00:00इस वक्त हमारे साथ जोड रही है ग्लोबल टीचर प्राइस 2026 विजयता रूबल नागी जी जिन्होंने रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन के जरिये कई जगाओ पर एडुकेशन और आर्ट का एक यूनिक कॉम्बनेशन कर काम किया है तक्रिबन 800 इनकी एडुकेशनल सें
00:30आप से जाना चाहेंगे कि 20 वर्षों से हम जानते हैं आपकी फाउंडेशन इस काम में जुड़ी हुई है कैसे शुरुवात हुई यो काम कैसे आगे बढ़ा है बहुत बहुत धन्यवाद और मैं यह कहूंगी कि जो मुझे जानते हैं वो यह हवेशा कहते हैं कि मैं आपने
01:00पुरिटी, इनोसेंस और अनकंडिशनल लव और बॉंड जो मेरे साथ है यह हुई मेरा सबसे बड़ा एक वो कहते हैं एक इंस्पिरेशन है जो मुझे हमेशा पुष करता है कि हम और आगे जादस जादस जादस बच्चों से जुड़ें
01:16आप क्या कर रहे हैं
01:46जाकि मैं अपनी तरफ से कैसे कॉंट्रिब्यूट करूँ कि मुझे दुबारा कोई ऐसा बच्चा ना मिले जिसने एक पैंसिल नहीं देखी
01:51क्योंकि I think पैंसिल भले आप स्कूल जाएं ना जाएं आपने देखी तो है
01:55तो कुछ ऐसे experiences होते हैं life में जो turning point बन जाते हैं आपकी life का तो ये एक वैसा experience था और उसके बाद हमने धीरे धीरे और मैंने क्योंकि मैं खुद एक artist हूँ
02:05मैं एक sculpture हूँ तो मुझे जब हमने art workshops की तो मैंने देखा बच्चों का number उस art workshop को attend करने के लिए हमेशा बहुत ज्यादा रहता था
02:15अगर आप classroom में जाके उनसे basic बात करेंगे पढ़ाई की तो वो interested इतने जादा नहीं होते हैं मतब दिखाते नहीं थे कि interest लेकिन जब मैंने जब भी भी कहा बच्चों से शुरुवात की बात बता रहे हूँ कि who wants to paint, कौन drawing करना चाहता है, कौन painting करना चाहता है तो जोर से ब
02:45आथिम से आप जादा से जादा बच्चों से जोड़ सकती हैं, तो 30 से शुरू करके 300-3000 ऐसे करते करते जब हमने workshops continue रखी और बच्चों की तादार, बच्चों का नंबर उसमें बढ़ने लगा, तो कहीं न कहीं मुझे भी as a teacher, as a social worker समझ में आने लगा कि art-based education से बच्चे �
03:15फोकस ये था कि हम learning को कैसे fun बना के रखें, इसलिए हमारी tag line भी है, educating through art, let's make learning fun, तो जब बच्चों को कुछ चीजों में, सीखने में, शिक्षा में मजा आने लगे, तो पढ़ाई भी आसान हो जाती है, जैसे हम भी अगर वो काम करें, जिससे हम खुश हैं, जिससे हम enjoy करत
03:45आपको दिमाग पे नहीं लगाना पड़ता, तो कहीं न कहीं, art-based education, जब हमने बच्चों में धीरे-धीरे introduce करना शुरू किया, तो हमने देखा कि जो बच्चे स्कूल नहीं भी आ रहे थे, वो भी आने लगे, जो बच्चे नहीं जाते थे, वो भी आके हमारे workshop कहने लगे क
