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  • 23 minutes ago
KGMU लखनऊ के डॉक्टर्स का कमाल, 'चमत्कारी' सर्जरी से बचाई 3 साल की बच्ची की जान

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00:00उत्तरप्रदेश के किंग जोर्ज मेडिकल कॉलेज के नियूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने एक अद्बुच्च मतकार किया है एक जो बच्ची थी मासूम उसके सर में अचानक गोली लग जाती है और वो गोली पूरे सर में घूम रही होती है जिसको ऑपर
00:30में तीन से चार लोगों की टीम थी हमारे साथ मौजूद है डॉक्टर अंकुर बजाज जी जो यह जटल ऑपरेशन था किस तरीके से था कैसे आप बताई हो पहले बताई कि गोली आखिर लगी सर के किस हिस्से में थी नमस्ते यह तीन साल की बच्ची है जिसको लगबग 40 �
01:00जैसा लग रहा है फिर वह हमारे पास अई लगबग 20 घंटे बाद तो मैं इसके मारे बता बताई है यह हमारा स्कल होता है ऐसी हमारी खोपड़ यह स्कल है इसकी पर मैं चम्री होती है तो गोली उसके राइट्स इदर इदर को लगी थी गोली उसके फ्रंटल पार्ट में �
01:30अगर इसको खोल के देखा जाए तो इसके अंदर हमारा दिमाग प्रोटेक्टेड रहता है हंडी के तु गोली हंडी को फालके अंदर फ्रेंटल पार्ट में थी तो लगभाग जादा अंदर नहीं थी पर जब दूसरा इसका हमारे पास हुआ जो कि लगभाग 20 घंटे बाद
02:00को सप्लाइ करने वाली सारी नसे मेजर नसे जैसे इंटरनल के उट्राटरी इधर से आती है यहां पर एक नसो का गुच्छा बनता है जिसको मेडिकल टम में सरकल और विलिस कहते है जो पूरे दिमाग को सप्लाइ करती है तो जब गोली इधर थी तो यह बड़ा ही पेची�
02:30सरक के पीछे थी तो लगबग चोट लगने के पांट घंटे बाद गोली इथे और 55 घंट यही है यह
02:40तो इस तरह के बुलेट को वांडरिंग बुलेट कहते है या माइगरेटरी बुलेट कहते है ये मेरा पहला एक्सपोजर था जब मैंने ऐसा देगा
02:49गोली लगातार मूव कर रही थी तो ऐसे में उसको आइडेंटिफाई कर पाना ऑपरेट कर पाना ये कितना बड़ा चैलेंज था आपके लिए क्योंकि आगर आप ऑपरेटरी शुरू करते तो गोली गहीं और भी मूव हो सकती थी
03:00बिलकुल तो इसके लिए हमने टीम बनाई हमारे होटी प्रोफएसर बीके ओजास अने नेत्तित प्र लिया इसका उनकी गईडेंस में हमने पहले ही मापदन मना लिए था कि हमें क्या क्या करना है तो हमने इंट्र ऑपरेटिव निदिए हम ऑपरेशन के दुमाद जो संसात
03:30इसमें आपको प्रिसीजन का बहुत बड़ा गोल है
03:33You have to death precise
03:35कि आपको जहां पर गोली है वही पर जाना है वही से निकालना
03:40नो सब एक सवाल है कि गोली जब लगती है दिमाग में तो आदमी तुरंट ही death हो जाती है
03:45लेकिन ये बच्ची इतने तक सर्वाइब करती रही इसके पीछे कि क्या वज़े आप मान रहे हैं
03:51तीन साल की बच्ची को गोली लगना अगर आप देखेंगे तो गोली ऐसी एक बुलिट लगना
03:56ठीक है ना इसमें ये कहूँगा कि ये गोली शायद दूर से लगए
04:00अगर जितनी पास से लगते हैं इंपक्ट गोली का उतना ज्यादा सर्वे होता है
04:05तो ये गोली अगर बहुत दूर से लगी हो तो इंपक्ट बहुत हो जाती है गोली
04:09दूसरा है कि जैसा इनको भी नहीं पढ़ता ऐसा होता है कभी-कभी रिटूट्रेटों की गोली आपने कई और मारी है पलट के दूसरी जबे आ जाए तो ऐसी गोली का भी इंपेक्ट काफी कम उटाता है
