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  • 13 hours ago
जमाना भले ही स्मार्टफोन्स का हो, लेकिन रेडियो के लिए लोगों की दीवानगी आज भी कम नहीं हुई है.

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00:12जब रेडियो पर ही आता था सारे साथ बजे का समाचार उस वक्त रेडियो का मतलब था सूचना, मनुरंजन और
00:23जागरुकता का एक मात्र ठिकाना
00:25उस रेडियो को अब लोग करीब-करीब भूलने लगे हैं, लेकिन विश्व रेडियो दिवस पर एक बार फिर वो जमाना
00:34याद आ रहा है
00:37यानि विश्व रेडियो दिवस पर आपको लिए चलते हैं देश की राजधाने दिल्ली के कनाट पलेस
00:44जहां रेडियो एंड ग्रामोफोन हाउस में उन दिनों की यादें आज भी जीवनत हैं
00:511951 में अस्थापित इस दुकान में आप रेडियो के तिहास को खरीब से जान सकते हैं
01:14यहां पच्चास से लेकर करिब सौ साल पुराने रेडियो आज भी सुरक्षित हैं
01:20सबसे रोचक बात यह है कि यह सभी अब भी वर्किंग कंडिशन में हैं
01:25फिलिप्स पैनासोनिक और दूसरी कंपनियों के रेडियो रिकॉर्ड प्लेयर टेप रिकॉर्डर और ग्रामोफोन इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं
01:53इस दुकान पर दिलिप कुमार, राज कपूर, देवानन्द, जगजीश सिंग, जावेद अक्तर, वेगम अक्तर, रेश्मा और गुलाम अली जैसे नामचीन
02:04कलाकार आचुके हैं
02:05जिनकी यादों को यहां संजू का रखा गया है
02:08यहां तक की कई फिल्मों की शूटिंग भी यहां हो चुकी है
02:13इसे हमारे को रिकॉर्ड को मेंटेन करने में सारे गामा कंपनिक है
02:17जो बहुत हमारा फोना महत्तु देती है
02:20और मैं उसकी मैनिफेक्शिंग भी कराता हूँ
02:22जिससे लोगों को नए नए गाने मिलें
02:24आप पुराने से पुराने चीज़ मेले जो पहले लोग सुनते थे
02:26वैसा ही उन्हें फीलो दुबारे से
02:27इस डिज़्टल दौर में भी एनलोग म्योजिक का आकर्षन खत्म नहीं हुआ है
02:32बलकि युबाओं में रिकॉर्ड प्लेयर और विनायल रिकॉर्ड को लेकर फिर से रुची बढ़ी है
02:37सुनिल जैन का दवा है कि इसका उप्योग बले ही पहले जतना व्यापक नहीं हो लेकिन रेडियो कभी खत्म नहीं
02:44होगा
02:48एटवी भारत के लिए दिल्ली से धननजय वर्मा की रिपोर्ड
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