04:15हैं, so that really helped us get children, but when I talk about creativity, I don't talk about only painting, I talk about poetry, music, drama, यह सब चीजें थी, जिन्होंने हमें बहुत, बोलते हैं कि holistic approach and growth for children, जिस नहें हमें बहुत help किया, आप जानते हैं, हमने बड़े-बड़े मूरल, slums में, villages में बनाए, और क्यूंकि आप मुझे कह रहे हैं कि बच्चों को कैसे �
04:45जैसे मैं आपको बता हूँ, मैंने जब पहला मूरल पेंट किया था, मेरे पीछे कुछ 10-20, 10-20 बारा बीस बच्चे भी नहीं थे, दूसरा किया तो थोड़े बढ़ गए, तीसरा किया तो दोसों के ओपर बच्चे पीछे खड़े थे, आउट फ कुरियोसिटी की टीचर क्य
05:15के बारे में बताया, पानी क्यों बचाना चाहिए, उसके ड्रोइंग के बादर हम से, तो हमारे जो वॉल मूरल्स थे, वो एक लिविंग टेक्स्ट बुक्स के जैसे बन गए, तो उनको सीखने में आसानी हुई, जैसे जब मैं स्कूल में थी, तो मैं पढ़ती थी, तो मु
05:45अगर अपने सिखाने में थोड़ा वो बोलते हैं कि ऐसा एक माधियम एड कर दे, जिससे बच्चों को सीखने में आसानी हो, तो बच्चे पढ़ाई को एंजोई करने लगते हैं, इसलिए हमारा नंबर बढ़ते बढ़ते बढ़ते, God is kind, बहुत सारे बच्चों तक हम पह�
06:15बच्चाना पड़ते हैं, उन एक्सपिरियंस उन दिनों के बार में पता हैं, जब आप अकेला पन्या आप एक तरह से स्ट्रगल था उस जर्नी में, देखिए स्ट्रगल तो अभी भी है, और स्ट्रगल चलती रहेगी, और मैं कभी भी स्ट्रगल को मैंने नेगिटिव नह
06:45जो आप, वो बुलते हैं कि आपको ये मौका मिल रहा, आप इतने भागेशाली हैं, कि आपको ये मौका उपरवाला दे रहा है, कि आप की जाये वो करिये जो आपको सबसे जाधा प्यारा है, जिस से आपको, जिस प्रोफेशन से आपको सबसे जाधा प्यार है, तो फिर हम
07:15आज मुझे सुबह से कष्मीर से वीडियो जा रही हैं बच्चे मदरसा में जहां पर हमारे कंप्योटर से चल रहे हैं वहां से कॉल जारी है मैं कॉंगरेचिलेशन की तो देजभर में जहां जहां पर हमने काम किया है
07:28be it one year, two year, three year, five year, ten year
07:32जो बच्चों की life में बदलाव आया है
07:36वो आज सामने दिखता है लोग बोलते हैं
07:39और challenges तब भी थे, अभी भी हैं
07:42लेकिन मैं believe करती हूँ hard work, hard work, hard work
07:45and I feel blessed कि मुझे ये मौका मिला है
07:48कि मैं बच्चों से जुड़ी हूँ, मैं महिलाओं से जुड़ी हूँ
07:50और हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं
07:52बहुत समय ऐसा, बहुत टाइम ऐसा हुआ है कि
07:54लोगों ने बोला है कि मैम आप क्या कर रही हैं
07:56आप murals बना रही हैं
07:58ये क्या होगा इसे
08:00कितने लोगों ने हमारी
08:01कलरस की बाल्टियां इनिशिली उठा उठा के
08:03बहार भी फैंग दिया हैं, बोला ने यहां नहीं हो कुछ
08:06पर तो उस समय आपको
08:08patience चाहिए, मैंने हमेशा देखा है
08:10प्यार से, patience से और respect से
08:11ऐसी कोई चीज नहीं है जो आप
08:13achieve नहीं कर सकते, अगर आप
08:15कोई अगर आप को understand नहीं कर रहा है
