00:00दिल्ली की रादनीती में अचानक भूचाल सा आ गया है। सुप्रिम कोट की चोखट से निकलते ही ममता बनर जी ने ऐसा सियासी बम खोड़ा है जिसकी गूंज संसत तक सुनाई देने लगी है।
00:11चुनावायोक पर खुले आम सवाल उठाने के बाद अब उनकी नजर देश के मुख चुनावायोक ग्यानेश कुमार पर टिक गई है। बात सिर्फ आरोपो की नहीं रही बात अब कुरसी हिलाने तक पहुच गई है। तर्मूल कॉंग्रेस ने महाभियोक का रास्ता दिखा �
00:41चुनावायोक ने बंगाल को चुनकर निशाना बनाया है। जो काम सामाने हालत में दो साल में पूरा होता है। उसे तीन महीने में निप्टाने की कोशिश हो रही है। ममता इसे प्रशासनिक फैसला नहीं बलकि एक सुनियोजित राधनीतिक चाल मानती हैं। जिसका मकसद
01:11भाव हो रहा है। उनका कहना था कि जब हर दरवाजा बंध होता दिख रहा है तब आखरी उम्मीद हमें न्याय पालिका से ही नजर आ रही है। हलाकि कोट ने चुनावायोक के नोटिस वापस लेने की मांग को व्यवहारिक नहीं माना लेकिन ममता का आक्रमक रुख वहीं
01:41और अन विपक्षी दलों से संपर्क साधना शुरू कर दिया। कॉंग्रेस ने माना है कि टीमसी ने संसद में महावियोग प्रस्ताव लाने को लेकर उनसे बातचीत की है। हलाकि पार्टी ने अब तक साफ तोर पर समर्थन नहीं किया है। केसी वड़गोपाल ने जरूर
02:11बढ़ रहा है। अगर विपक्षी दल एक सुर में आ जाते हैं तो संसद में महावियोग का प्रस्ताव आना कोई असंभो बात नहीं लगती। भले ही उसे पास कराना आसान ना हो।
02:41चुप रहना अपराध होगा। दूसरी तरफ चुनाव आयोग और केंसरकार फिलहाल सयमित प्रतक्रियाएं दे रहे हैं। आयोग का कहना है कि S.I.R. एक सामान प्रतक्रिया है जिसका मकसद मद्दाता सूची को दुरुस्त करना है लेकिन ममता इसे मानने को पैयार नहीं ह
03:11एक बातता है सुप्रीम कोर्ट से शुरू हुई ये लडाई अब संसत की दहलीज तक पहुँच चुकी है और आने वाले दिनों में इसका असर दूर तक दिखाई दे सकता है।
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