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  • 21 hours ago
Shiva श्रृंगार में क्यों शामिल हैं अजीब चीजें?

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00:00भस्म, सांप, डमरू, त्रिशूल, शिवजी के शुरंगार में क्यों शामिल हैं अजीब चीजें?
00:04पुराणों में भगवान शिव के स्वरू और शुरंगार के पीछे गहरे प्रतिकात्मक अर्थ बताये गए हैं।
00:08शिव साकार और निराकार दोनों रूपों में पूजे हैं। इसलिए उन्हें ओघड, फकड और महादेव कहा जाता है।
00:13उनका प्रतियेक शुरंगार जीवन के किसी न किसी सत्य की ओर संकेत करता है।
00:16समुद्र मन्थन में निकले विष को शिव ने कंठ में धारन किया, जिससे वे विषभोजी कहला है।
00:20गले में सर्प, कालचक्र और कुंडलिनी शक्ती का प्रतीक है।
00:23धतूरा और आग के फूल ये संदेश देते हैं कि सही उपयोग से विष भी औश्दी बन सकता है।
00:28मस्तक पर चंद्रमा करुणा और त्याग का प्रतीक है, जो अस्वीकार किये गए को भी अपनाने का भाव सिखाता है।
00:32शिव के हाथों में डमरू स्रिष्टी की नाद उर्जा का प्रतीक है, जबकि तीसरा नेत्र ज्यान और विवेक का संकेत देता है।
00:37त्रिशूल इच्छा, क्रिया और ज्यान शक्ती का प्रतीक माना जाता है।
00:40जटाओं में विराजमान गंगा संयम और संरक्षन का भाव दर्शाती है।
00:43महादेव का श्रिंगार ये सिखाता है कि आत्म संयम करुणा और विवेक से जीवन के विकारों पर विजय पाई जा सकती है।
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