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  • 2 days ago
चने की फसल में बढ़ जाता है इल्लियों का प्रकोप, किसान देसी जुगाड़ कर बचा सकते हैं अपनी फसल, पक्षी बनेंगे मददगार.

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00:00Ravie के सीजन में चना की जो फसल है वो महत्पूर्ण दरहनी फसल है
00:05आसे एनेग वर्ष पूर्व इस फसल की खेती सामानेते असिंचित दशा में की जाती थी
00:14किन्तु अब बर्पमान में ज्यादा पैदावार प्राप्त करने के लिए किसान इसे सिंचित अवस्था में भी खेती कर रहे हैं
00:24और रासायनिक उर्वर्वर्वों का उप्योग भी करते हैं
00:27क्योंकि दलहनी फसल ताकर्तिक रूप से वातावरण में उपसित नतरजन का उप्योग करती है
00:34राइजयोवियम बैक्तिविया के माध्यम से जड़ों में ग्रंथियों के माध्यम से
00:39किन्तु हमारे किसान भाई अधिक पैदावार प्राप्त करने की चाहे में
00:45इसमें सिचाई के सांसांत यूरिया का भी उप्योग करने लगे हैं
00:49जिसके कारण से चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ने की संभावनाय बढ़ जाती हैं
00:55और जब इस सीजन में जब बदल होते हैं
00:59और बदल तीन-चार दिन लगातार हो जाएं
01:01सूर का प्रकास कम हो जाए
01:03तो इसके इल्ली के पनपने की संभ्या और तीवता बढ़ जाती है
01:07तो हम अपने किसान भाईयों को पहले तो सुरक्षात्मा
01:11रूधात्मा को पाए बताते हैं
01:14कि वो लखडी के एक सीखे अकार की खूटियां
01:17अपने फसल में लगाएं
01:19लगभग 10-12 खूटियां प्रती एकड हमको अपने खेत में प्रती एकड लगाना चाहिए
01:25इन खूटियों पर जो पक्षी हैं
01:30गोरईया है, चिडिया है, तोता है, मैना है
01:33ये बैठते हैं और उनकी नजर बड़ी तीव्ष्णों होती है
01:47अपने की फसल फली बनने के वस्था पर आजाया, उसमें डानों का विकास होने लगे
01:52तो उनको निकाल देना चाहिए
01:54अब बात करते हैं कि यजि हमने टीके अकारी खूटियां नहीं लगाई है
01:58और हमारी फसल में इल्ली के नुकसान की संभावनाई दिखने लगी है
02:05खासोज बड़्दल मौले मौसम में
02:07तो हम अपने किसान भाईयों को कहेंगे
02:09कि आप सुरक्षात्मा को पाय के रूप में
02:12नीम के तेल का च्रकाव करें
02:14पांच प्रतिक्षत का गोल मनाए
02:16और उसका च्रकाव करें
02:18यदि आप ये भी नहीं कर पाये हैं
02:22तब हमें रासाइनिक कीट नाशकों का उप्यों करना चाहिए
02:25और मैं तो ये कहूंगा
02:26कि बड़्दल की अवस्था में
02:28आप रासाइनिक कीट नाशकों का प्लारम में ही छ्रकाव करने
02:33ताकि ये इल्ली ज़्यादा संख्या में बढ़ने ना पाए
02:36तो उसमें सबसे अच्छा
02:37जो हमारे पास में दो कीट नाशक हैं
02:40पहला है इमा मेक्टिन बेंजोएट
02:42जो 5% SG के फार्मूलेशन में उपलब्द है
02:45और 40 ग्राम प्रती एकल की दर से इसका छ्रकाव किया जाता है
02:50और दूसरा है इंडक्सा कार 14.5% SC
02:55इसकी जो है मातरा का उप्योग हमको करना है
02:58तो इस प्रकाद से हम
03:00अपनी चने की फसल को इल्लियों से बचा सकते हैं
03:04और अधिज्योग किसान भाई
03:06जैविक नियंतरन की ओजाना चाहते हैं
03:09तो वो फैरमेंट ट्रेक का उप्योग करें
03:11जिससे की हम नरमादा के
03:13उनको पकर के
03:15उनकी आंगे की संख्या को बढ़ने से रोख सकते हैं
03:18और दूसरा है
03:19NPP वाइरस का उप्योग
03:20इसका भी उप्योग हम करके
03:22अपनी केने की फसल को इल्लियों से बचा सकते हैं
03:25ये जो
03:27नुकसान की बात है
03:29तो यदि हम किसी भी प्रकार का
03:31सुरक्षात्मों को पाये नहीं कर रहे हैं
03:34और फसल में सिचाई भी दे रहे हैं
03:35यूरिया का भी उप्योग कर रहे हैं
03:37और उपर से भी बदल वाला मौसम उसको मिल जाए
03:40बादल चायर है दो चार दें तक
03:42तो इनकी संख्या तेजी से बरती है
03:44और ये नुकसान की खीमा जो है
03:4625 से लेकर के 50-60%
03:48तक हो सकती है
03:49इसलिए सुरक्षात्मों को पाये
03:52ज़्यादा बहतर हैं और उसके बाबदुद
03:54बेजी कीटा आता है तो हमको रसायनी
03:56कीटनासर काउप्यों करना चाहिए
03:58और इसके जो नर्मादा होते हैं
04:00वो लगभग 10 से लेकर के
04:0250 किलोमीटर की दूरी तै कर सकते हैं
04:05एक रात में और उसके इनको
04:06हवा का साथ मिल जाए तो
04:08इससे भी ज़्यादा वो दूरी तै करके
04:10नए शेत्रों में पहुँच करके
04:12नुकसान कर सकते हैं
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