00:00और भारत अमेरिका ट्रेड डील पर मोहा लगने हिबार सरकार भलोसा दिला रहे कि
00:03इसमें किसानों केतों से कोई समझोता नहीं किया गया बलकि इससे भविश में किसानों को फाइदा होगा
00:09भारत अमेरिका ट्रेड डील पर केंदे कृषी राजमंत्री शेवराथ सिंग चौहान ने आस तक से खास बाद चित की
00:14नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग आप देख रहे हैं आज तक
00:19यहां हम दिल्ली में मौझूद हैं लेकिन किसानों के बीच बैठ कर ऐसा लग रहा है जैसे कि एक छोटा सा गाउं यहां पर बसा हुआ है कृषी मंत्री हमारे साथ हैं अलग-अलग राज्यों से आई हुए किसान है आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है कृषी मंत्री
00:49रूप भी लग रहे हैं बजट में जो आवंटन है वो बढ़ा है पर वो किस रूप में किसानों के लिए जा रहा है और किस रूप में आगे आवश्यक्ता है उसकी भी बात है अब एक और VB. जी- राम जी को ले कर भी बहुत सारी बाते हो जाती हैं तो इन सारी चीजों को
01:19राहुल गांधी आप पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि बेच दिया है देश के किसानों को इस डील के जरिया
01:26अखिलेश यादव कहते हैं कि देश के किसानों के साथ धोखा हुआ है
01:30कुछ किसानों के मोर्चे कहते हैं कि
01:32यूएस इंपिरिलिजम के प्रेशर के सामने
01:35आप लोग सरेंडर कर चुके हैं
01:36क्या किया है आप लोगों ने
01:38क्या वाकई किसानों के हितों का नहीं सोचा
01:40राहुल गांधी
01:43जूट की दुकान
01:45ब्रहम की मसीन
01:48और अव्वाहों का बाजार बन गए
01:51एक के बाद एक जूट बोले जा रहे
01:56एक बात के लिए मैं
02:03ऐसा जूट हिम्मत के साथ बोलना
02:06ये भी अपने आप में एक अनोखी बात है
02:11लेकिन मैं आपके माध्यम से
02:15देश के किसानों को आस्वस्थ करता हूँ
02:20मोदी जी के नेतरत में किसान हित
02:25पूरी तरह सुरक्षित
02:27राश्ट पृथम
02:30लेकिन मैं तो विपक्ष से भी पूछना चाहता हूँ
02:36आप लोगतंत की धज्यां उड़ा रहे है
02:41मर्यादाओं को तार-तार किया जा रहा है
02:45बांड़िज मंत्री को बोलने नहीं दिया जा रहा
02:49बिक्सित भारत जी राम जी के समय
02:52मैंने पूरे अपोजिशन को ध्यान से सुना आधी रात के बाद तक
02:57और जब हम बोलने खड़े हुए तो बोलने नहीं देंगे ये कौनसा लोगतंत्र है
03:01लगातार जूट बोलकर भ्रहम फैला कर अराजकता फैलाने की कौसे से ये
03:10मोदी जी के विरोध में इतने अंधे हो गए हैं कि देश का भी विरोध करने लगे हैं
03:17और देश की जनता ये देख रही है
03:19चिवराजी दिरसल प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने ये कहा था
03:23जब टारिफ्स की और ट्रेड डील की बात आ रही थी
03:25कि मुझे निजी तोर पर भी निशाने पर लिया जा सकता है
03:31लेकिन मैं देश के किसानों का अहित नहीं होने दूँगा
03:34और आज जब इस ट्रेड डील की बात आती है
03:37तो ये सवाल उठता है चोकि वहां की भी जो क्रिशी सेक्रेटरी है
03:41उनकी तरफ से ये बात कही गई कि बड़ा अच्छा डील हुआ है
03:45तो इसलिए सब कहने लगे कि ऐसा तो नहीं कि भारत के बाजार भर जाएंगे
03:49उनकी क्रिशी उत्पादों से जो अब तक हम बचाने की कोशिश कर रहे थे
03:53मोदी जी ने कह था मैं देश नहीं जुकने दूँगा कभी देश जुकने नहीं दिया
03:58मोदी जी ने कह था कितना भी नुकसान हो जाए
04:02लेकिन किसानों के हित पे आच नहीं आने दूँगा
04:05आच नहीं आने दी
04:08हमने मुख्य अनाज डेरी उत्पाद
04:15हमारे प्रमुक्फल
04:18सब को सुरक्षित रखा है
04:21ऐसा कोई बाजार नहीं खुलना
04:24जिसमें हमारे किसानों का अहित हो
04:26नुक्सान हो
04:27उल्टे मैं ये कहना चाहता हूँ
04:30टेरिव घटने से
04:32अब हम चावल का नर्याद करते हैं
04:35चावल के भंडार भरें
04:36चावल का सबस्बड़ा उत्पादक देश से भारत
04:3963,000 करोड रुपे का चावल
04:41पिछले साल हम दे नर्याद किया
04:42अब टेरिव घटने से
04:44हमारा बासमती हो बाकी चावल हो
04:46उसको नया बाजार मिलेगा
04:48हमारे मसाले नर्याद होंगे
04:50टेक्स टायल का अंद्रयाद बढ़ेगा
04:52तो किसानों कोई फाइदा एक अपास
04:54उत्पादक किसानों को फाइदा होगा
04:56अब कोई देश ये थोड़ी कहेगा
04:59कि हमें घाटा हुआ है
05:00वो अगर कहेंगे तो उनकी बात कहेंगे
05:03लेकिन मैं फिर कह रहा हूँ
05:05जिम्मेदारी से कह रहा हूँ
05:07भारत का किर्शी मंत्री कह रहा है
05:09प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद
05:12किसानों के हित पूरी तरह से
05:14सुरक्षित रखे गए
05:15क्या जो इंपोर्ट है
05:18उसके बढ़ने से
05:19चाहे हम येरोपियन डील की बात कर लें
05:22अमरीकी डील की बात कर लें
05:24इसके बावजूद आप आश्वासन दे सकते हैं
05:27और दे रहे हैं देश के किसानों को
05:29कि किसी भी कीमत पे अहित
05:31ऐसा नहीं हो सकता
05:32इस डील के जरिये जिसमें
05:35उनके भी सामानों को छूट मिलेगी
05:37हमारे भी सामानों को
05:38रहत रहेगी
05:40मैंने फिर कहा कि पूरी तरह से
05:42किसानों के सुरक्षित है
05:43हाँ कुछी चैनल हमें मंगानी पड़ती है
05:46मंगानी पड़ती है अपनी जरूरत के लिए
05:48अगर दालों का उत्पादन
05:50इतना नहीं होता कि हम अपनी
05:52जरूरत पूरी कर सकें
05:54तो हम दाल मंगाते हैं, हम कौसिस कर रहे हैं कि दालों में भी आत्मनिर बर हो जाएं
05:58तिलहन का उत्पादन इतना नहीं होता हमारे हाँ
06:02कि हम पेल की जरुवत पूरी कर पाएं
06:04तो कुछ तिलहन आयात करते हैं, कुछ फलेंसे हैं
06:08कि जिनकी हमारे देश को जगुरत पड़ती है, हम लगातार कोईसिस कर रहे हैं कि इनका उत्पादन बढ़ा के भी हम आत्मे निर्वर हो जाएं, लेकिन जिन चीजों की हमें जगुरत पड़ती है, वो हमको बुलानी पड़ती है, आपको बता है कि अभी भी अमेरिका हो जा�
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