सवाईमाधोपुर. जिले की पंचायत समिति सवाई माधोपुर की ग्राम पंचायत सुनारी में मनरेगा कार्यों के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पीर बाबा वाली तलाई खुदाई स्थल पर श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज तो की गई, लेकिन मौके पर कोई भी मजदूर काम करता नहीं मिला। इस खुलासे ने मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोकपाल की जांच में खुली पोल
ईजीएस लोकपाल आशा शर्मा ने एनएमएमएस एप पर दर्ज उपस्थिति की रैंडम जांच की। मस्टरोल संख्या 17194 से 17199 तक करीब 45 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज थी। एप पर अपलोड फोटो में समानता देखकर लोकपाल ने तुरंत कार्यस्थल का निरीक्षण किया। मौके पर पहुंचने पर कोई भी श्रमिक मौजूद नहीं मिला।
स्पष्टीकरण में मिली बहानेबाजी
ग्राम विकास अधिकारी और मेट को बुलाकर जवाब मांगा। मेट ने श्रमिकों के भोजन पर जाने की बात कही, लेकिन लोकपाल ने एक घंटे से अधिक इंतजार किया, फिर भी कोई श्रमिक वापस नहीं लौटा। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि सुबह से काम शुरू ही नहीं हुआ था। स्थिति को गंभीर मानते हुए लोकपाल ने पंचायत समिति सवाई माधोपुर के विकास अधिकारी को पत्र जारी कर फर्जी मस्टरोल भरने के खिलाफ कार्रवाई करने और संबंधित मस्टरोल निरस्त करने के निर्देश दिए।
जनता में आक्रोश, पारदर्शिता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना गरीबों की आजीविका का सहारा है, लेकिन फर्जी उपस्थिति और भ्रष्टाचार से इसका उद्देश्य ही खत्म हो रहा है। इस घटना ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है।
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