04:19तीसरा पार्ट है कि गोली आपके किस छेतर में लगी है दिमाग के एक दिमाग का पार्ट होता जिसको ब्रिन स्टेम कहते है दिमाग का स्थम्प अगर उधर लग जाती गोली तो इनसान का बढ़ना बहुत ही मुश्किल है
04:31इस बोली लगने के बाद उस बच्ची की याद्यास क्या प्रॉपर है इस ऑपरेशन के बाद बच्ची जब आई थी तब बिल्कुल भ्योश हालत में थी उसका एक हाथ पेर नहीं चलता था
04:47तो गोली उसके लेफ्ट दरफ में लगी थी तो हुमारे लेफ्ट हैंड है ना लेफ्ट वाला पाठ राइट वाले हाथ पेर को कंड्रॉल करता है
04:54तो उसका राइट हाथ और पैर बिल्कूल ही चलता नहीं था, भ्योशी की आहलत में थी, हमने ऑप्रेशन करके गोली निकाली और उसकी सूजन के लिए हमने इसे फोर कॉडरेंट क्रेनियो प्लास्टी करी इसकी, कि हमने इसकी हड़ी को चार पार्ट में बाटके उधर ही रि
05:24जो भी सूजन हो, वो दिमाग के अंदर के में एरिया को प्रेस ना करे, वो भार की तरफ प्रेशर दे और दिमाग के जो में एरिया है, वाइटल ओर्गंस है, वो बस सके, तो इसमें जब बच्ची थी, उसका बेट में हड़ी रखना इतना ठीक नहीं लगता था, इतना अ
05:54वो किया उसमें, और आप देखेंगे, अब बच्ची की जुड़ गई है, बच्ची स्वस्त की तरफ बढ़ गई है, जो हाथ पर नहीं चलता था, अब बच्ची उठाएं लगई है, इतना जटिल यह उपरेशन था, और आपको लग रहा था, कितनी संभावना थी बच्च
06:24तीसरा चैलेंज, बुलिट घूंती है, इस चेंजिंग इस पूजिशन, इसा वांडरिंग बुलिट, ऐसा मैंने सुना था, पड़ा था एक बार, पर पहला बिरा एकस्पोईर था ऐसा, कि यह वांडरिंग बुलिट भी है, तो इसमें जबर्दस चैलेंज थे, पहला कि ब
06:54कंप्यूटर में भी तुरह दिखा देजे किस तरीके की बुलेट थे और दूसरा, कि कितना समय लगा इसको पूरा रिवाइब करने में, और ऑपरेशन के बाद कब तक वो कब कमबैक आ गई, तो ऑपरेशन में खास बात है कि ऑपरेशन में इसको स्टेबल रखा हमारी एन
07:24प्रोफेसर एसन सिंग सर, शालनी त्रिपाटी मैं और डॉक्टर सिमरितीच है, उन्होंने इसका देख रेक करी, देख रेक करके आईसे देख रेज़े इंप्रूव गई, बुखार इंप्रूव हुआ, अब लगबग 40 दिन हो गए है, यह अपना हाद उठा पा रही है, �
07:54यह दूसरे स्कैन में बुलिट अंदर की तरफ थी, अच्छा, यह अगर CT एंजियोग्राफी की पिच्छर काटी में, इसमें आप देख सकते हैं, बुलिट पीछे की तरफ खुसकुसे थी, और यह वैसल दिख रही है, यह आईसे दिख रहा है आपका, जो हमने इंट्रॉ
08:24अब बच्छी पूरी तरीके स्वस्ति, अभी बच्छी इंप्रॉवेंट ट्रेंड पे है, अच्छा तब लगगा जब बच्छी अपने पैरों पे
08:54चलके हसी खेलती मेरे पास आएगी, तो मेरे दिल को जो खुशी मिलेगी उबाता लागी, इस तरीके का यह जटल ओपरेशन पहली बार ऐच्छा हुआ है, आपके स्ट्री में आपने देखा है, और क्या लग रहा था, कितने प्रिस्ट आप शियोर थे कि इसको आप सक्सेस
09:24बैलिट्स निकाली है, बुलिट्स निकाली है, दिमाग के कहीं गई छेतरों से निकाली है, और ऐसी वांडरिंग बुलिट्स मैंने अपने जीवन में पहला एक पुरिया था, बच्ची की यादास कांटीनू रहेगी वैसा, यह तो आगे भविश बचाएगा, पर बच्च
09:54बिलता इसकी बताई किसकदर वो 40 दिनों तक वो इस पूरे इस ट्राप में रही, इस पूरे जो बुलिट गया था, उसके बाद निकालना और ठीक करना, आज भले ही बच्ची अपने घर पहुच गई हो, लेकिन जिस तरीके से ऑपरेशन जटिल था, उसको डॉक्टर अंक
10:24आशी शर्बास तो, आज तक!
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