00:00अन्यदाता कहते हैं न हम और यह अन्य भी मतलब यहाँ पर जितनी भी चीज़ें हम इसमें दिखा रहे हैं बजट का हलवा जो पकार है वो हमारे अन्यदाताओं के कारण है लेकिन हर बार मतलब थोड़ा तो देखिए उसमें और भी संगठन भी हो जाते हैं बहुत सारे तो �
00:30किसान के आने वाले वक्त में ऐसी सिती आपकी सरकार ना देखे उसके लिए क्या पिछले आट-दस साल में जो MSP का दाइरा है वो बहुत बढ़ा है जो पहले पांस-साथ क्रॉप्स थी आज उनके नंबर ऑफ क्रॉप्स इंक्रीज हुए है और तेज क्रॉप्स और हर वर्
01:00ऑबदल गए है ये बदाम है और ये अखरोट है सर इस बदाम का हम उपफुभोक करते हैं पर ये आँ रखा है हमारे देश में कैलिपॉर्णिया से ये अकरोट है इसको भी हम लोग खाते है ये ज्यादर तरा आता है इरान या अफगानिस्तान से
01:17और ये किश्मिश है, ये हमारे नाकपूर के किसानों से के यहां से आती है, इच्छल करन जी, अकोला वहां से आती, इसलिए सबसे पहले तो मैं ये डालता हूँ, क्योंकि ये हमारे अन्यदाताओं का पसीना इसमें लगावा है, तो एक तो what we eat in India, we should grow in India, जो हम खा रहें इं
01:47ये जो आपने फरमाया, जैन जी ने, क्लाइमेट रेजिलियन्स जो एगरिकल्चर है, क्योंकि अब भारत की भोगलिक परिस्तिती ऐसी है, कि हम दुनिया की हर फसल, हर चीज उगा सकते हैं, पिर भी सर इंपॉर्टेट ड्राइफूट्स की मांग से जाए हैं, तो एक तो �
02:17में हो ही रहा है, वो मामरा बादाम से बेकर क्या है, बिल्कुल, और तो और जैल वायू भी है,
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