लाह की होती है, लेकिन देश के प्रति सम्मान और मोहब्बत से कोई परहेज़ नहीं है। वहीं कई अन्य धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने इसे भारत की आज़ादी के संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा प्रतीक बताया।
यह विवाद तब उभरा जब सार्वजनिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में “वंदे मातरम्” गाने को लेकर अलग-अलग राय सामने आईं। समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्र की एकता और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का प्रतीक है, जबकि विरोध करने वाले इसे धार्मिक मान्यताओं के दृष्टिकोण से देखते हैं।

Category

🗞
News
Transcript
00:00ये आज से नहीं, 1937 से लेकर विवादों में हैं
00:061937 में मौलाना बुलकलामाजाद, हुसेन अहमद मदनी, हसरत महानी वगएरा जो इस वक्त के बड़े आलिम थे
00:13उन्हें ने कॉंगरेस को लिख कर दिया था बाख़एदा, कि इसमें कुछ पंक्तियां ऐसी हैं, जो हमारी आस्ता के साथ
00:19टकराती हैं
00:20तो 1937 में कॉंगरेस ने एक रेजलिशन पास किया, और कहा कि हमने ये पंक्तियां हटा दी हैं, आजादी में
00:29ये पंक्तियां नहीं गाए जाएगी, जो मुस्लमान की आस्ता को चोट करती हैं
00:32उस वक्त हमामला खत्म हो गया, सम्विधान जब बना उन्नी सो नन्चास में, तो उसमें भी अभी वक्ति की अजादी
00:40ती गई और कहा गया, कि किसी पर कोई चीज थोपी नहीं जाएगी
00:452016 में राष्टगान को लेकर एक मुकदमा सुप्रीम कोट में आया, तो सुप्रीम कोट ने कहा कि राष्टगान के लिए
00:52गर कोई खड़ा भी नहीं होता है, उसके सम्मान में, तो भी उसको देश-द्रोही नहीं कहा जा सकता
00:58तो मेरा सपस्ट मानना ये है, और जितने भी मुसल्मान आलिम हैं, कि जिन पंक्तियों में राष्टगेत के अंदर मुल्क
01:09को मा, दुर्गा, सरस्वती, जनहारनी, जनम देने वाली, जनम लेने वाली, ये इलिम देने वाली, ये कहा गया है, ये
01:20हमारी आस्था से टकराती है
01:22तो हमारे पास ले दे के एक आस्था है, मुसल्मान के पास सरकारी नोक्रियां तो है नहीं, मुसल्मान बहुत बड़े
01:29कारोबारी तो है नहीं, ले दे कर हमारे पास आस्था है, अगर हम अपनी आस्था भी खो बैठें, तो हमारे
01:36पास कुछ नहीं बचेगा, इसलिए हम पर
01:52मुझे आजादी है अगर कोई हम पर थोपने की कोईश करेगा तो हम इतनी आसानी के साथ उसको परदाश करने
01:58वाले नहीं है जैसे हमने बाबरी मसीद के फैसले को परदाश कर लिया चुकि यह हमारी आस्ता का मामला है
02:04यानि इसकी अनिवारिता को लेकर जो वो कह रहे हैं आप भी उस बास से तफाब रहे हैं बिलकुर बिलकुर
02:09जो अठाइस के अंदर एक अठाइस जन्वरी में फरमान पारित हुआ है करेमंतराले की तरफ से के तमाम सरकारी जगाओ
02:18उपर इसको गया जाएगा इसके सम्मान मे
02:32को लेकर ये ठीक है हमारा सम्मेदानी का अधिकार है ये भी हम ये भी करेंगे लेकिन हम गाएंगे नहीं
02:38बिलकुल नहीं गाएंगे ये जो वंदे मातरम के तालुक से कानून बनाया जा रहा है या गौर्णमेंट के तरफ से
02:48जब रिकिया जा रहा है कि इसका पढ़ना ला�
03:02को अपने मजब पर काइम रहने की और अपने मजब पर चलने की आजादी है उसके भी ये खलाफ है
03:09और इससे लोगों के अंदर एक गम गुसा पैदा होगा और इसको मजब में जो चीज़ हमारे मजब में मना
03:23है उसको करने पर मजबूर किया जा रहा है ये पैगाम जाएग
03:27और सिर्फ एक खुदा को मुसल्मान ही नहीं मानते बलके मुसल्मानों के अलावा इसाई भी एक खुदा को मानते हैं
03:36सिख भी एक खुदा को मानते हैं इस तरी के से और भी मजब के लोग हैं कि जो सिर्फ
03:41एक खुदा को मानते हैं तो जमीन की परस्टिस जो है वो इस नाम म
03:47सिवाए खुदा के किसी और की पूजा परष्टिस अबादत नहीं की जा सकता
03:52लेकिन इतने दिनों के बाद इस मुद्दे को क्यों लेकर आई ये उसको लेकर क्या गया है
03:58ये वो हकूमत जो है वो उल्जाए रखना चाहती है
04:01कि लोग इसी मसले में उल्जे रहें
04:03और जो जो इनके खिलाफ चीजें बेनल अक्वामी इंटरनेशन लेवल पर आ रही है
04:08उस पर पड़दा डालने के लिए और मुल्क की तरकी किस तरीक से हो
04:13उन तमाम चीजों पर ये फैल हो गए है
04:16इसलिए सिर्फ इसी मुद्दे को वो जन्दा रखना चाहते है
04:19हमारे हम पर तालीम कम है
04:21इसलिए लोग इसी की तरफ लगे हुए है
04:24और बस यही हुकुमत का मनशाओ और मकसद है
04:27रजा एकड़मी के दरफ से क्या प्रोटेस्ट किया जाएगा कुछ आगे की
04:33अब देखिए इस सिर्फने में
04:35उल्माए कराम से मशुरा किया जाएगा
04:38कि हम किस तरीके से इहतिजाज करें
04:42और या फिर मशुरा करने के बाद सुप्रिम कूर जाए जाए
04:48और इसको किसी भी तरीके से नाफिज करने के
04:51नाफिज हो इसके लिए जो कुछ भी कोशिश की जा सकती है
04:55हो कि यहीं
Comments

Recommended