00:00एक छोटे से गाव में एक नन्ही सी गोरयया रहती थी। वो रोज पेड से उड़कर खेतों में दाने चुनती और खुश रहती। एक दिन उसे जमीन पर कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। वो पास गई तो देखा वो एक सोने का सिक्का था। गोरयया बोली। वाह! अग
00:30मैं राम, मेरा सोने का सिक्का कहीं गिर गया। गोरयया उड़कर उसके पास गई और चह चहा कर बोली। चूचू, क्या आप ये सिक्का ढून रहे हैं। किसान की आँखों में खुशी के आंसू आ गए। हाँ बेटी, यही मेरा सिक्का है। किसान ने गोरयया को धन्यवा�
01:00मेरा सिक्का कर बोली।