00:00लीबिया की रात एक बार फिर गोलियों की आवाद से काप उठी, जिस नाम को सालों से भुला दिया गया था, वही नाम अचानक सुर्खियों में लोट आया।
00:10करनल गदाफी का बेटा सैफ अल इसलाम गदाफी, वही शक्स जिसे कभी सत्ता का उत्राधिकारी माना गया, अब गोली लगने की खबरों के साथ चर्चा में है, पिता की तरह उसकी भी कहानी हिंसा, डर और रहस के बीच खत्म होती दिख रही है।
00:27खबरों के मताबिक 53 साल की उमर में सैफ अल इसलाम गदाफी की गोली मार कर हत्या कर दी गई, बताया गया, जिंतान शहर में उनके आवास पर चार हत्यार बंद लोग पहुचे, ताबर तोड गोलियां चलाई और मौके से फरार हो गई, हमला किस ने किया और क्यों किया, इ
00:57है, सच क्या है, ये अभी भी दुंद में छिपा हुआ है, लेकिन इतना तो तै है कि इस खबर ने लीबिया को फिर से हिला दिया है, सैफ अल इसलाम सिर्फ गदाफी का बेटा नहीं था, वो सत्ता के गलियारों में पला बड़ा चेहरा था, 1972 में जन में सैफ को उनके पिता
01:27सुधारने में एहम भूम का निभाई थी, उन्होंने परमाण हत्यार कारकरम से पीछे हटने के लिए अपने पिता को मनाया भी था, जिससे लीबिया पर लगी अंतराष्टिये पावंदियां हट गई थी, इसी वज़ा से उन्हें सुधारवादी नेता के तौर पर देखा
01:57इसके बाद सैफ अल इसलाम पर आरोप लगे कि उन्होंने विरोत परदर्शनों को कुचलने में कुरूर भूम का निभाई थी, अंतराष्टिये अपराद नियायाले ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराद का मामला चलाने की कोशिश की, ट्रिपोली की अदालत ने साल 2015 म
02:27इसके बाद सैफ ने खुद को रादनीती में फिर से स्थापित करने की कोशिश की, 2020 में उन्होंने राश्टपती चुनाव लड़ने का एलान किया, लेकिन चुनाव अनिशित काल के लिए चल गया, उन्होंने हमेशा कहा सत्ता कोई खेत नहीं जो विरासत में मिले, लेकिन
02:57है जबकि पूर्वी लीबिया में दूसरी सत्ता का प्रभाव है, अलग-अलग मिलिशिया गुट, कमजोर शासन और अधूरी रादनीतिक प्रकरिया ने देश को आस्थिर बना दिया है, ऐसे माहोल में सैफल इसलाम की हत्या की खबर ने पुराने जक्व फिर से हरे कर दिय
03:27अधिकार उलंगन और डर का माहोल हमेशा बना रहा, 2011 में उनकी मौत के साथ एक युग खत्म हुआ, लेकिन आबे उस्था अभी भी खत्म नहीं हुई है, अब सैफल इसलाम की मौत की खबर ने यही सवाल खड़ा कर दिया है, कि क्या गदाफी परिवार की कहानी भी उसी ख
03:57आगी
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