08:18हमने उनके साथ बैठे हैं
08:19बात किया है, उनको समझाया है कि हम यहां
08:21क्यूं है, और हमें यहां कोई
08:23किसी कोई agenda, कोई
08:25motive नहीं है, बस एक ही हमारा
08:27focus है, कि बच्चे पढ़ें
08:29महिलाएं अपने पैरों पे खड़ी हों
08:31तो जब लोग दीरे-दीरे समझना शुरू करते हैं
08:33और यह तो अब इतने 25-26 साल की
08:35journey है, कि
08:36अब तो ऐसा हो गए कि माम
08:38बोलें कि बच्चों को हमें ले जाना है
08:41parents मुझे पूछते भी नहीं है
08:43कि माम कहां जा रहे है
08:44पूछी है, हम पिकनिक पे जा रहे है
08:46मैं उनको बोलते हैं, ऐसे आपको नहीं सुनना है
08:47बच्चे कहां जा रहे हैं बस में बैटके
08:49नहीं हम आप हैं ना साथ में
08:51बच्चे हम बहुत सारे पिकनिक्स करते हैं
08:53ऐसे उनको एक बोलते हैं
08:54कि अगर आप एक्जाम में अच्छे मार्क्स लेंगे, क्लास में अच्छा करेंगे तो हम आपको मेकडॉनल्स ले जाएंगे या हम आपको लोधी गार्डन घूमने ले जाएंगे या हम आपको यहाँ पे अक्वेरियम मुजिम तो बच्चों को कुछ न कुछ इनिशेटिव �
09:24यह जाना चाहेंगे कि आपकी जन्दी में बच्चे स्कूल डॉप आउट्स का प्राइमरी रिजन किया रहा गरीबी रही या फिर कहीं ने कहीं पैरेंट्स की भी विलिंगनेस में कमी रही उनको एडूकेट करने बच्चे बहुत सारे रिजन्स हैं पहले जो मैंने देखे
09:54किया पैरेंट्स कॉंसिलिंग में निकाल दिया क्योंकि जैसे आप पूछ रहे थे ना क्या चैलेंज आए सबसे बड़ा चैलेंज हमारा लाइफ का ये था इनिशल स्टेज में कि पैरेंट्स को समझाना था कि बच्चों को स्कूल क्यों जाना है और खाली आठमी और आप �
10:24रहे होंगे जो स्कूल में कदम रक्यों ओल जी जी बहुत सारे तो मैंने उनको बोला कि क्या कारण है तो
10:38दो पूना में एक सुड़् रहती थे फूरा दिन स्लम में तो बच्ची आजाती थी तो एक ग्रूप आया बच्चों का स्कूल से तो बोल subst react करे तो मैंने
10:44तो कौन सी क्लास में, मैं 6th grade में, ऐसे इसके बाद आप secondary school जाएंगे, उसमें से तीन लड़कियों ने बोला, नहीं मैं हम नहीं जाएंगे, तो मैंने का आप क्यों नहीं जाओगे, नहीं मैं हमें वहाँ जाने का कोई साधन नहीं है, और हमारे parents नहीं हमें छोड़ेंगे, हम
11:14इसने बे स्टूटन से मैं जुड़ी हूँ, लड़कियों के सबसे पहले उची आवाज आती है, कि हमें आना है, हमें पढ़ना है, तो ये एक change मैंने देखा है, येस देरा multiple reasons कि बच्चे स्कूल तक क्यों नहीं पहुंचते हैं, तो वही gap हमें प्रिच करना है, और वो gap आ�
11:44पे नाशता भी कर लेंगे, खाना भी खा लेंगे, बैग्स मिल रहे हैं, आपको टेक्स्बुक्स मिल रहे हैं, शूज मिल रहे हैं, स्लिपर्स तक आज गवर्मेंट आपको दे रही है, तो हमारे साथ वो बोलते हैं कि ये एक collective effort है, कि यहां से भी अच्छा हो रहा है, हम भ
12:14हमने बच्चियां होंगी जिन्होंने आपके intervention से school जोइन कि और अज अपने career में successful होंगी?
