00:00नमस्ते, चलिए आज GST के एक बहुत ही important, मतलब एक बहुत ही खास पहलू को समझते हैं, जब कोई business बिकता है या किसी और company में मिल जाता है, तो उसके जमा हुए input tax credit, यानि ITC का आखिर होता क्या है, तो चलिए इस पूरे process को एकदम करीब से देखते हैं,
00:17हाँ, तो सबसे बड़ा सवाल यही है, सोच ये ज़रा, एक company सालों से चल रही है, उसने अच्छे खासे tax credits जमा किये हैं, और अब वो किसी दूसरी company का हिस्सा बनने जा रही है, तो उन credits का क्या होगा, क्या वो laps हो जाएंगे, या उन्हें transfer किया जा सकता है, यही वो पहेली है
00:47करनी होती है, यह असल में काम कैसे करता है, और कुछ special cases में क्या rules है, और आखिर में हम सबसे जरूरी बातों को फिर से दोराएंगे, ठीक है, तो शुरू करते हैं, देखिए, इस पूरे process की जरूरत ही तब पढ़ती है, जब कोई बड़ा business event होता है, जैसे किसी company के बिकरी ह
01:17form GST ITC 02, समझे ये वो legal tool है, जो एक business को अपना जमा किया हुआ input tax credit, यानि ITC नए business को सौपने की इजाज़त देता है, इससे ये पक्का हो जाता है, कि business का जो मेहनत से कमाया हुआ credit है, वो बेकार ना जाए, और पूरा process एकदम पारदर्शी रहे, अब देखिए, इस form को भर
01:47checklist मान सकते हैं, जिसके बिना आप आगे बढ़ी नहीं सकते, तो ये जो points आप देख रहे हैं, ये बहुत बहुत जरूरी है, सबसे पहले, business का transfer legally होना चाहिए, दूसरा, पुरानी और नई, दोनों कमपनियों का GST registered होना जरूरी है, पुरानी कमपनी को अपने सारे पुराने
02:17हाँ, इस पूरे process में एक और चीज है, जो एकदम जरूरी है, और वो है एक practicing CA या cost accountant का certificate, ये certificate असल में इस बात को confirm करता है, कि business का transfer वाकई हुआ है, और इसमें सभी assets के साथ साथ सभी देंदारियां भी transfer हुई है, ये एक बहुत important step है, ताकि कोई fraud नहों और पूरा process एकदम
02:47कौन कौन से credits आप transfer कर सकते हैं और कौन से नहीं, चलिए देखते हैं, आप ये जो आप देख रहे हैं, ये समझना बहुत जरूरी है, देखिए, सिर्फ वही ITC transfer होगा, जो आपके electronic credit laser में मौझूद है और matched है, चाहे वो CGST हो, SGST, IGST या CES हो, कोई भी provisional या unmatched ITC, मतलब ज
03:17नहीं, इसे एक simple से example से समाझते हैं, मान लिजे जो कंपनी अपना business transfer कर रही है, उसके electronic credit ledger में CGST के 2,00, SGST के 2,00, और IGST के 1,5,00, रुपे हैं, तो सिर्फ ये total 5,00, रुपे ही हैं, जो ITC 02 के जरिए transfer किये जा सकते हैं,
03:36ओके, तो अभी तक तो हमने बात की उस company की जो credit transfer कर रही है, पर इस कहानी में एक दूसरा केदार भी तो है, वो company जिससे ये credit मिल रहा है, याने transferi, उसका क्या role है, और उसके एक फैसले से क्या-क्या हो सकता है,
03:52तो होता ये है कि जैसे ही transferer form ITC 02 फाइल करता है, transferi को GST portal पर एक notification आता है, और मज़े की बात ये है कि transferi के पास final submission से पहले अपना फैसला बदलने का option होता है, वो accept और reject के बीच जितनी बार चाहे अपना फैसला बदल सकता है, जब तक वो final submit नहीं कर देता, और इस फैसले क
04:22अगर transferi accept करता है, तो ITC transfer करने वाली company के ledger से कम हो जाता है, और जिसे मिल रहा है, उसके ledger में जुड़ जाता है, और अगर वो reject कर दे, तो simple, ITC वापिस transferer के खाते में चला जाता है, कुछ भी transfer नहीं होता
04:37अब देखिए, business की दुनिया हमेशा सीधी साधी तो होती नहीं है, कुछ special cases भी होते हैं, जैसे की demurger जहां एक company तूट कर दो या जादा नहीं कमपनिया बन जाती हैं, इन cases में rules थोड़े से अलग हो जाते हैं
04:51demurger में क्या होता है, कि पूरा का पूरा ITC किसी एक नई company को नहीं दे दिया जाता, बलके ITC को नई units के बीच, उनके assets की value के ratio में, मतलब अनुपात में बाटा जाता है, ये एक बहुत ही important point है
05:07चलिए इसको भी एक example से समझते हैं, मान लीजिए company demurge होती है, और उसके जो total assets हैं, वो दो नई units, X और Y में, 60-40 की ratio में बढ़ जाते हैं, जैसा कि आप इस chart में देख रहे हैं
05:22अब अगर पुरानी company के पास total 10 लाक रुपए का ITC था, तो unit X जिसके हिस्से में 60% assets आये हैं, उसे मिलेगा ITC का भी 60%, यानि 6 लाक रुपए
05:35और बिल्कुल वैसे ही unit Y, जिसके पास 40% assets हैं, उसे मिलेगा बचा हुआ 40% ITC, जो हुआ 4 लाक रुपए
05:45तो याद रखने वाली बात क्या है? बटवारा हमेशा assets के ratio पर ही होगा
05:49ठीक है, तो हमने इस पूरे process के लगबग हर पहलू को समझ लिया है
05:53तो चलिए, फटा-फट से इस पूरी बातचीत के जो सबसे जरूरी points हैं, उन्हें एक बार दोहरा लेते हैं, ताकि वो दिमाग में बैट जाएं
06:01तो जो key points हैं, जो बातें याद रखनी हैं, वो ये हैं
06:05सबसे पहले तो form ITC-02, business restructuring में credit transfer के लिए काम आता है
06:11दूसरी बात, सिर्फ matched और available ITC ही आप transfer कर सकते हैं
06:15तीसरा, transfer से पहले सारे GST returns और देंदारियां एकदम clear होनी चाहिए
06:20चौथा, एक CA या cost accountant का certificate जरूरी है
06:24और आखरी बात, demurger के मामले में ITC का बटवारा, assets के ratio के हिसाब से होगा
06:29तो इस सारी जानकारी के बाद, एक सवाल मन में आना तो लाजमी है
06:34कि अगर भविश्य में किसी business के साथ ऐसा कोई बदलाव हो
06:39तो क्या वो इस credit transfer के process को एकदम smoothly बिना किसी दिक्कत के पूरा करने के लिए तयार है
06:46इस सवाल पर सोचना बहुत जरूरी है
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