12:44आपके अंदर कुछ दबा हो आए, लेकिन आप बोल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि आपको लग रहा है, मैं कैसे express करूँ, लेकिन एक paper और colors लेके भले आपको drawing करनी ना आती हो, अगर आप उस पे अच्छे से scribble भी कर दे हैं, कुछ भी बना देंगे ना, जो आपने feel किया है,
13:14सही माइने में कैसे सीख के अपने school से निकले, क्योंकि शिक्षा, education, खाली certificate लेने से, डिग्री लहात में लेने से नहीं होती है, सही संसकार, सही principal, बच्चों को अगर हम बच्पन से ही देंगे, घरों से, learning center से, school से, तो बच्चे आगे जाके, वो सब issues से, जिससे हमारा आ�
13:44अची चीजें उपर आएंगे, so right principles and right संसकार हमें बच्चों को जरूर देने चाहिए, और बच्चे बहुत fragile होते हैं, उनका मन बहुत pure होता है, आप उनको कुछ भी ऐसा बोलना है, ऐसा करना नहीं कर सकते, वो ही करेंगे, वो ही बोलेंगे, जो वो feel करते हैं, जो वो करना
14:14से जाके माम को congratulation करना है, लेकिन जैसे मैं बहार आ रहे थी, वो ऐसा चिला के भागे में तरह, तो मेरे हमारे जो एक टीम हैड़ बोलना है, मैंने बोला था हंगामा नहीं करना, तो मैंने उनकी तरफ देखा, मैंने का आपको लग रहा था कि आप बोलोगे, और बच्चे स
14:44बच्चों से, उनकी स्माइल से, उनकी खुशी से आता है, तो यह जो प्राइज इसे नोबल प्राइज भी टीचर्स का कह सकते हैं, आपको दुबज में गवर्मेंट, वर्ल्ड गवर्मेंट समित में मिला, आप इंडिया को वहाँ पर रेप्रेसेंट कर रही थी, क्या मान
15:14और मैं फॉजी की बेटी हूँ, तो मेरे लिए इंडिया पेट्रियोटिजम और फ्लाग मेंस अलॉट, हम बड़े हुए हैं उसी प्रिंसिपल से, तो मैंने जब देखा, तो honestly, उस सबे मुझे ऐसा लगा कि मैंने उंपर देखा, मैंने का, बगवान, मेरे देश की और रा�
15:44जालीज देशों से नॉमिनेशन थे जिसमें आपने यावर जी जी बिलकुल, और वो सब भी अपने कंट्री के लिए अपने लिए प्रे कर रहे थे, मैं भी कर रहे थी, बट कही ना कही एक हिंदुस्तानी, एक इंडियन होने के एमोशन ने शायद तो टेक ओवर कर लिया �
16:14जब नाम अनूंस हुआ और His Highness Sheikh Hamdan and Mr. Sunny Varki, Chem Education and Varki Foundation and Global Teacher Prize, मैं उनका बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहती हूं क्योंकि इतना अच्छा इनिशेटिव है, and I must tell you, which I don't think many people know, तो जब मैंने जीतने के बद हम बैठे थे तीम के साथ, बाक-to-back interviews हो तो मैंने उनके तीम के एक
16:44giving teachers their due respect, because मैं मानती हूं, teachers always matter, but they matter the most today, and teachers ही वो हैं, जो future leaders, future professions, जो shape करते हैं, not just India, worldwide, और तो उन्हों ने मुझे कहा कि आपको पता है, Rubal जी, जो हमारे chairman है, Mr. Sunny Varki, उनका ये thought process था कि हम ये Global Teacher Prize करें, और हम पोरी टीम ने हम उनको कहा कि इतना बड़ा प्राइस मनी एक आव
17:14मेरे, उनके दोनों parents भी teacher थे, so कहीं न कहीं उनका प्यार, उनकी respect teachers, उन्होंने अपनी मा और पिता जी, दोनों को बचपन से as a teacher देखा है, तो शायद ऐसे experience से जब आप गुजरे हैं, तभी आप इतने बड़े world stage पे, ग्लोबल stage पे इतना बड़ा award को आगे लेके जाने के
17:44मैं जब पैदा हुई थी, तो मेरे देवली के छोटे से गाउ में जमू के, वहाँ पे मेरे दादा दादी का घर मिटी का कमरा था जिसमें मैं पैदा हुई थी, इंटे भी उसमें नहीं लगी हुई थी, मेरे फादर एक सिंपल फॉजी थे, तो बहुत humble beginning से हमने शुरू कि
18:14अब ये सवल आपको पूछा जा रहा होगा कि प्राइज मनी के साथ क्या करेंगी तो ये भी आप बता हुई जी, देखिए, बैने तो कहा भी कि मेरा, हमारे तो वैसे और बहुत सारे सेंटर्स चल रहे हैं, बट मेरा एक बहुत सपना था जो मैं पिछले दो-तीन साल से दे
18:44स्किलिंग भी सिखाएं, तो वो, जी, जी, वोकेशनल ट्रेनिंग, बहुत सारी महिलाएं हैं देश में, जो हमारे साथ जुड़ी हुए वोकेशनल ट्रेनिंग लेके, और हमारा एक प्लैटफॉर्म है, स्टूडियो सक्षम, जो ओन डाइन शॉपिंग पोर्टल है, जो हम
19:14से हम उनको इसमें मदद करते हैं, तो ये, I think, my dream will come true now, और God willing, बहुत जल्दी हम उसकी inauguration करेंगे।
19:44करेंगे।
19:45करेंगे।
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